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Kannauj News: मानकों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे शीतगृह
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कन्नौज। जिले में आलू उत्पादन बढ़ने के कारण नए शीतगृहों का निर्माण हो रहा है। इन निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेजों में मानकों की अनदेखी की जा रही है। इससे भविष्य में ये शीतगृह आम जनता के लिए जान का जोखिम बन सकते हैं।
जिले में कुल 197 शीतगृह हैं, जहां हर साल हजारों मीट्रिक टन आलू भंडारित होता है। वर्तमान में शीतगृहों का निर्माण मनमाने ढंग से हो रहा है। स्थलों के चयन के मानकों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। तैयार शीतगृहों में क्षमता से अधिक भंडारण किया जा रहा है। जिले में अमोनिया गैस के रिसाव को रोकने के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। उद्यान विभाग और लोक निर्माण विभाग को निर्माण से शुरू होने तक जांच करनी होती है। हालांकि, जिले में शायद ही कोई शीतगृह सभी नियमों का पालन करता है। विभागों की उदासीनता के कारण अभी तक इनकी जांच नहीं हुई है।
नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के अनुसार कोल्ड निर्माण का प्रावधान है। 90 फीसदी निर्माण के बाद भवन की जांच लोक निर्माण विभाग से कराई जाती है। लोक निर्माण विभाग की टीम कोल्ड की सड़क से दूरी, भूकंप रहित इमारत और सुरक्षा इंतजाम देखती है। हालांकि, अधिकारी बिना देखे ही अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। शीतगृह की मियाद 70 साल होती है, पर हर साल उद्यान व लोक निर्माण विभाग को इसकी मॉनिटरिंग करनी होती है, जो नहीं हो रही है।
जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग या राजकीय निर्माण निगम जांच के बाद ही लाइसेंस देते हैं। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने सभी शीतगृहों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई होगी और जिला उद्यान अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कोल्ड स्टोरेज अधिनियम 1976 के तहत सजा और अर्थदंड का भी प्रावधान है।
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जिले में कुल 197 शीतगृह हैं, जहां हर साल हजारों मीट्रिक टन आलू भंडारित होता है। वर्तमान में शीतगृहों का निर्माण मनमाने ढंग से हो रहा है। स्थलों के चयन के मानकों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। तैयार शीतगृहों में क्षमता से अधिक भंडारण किया जा रहा है। जिले में अमोनिया गैस के रिसाव को रोकने के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। उद्यान विभाग और लोक निर्माण विभाग को निर्माण से शुरू होने तक जांच करनी होती है। हालांकि, जिले में शायद ही कोई शीतगृह सभी नियमों का पालन करता है। विभागों की उदासीनता के कारण अभी तक इनकी जांच नहीं हुई है।
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नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के अनुसार कोल्ड निर्माण का प्रावधान है। 90 फीसदी निर्माण के बाद भवन की जांच लोक निर्माण विभाग से कराई जाती है। लोक निर्माण विभाग की टीम कोल्ड की सड़क से दूरी, भूकंप रहित इमारत और सुरक्षा इंतजाम देखती है। हालांकि, अधिकारी बिना देखे ही अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। शीतगृह की मियाद 70 साल होती है, पर हर साल उद्यान व लोक निर्माण विभाग को इसकी मॉनिटरिंग करनी होती है, जो नहीं हो रही है।
जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग या राजकीय निर्माण निगम जांच के बाद ही लाइसेंस देते हैं। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने सभी शीतगृहों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई होगी और जिला उद्यान अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कोल्ड स्टोरेज अधिनियम 1976 के तहत सजा और अर्थदंड का भी प्रावधान है।