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Kannauj News: चकबंदी अटकी, किसान फंसे... फॉर्मर रजिस्ट्री पर लगा ब्रेक
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जलालाबाद। ग्राम पंचायत जलालाबाद में वर्ष 2017 से चल रही चकबंदी प्रक्रिया किसानों के लिए नई मुसीबत बन गई है। चकबंदी निरस्त होने की चर्चा और अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद अब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसका सीधा असर किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री पर पड़ रहा है। रजिस्ट्री न बनने से किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी झेल रहे हैं।
ग्राम पंचायत जलालाबाद, हरदेवपुरवा और गोरियाताल मजरे को मिलाकर 10 हजार आबादी के 1294 किसान चकबंदी प्रक्रिया में शामिल हैं। वर्ष 2025 में पत्र-23 के प्रकाशन के बाद कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। चकबंदी निरस्त कराने की मांग को लेकर किसानों ने ग्राम पंचायत सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार धरना-प्रदर्शन किया था। मामले में मंत्री असीम अरुण और कैलाश राजपूत के हस्तक्षेप के बाद जिलाधिकारी ने फाइल चकबंदी आयुक्त को भेजी थी।च
कबंदी आयुक्त के निर्देश पर किसानों से लिखित राय ली गई थी, जिसमें 80 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी के विरोध में अपनी सहमति दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने चकबंदी निरस्त किए जाने की बात कही थी लेकिन अब तक कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध न होने से फॉर्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। इससे उन्हें राजकीय बीज भंडार से सब्सिडी पर बीज, साधन सहकारी समिति से खाद और सरकारी क्रय केंद्रों पर फसल बेचने जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
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किसान अमित दिवाकर, जुगुल किशोर वर्मा, लोगी वर्मा, विनय अवस्थी, ब्रजेश दुबे और राहुल सैनी समेत अन्य किसानों ने जिलाधिकारी से चकबंदी प्रक्रिया निरस्त कर अभिलेख राजस्व विभाग को हस्तांतरित कराने की मांग की है। इससे किसानों को ऑनलाइन इंतखाब और अन्य राजस्व संबंधी सुविधाएं मिल सकेंगी।
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ग्राम पंचायत जलालाबाद, हरदेवपुरवा और गोरियाताल मजरे को मिलाकर 10 हजार आबादी के 1294 किसान चकबंदी प्रक्रिया में शामिल हैं। वर्ष 2025 में पत्र-23 के प्रकाशन के बाद कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। चकबंदी निरस्त कराने की मांग को लेकर किसानों ने ग्राम पंचायत सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार धरना-प्रदर्शन किया था। मामले में मंत्री असीम अरुण और कैलाश राजपूत के हस्तक्षेप के बाद जिलाधिकारी ने फाइल चकबंदी आयुक्त को भेजी थी।च
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कबंदी आयुक्त के निर्देश पर किसानों से लिखित राय ली गई थी, जिसमें 80 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी के विरोध में अपनी सहमति दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने चकबंदी निरस्त किए जाने की बात कही थी लेकिन अब तक कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध न होने से फॉर्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। इससे उन्हें राजकीय बीज भंडार से सब्सिडी पर बीज, साधन सहकारी समिति से खाद और सरकारी क्रय केंद्रों पर फसल बेचने जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
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किसान अमित दिवाकर, जुगुल किशोर वर्मा, लोगी वर्मा, विनय अवस्थी, ब्रजेश दुबे और राहुल सैनी समेत अन्य किसानों ने जिलाधिकारी से चकबंदी प्रक्रिया निरस्त कर अभिलेख राजस्व विभाग को हस्तांतरित कराने की मांग की है। इससे किसानों को ऑनलाइन इंतखाब और अन्य राजस्व संबंधी सुविधाएं मिल सकेंगी।