{"_id":"69f63e77c477b542ff05ac7a","slug":"emphasis-on-art-music-and-physical-education-kannauj-news-c-12-1-knp1094-1511324-2026-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: कला, संगीत, और शारीरिक शिक्षा पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: कला, संगीत, और शारीरिक शिक्षा पर जोर
विज्ञापन
विज्ञापन
जसोदा (कन्नौज)। सरस्वती शिशु मंदिर में प्रधानाचार्यों को कार्ययोजना के तहत दिया जा रहा चार दिवसीय प्रशिक्षण शनिवार को पूरा हुआ। प्रशिक्षण में औरैया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, जालौन, इटावा,,फर्रुखाबाद, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर, झांसी, बांदा, कर्वी, कन्नौज समेत 14 जिलों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण में शिक्षा का स्तर सुधारने, सामाजिक गतिविधियों को बढ़ाने सहित प्रबंध समिति अभिभावकों की सक्रियता को लेकर टिप्स दिए गए। प्रशिक्षण में शनिवार को क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र ने प्रधानाचार्यों से वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के विकास के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। साथ ही मासिक, साप्ताहिक और दैनिक योजना भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्या भारती के इतिहास के बारे में बताया कि संस्था की शुरुआत 1952 में गोरखपुर के पक्की बाग में एक शिशु मंदिर से हुई थी। विद्या भारती का उद्देश्य विद्यार्थियों का बौद्धिक, मानसिक, आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास करना है। संगठन मंत्री ने कहा कि यदि विद्यालय कार्ययोजना बना कर उसमें सक्रिय होकर कार्य करेंगे तथा पिछली कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे तो हम समझ पाएंगें कि हम को कहां तक जाना था और कितना पहुंच चुके हैं। कार्य योजना के जो बिंदु छूट गए हैं, उन्हें पूर्ण कैसे किया जाए जिससे विद्यालय और छात्रों का पूर्ण विकास हो।
उन्होंने बताया कि समय बदल रहा है, समाज में अपने को स्थापित रखने के लिए समाज की सोच को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा। कहा कि कला, संगीत, और शारीरिक शिक्षा पर विशेष बल देने को आवश्यकता है। समारोह में प्रधानाचार्य छुन्नू लाल कनौजिया ने सभी आगंतुक प्रधानाचार्यों व अतिथियों को अंग वस्त्र व उपहार देकर सम्मानित किया। इस दौरान विद्यालय के अध्यापक संजीव चतुर्वेदी, रामपाल कुशवाहा, रिंकू पाल, महेश यादव, ललित अवस्थी, ध्रुव पाठक, प्रियंक पाठक, आकाश कुमार आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
प्रशिक्षण में शिक्षा का स्तर सुधारने, सामाजिक गतिविधियों को बढ़ाने सहित प्रबंध समिति अभिभावकों की सक्रियता को लेकर टिप्स दिए गए। प्रशिक्षण में शनिवार को क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र ने प्रधानाचार्यों से वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के विकास के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। साथ ही मासिक, साप्ताहिक और दैनिक योजना भी आवश्यक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने विद्या भारती के इतिहास के बारे में बताया कि संस्था की शुरुआत 1952 में गोरखपुर के पक्की बाग में एक शिशु मंदिर से हुई थी। विद्या भारती का उद्देश्य विद्यार्थियों का बौद्धिक, मानसिक, आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास करना है। संगठन मंत्री ने कहा कि यदि विद्यालय कार्ययोजना बना कर उसमें सक्रिय होकर कार्य करेंगे तथा पिछली कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे तो हम समझ पाएंगें कि हम को कहां तक जाना था और कितना पहुंच चुके हैं। कार्य योजना के जो बिंदु छूट गए हैं, उन्हें पूर्ण कैसे किया जाए जिससे विद्यालय और छात्रों का पूर्ण विकास हो।
उन्होंने बताया कि समय बदल रहा है, समाज में अपने को स्थापित रखने के लिए समाज की सोच को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा। कहा कि कला, संगीत, और शारीरिक शिक्षा पर विशेष बल देने को आवश्यकता है। समारोह में प्रधानाचार्य छुन्नू लाल कनौजिया ने सभी आगंतुक प्रधानाचार्यों व अतिथियों को अंग वस्त्र व उपहार देकर सम्मानित किया। इस दौरान विद्यालय के अध्यापक संजीव चतुर्वेदी, रामपाल कुशवाहा, रिंकू पाल, महेश यादव, ललित अवस्थी, ध्रुव पाठक, प्रियंक पाठक, आकाश कुमार आदि मौजूद रहे।
