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Kannauj News: एसटीएफ ने पूछताछ के बाद रोहन को छोड़ा
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तिर्वा (कन्नौज)। कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस और एसटीएफ इस प्रकरण से जुड़े सभी लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। ताकि इसमें शामिल सभी आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
जांच के दौरान एसटीएफ ने शनिवार की देर शाम तिर्वा कस्बे के अशोक नगर निवासी रोहन को हिरासत में लिया था। 36 घंटे तक गहन पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे रविवार को छोड़ दिया, लेकिन जांच पूरी होने तक उस पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उसे हिदायत दी गई है कि बिना अनुमति शहर नहीं छोड़ेगा और बुलाए जाने पर तुरंत पुलिस के सामने उपस्थित होगा। रोहन ने दोस्त नरेंद्र व संदीप के साथ मिलकर कानपुर में एक किराए के मकान में मेडिलाइफ अस्पताल संचालित किया था।
अस्पताल का काम अधिकतम नरेंद्र व संदीप देखते थे, रोहन ज्यादातर तिर्वा में अपने परिवार के साथ रहता था। 30 मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट का मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसी क्रम में रोहन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उधर,हसेरन कस्बे के नादेमऊ निवासी संदीप को भी एसटीएफ ने उठाया था। सोमवार को उसे घर रहने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया। बताया गया कि संदीप का एक मेडिकल स्टोर भी है और कस्बे में रोहन के साथ मिलकर प्राइवेट हॉस्पिटल चला रहा था। किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह से वह कैसे जुड़ा, इस बारे में एसटीएफ जानकारी कर रही है। संदीप के पिता रिटायर्ड बैंक कर्मचारी हैं, उन्हें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार का कहना है कि पूरे मामले की एसटीएफ जांच कर रही है, जिसमें स्थानीय पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। यदि वह सहयोग मांगेंगे तो मदद की जाएगी।
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जांच के दौरान एसटीएफ ने शनिवार की देर शाम तिर्वा कस्बे के अशोक नगर निवासी रोहन को हिरासत में लिया था। 36 घंटे तक गहन पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे रविवार को छोड़ दिया, लेकिन जांच पूरी होने तक उस पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उसे हिदायत दी गई है कि बिना अनुमति शहर नहीं छोड़ेगा और बुलाए जाने पर तुरंत पुलिस के सामने उपस्थित होगा। रोहन ने दोस्त नरेंद्र व संदीप के साथ मिलकर कानपुर में एक किराए के मकान में मेडिलाइफ अस्पताल संचालित किया था।
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अस्पताल का काम अधिकतम नरेंद्र व संदीप देखते थे, रोहन ज्यादातर तिर्वा में अपने परिवार के साथ रहता था। 30 मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट का मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसी क्रम में रोहन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उधर,हसेरन कस्बे के नादेमऊ निवासी संदीप को भी एसटीएफ ने उठाया था। सोमवार को उसे घर रहने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया। बताया गया कि संदीप का एक मेडिकल स्टोर भी है और कस्बे में रोहन के साथ मिलकर प्राइवेट हॉस्पिटल चला रहा था। किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह से वह कैसे जुड़ा, इस बारे में एसटीएफ जानकारी कर रही है। संदीप के पिता रिटायर्ड बैंक कर्मचारी हैं, उन्हें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार का कहना है कि पूरे मामले की एसटीएफ जांच कर रही है, जिसमें स्थानीय पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। यदि वह सहयोग मांगेंगे तो मदद की जाएगी।