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Kannauj News: जेल में बंदियों के भागने के मामले में लापरवाही सामने आई, साजिश नहीं
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कन्नौज। जिला जेल में पांच जनवरी को दो बंदियों के फरार होने के मामले में हुई जांच में साजिश का पता नहीं चला है, बल्कि जेल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। कानपुर रेंज के डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता ने बुधवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस लापरवाही के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही नए जेल अधीक्षक की नियुक्ति की जाएगी।
पांच जनवरी की सुबह 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हुए दो बंदी अंकित और शिवा पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने 14 दिन बाद डिंपी उर्फ शिवा को गिरफ्तार कर लिया था। डीआईजी ने जेल में करीब दो घंटे निरीक्षण किया और गिरफ्तार बंदी शिवा से भी पूछताछ की। इस दौरान डीआईजी जेल ने कारागार की विभिन्न बैरकों, मेस और अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने जेल की सुरक्षा घेरेबंदी और सीसीटीवी की कार्यप्रणाली की भी जांच की। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा में कोताही बर्दाश्त न करने की हिदायत देते हुए उन्होंने प्रहरियों को ड्यूटी पर विशेष सतर्कता बरतने और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।
गिरफ्तार बंदी शिवा ने उगले राज, गुजरात से गिरफ्तारी का दावा
डीआईजी ने जेल में लाए गए बंदी डिंपी उर्फ शिवा से फरार होने की घटना और सुरक्षा में हुई चूक के बारे में जानकारी प्राप्त की। बंदी शिवा ने बताया कि मोहित नामक व्यक्ति ने उसे जेल से भागने में मदद की थी। जेल सूत्रों के अनुसार, बंदी शिवा ने डीआईजी को बताया कि वह जेल से भागने के बाद प्रेमिका से मिलने गुजरात चला गया था। वहां प्रेमिका के परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने पर उसे पकड़ा गया और बाद में गुरसहायगंज लाकर मुठभेड़ में गिरफ्तारी दिखाई गई। हालांकि, डीआईजी ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन बंदी के बयान से पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ की कहानी पर सवाल उठने लगे।
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पांच जनवरी की सुबह 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हुए दो बंदी अंकित और शिवा पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने 14 दिन बाद डिंपी उर्फ शिवा को गिरफ्तार कर लिया था। डीआईजी ने जेल में करीब दो घंटे निरीक्षण किया और गिरफ्तार बंदी शिवा से भी पूछताछ की। इस दौरान डीआईजी जेल ने कारागार की विभिन्न बैरकों, मेस और अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने जेल की सुरक्षा घेरेबंदी और सीसीटीवी की कार्यप्रणाली की भी जांच की। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा में कोताही बर्दाश्त न करने की हिदायत देते हुए उन्होंने प्रहरियों को ड्यूटी पर विशेष सतर्कता बरतने और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।
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डीआईजी ने जेल में लाए गए बंदी डिंपी उर्फ शिवा से फरार होने की घटना और सुरक्षा में हुई चूक के बारे में जानकारी प्राप्त की। बंदी शिवा ने बताया कि मोहित नामक व्यक्ति ने उसे जेल से भागने में मदद की थी। जेल सूत्रों के अनुसार, बंदी शिवा ने डीआईजी को बताया कि वह जेल से भागने के बाद प्रेमिका से मिलने गुजरात चला गया था। वहां प्रेमिका के परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने पर उसे पकड़ा गया और बाद में गुरसहायगंज लाकर मुठभेड़ में गिरफ्तारी दिखाई गई। हालांकि, डीआईजी ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन बंदी के बयान से पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ की कहानी पर सवाल उठने लगे।
