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Kannauj News: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, बढ़ी सर्दी
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कन्नौज। मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दिन भर तेज पुरवा हवाओं और खिली धूप के बाद शुक्रवार की शाम होते ही आसमान घिर आया और देर रात तक रिमझिम से झमाझम बारिश होती रही। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि की सूचना है जिससे तापमान में गिरावट आई है और रबी की फसलों को गहरा झटका लगा है।
बेमौसम बरसात का सबसे घातक प्रहार प्रमुख आलू की फसल पर पड़ा है। वर्तमान में आलू की खोदाई जोरों पर थी पर खेतों में पानी भरने से काम पूरी तरह ठप हो गया है। गीली मिट्टी के कारण मशीनों और श्रमिकों द्वारा खुदाई संभव नहीं है। इससे फसल के सड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है। यह किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। उधर, गुगरापुर क्षेत्र में हल्की बारिश को खेतों में खड़ी फसलों के लिए राहत माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक वीके कनौजिया के अनुसार, यदि बारिश हल्की और सीमित मात्रा में होती है, तो गेहूं, सरसों, चना, मटर और अन्य रबी फसलों को लाभ मिलेगा। इससे जड़ों तक नमी पहुंचेगी और बढ़वार बेहतर होगी जिससे सिंचाई का खर्च भी कम होगा। हालांकि, उन्होंने अधिक बारिश की स्थिति में जलभराव से नुकसान की आशंका भी जताई है।
रबी फसलों को भी खतरा, सर्दी बढ़ी
बारिश के साथ चली सर्द हवाओं ने जिले में एक बार फिर कड़ाके की ठंड का अहसास करा दिया है। आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोग फिर से गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में बादल छाए रहने की संभावना है। यदि बारिश जारी रहती है, तो सरसों और गेहूं की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। छिबरामऊ क्षेत्र के किसानों और विशुनगढ़ के प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश राजपूत ने भी गेहूं, सरसों, आलू और मौसमी सब्जियों की फसल में भारी नुकसान की आशंका जताई है। फसलों में बीमारियां लगने की संभावना भी बढ़ गई है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ों पर हिमपात हो रहा है। इस कारण मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। इससे तापमान गिरेगा और फसलों को नुकसान होने की संभावना है। प्रशासन नुकसान का आकलन करने की तैयारी में जुटा है।
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बेमौसम बरसात का सबसे घातक प्रहार प्रमुख आलू की फसल पर पड़ा है। वर्तमान में आलू की खोदाई जोरों पर थी पर खेतों में पानी भरने से काम पूरी तरह ठप हो गया है। गीली मिट्टी के कारण मशीनों और श्रमिकों द्वारा खुदाई संभव नहीं है। इससे फसल के सड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है। यह किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। उधर, गुगरापुर क्षेत्र में हल्की बारिश को खेतों में खड़ी फसलों के लिए राहत माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक वीके कनौजिया के अनुसार, यदि बारिश हल्की और सीमित मात्रा में होती है, तो गेहूं, सरसों, चना, मटर और अन्य रबी फसलों को लाभ मिलेगा। इससे जड़ों तक नमी पहुंचेगी और बढ़वार बेहतर होगी जिससे सिंचाई का खर्च भी कम होगा। हालांकि, उन्होंने अधिक बारिश की स्थिति में जलभराव से नुकसान की आशंका भी जताई है।
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रबी फसलों को भी खतरा, सर्दी बढ़ी
बारिश के साथ चली सर्द हवाओं ने जिले में एक बार फिर कड़ाके की ठंड का अहसास करा दिया है। आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोग फिर से गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में बादल छाए रहने की संभावना है। यदि बारिश जारी रहती है, तो सरसों और गेहूं की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। छिबरामऊ क्षेत्र के किसानों और विशुनगढ़ के प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश राजपूत ने भी गेहूं, सरसों, आलू और मौसमी सब्जियों की फसल में भारी नुकसान की आशंका जताई है। फसलों में बीमारियां लगने की संभावना भी बढ़ गई है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ों पर हिमपात हो रहा है। इस कारण मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। इससे तापमान गिरेगा और फसलों को नुकसान होने की संभावना है। प्रशासन नुकसान का आकलन करने की तैयारी में जुटा है।
