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Banda: 33 बच्चों को बनाया था हवस का शिकार, कोर्ट ने दंपती को सुनाई फांसी की सजा, 10-10 लाख की मदद का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 20 Feb 2026 04:38 PM IST
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सार

Banda News: बांदा की विशेष अदालत ने 33 मासूम बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने के दोषी दंपती को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

Banda 33 children were made victims of lust court sentenced couple to death compensation of Rs 10 lakh each
कोर्ट का फैसला - फोटो : FreePik
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विस्तार

बांदा की एक विशेष अदालत ने प्रारंभिक यौन शोषण के आरोप में दंपती को फांसी की सजा सुनाई है। इस दंपती पर 33 मासूम बच्चों के साथ घिनौनी हरकतें करने और उनकी अश्लील वीडियो व तस्वीरें विदेशों में बेचकर लाखों रुपये कमाने का गंभीर आरोप था। अदालत ने पीड़ित बच्चों के परिवारों को राज्य और केंद्र सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी आदेश दिया है।

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यह मामला तब प्रकाश में आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी गहन जांच और पुख्ता सबूतों के आधार पर सिंचाई विभाग के निलंबित अवर अभियंता रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को लगभग पांच साल पहले गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उनके घर से पेन ड्राइव, लैपटॉप और मोबाइल जैसे कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे। इनमें इस जघन्य अपराध से जुड़े अहम सुराग मिले थे।

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दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई
विशेष अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर दंपती को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला अत्यंत जघन्य और दुर्लभतम श्रेणी में आता है, जिसमें बच्चों की मासूमियत को तार-तार किया गया। बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाने और समाज में इस तरह के अपराधों को रोकने के उद्देश्य से, अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्देश
अदालत ने न केवल आरोपियों को कठोर दंड दिया है, बल्कि पीड़ित बच्चों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाई है। अदालत ने आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह राशि पीड़ितों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार साबित होगी।

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