बांदा में आसमानी आफत: 44.1 डिग्री पर तवे की तरह तपी धरती, 'नौतपा' से पहले ही छूट रहे पसीने
Banda News: बुंदेलखंड के बांदा में अप्रैल के महीने में ही जेठ की तपिश का अहसास होने लगा है। आसमान से बरसती आग ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
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सूर्य की प्रचंडता का असली दौर 'नौतपा' आना बाकी है, लेकिन उससे पहले ही लू के थपेड़ों और झुलसाने वाली गर्मी ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अप्रैल की गर्मी ने 2022 के भीषणतम रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2022 में अप्रैल का औसत अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री रहा था, जबकि इस बार पारा पहले ही 44.5 डिग्री के स्तर को छू चुका है। धरती तवे की तरह तप रही है और सुबह 10 बजे के बाद ही सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है।
पांच साल का रिकॉर्ड टूटा, लू के थपेड़ों ने किया बेहाल
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो वर्ष 2026 का अप्रैल पिछले पांच वर्षों में सबसे गर्म साबित हो रहा है। न्यूनतम तापमान भी 26 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे रात में भी राहत नहीं मिल रही है। गर्म पछुआ हवाओं (लू) ने दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है। दोपहर के समय आसमान से बरस रही आग के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग जरूरी होने पर ही चेहरे को ढककर बाहर निकल रहे हैं।
कलेक्ट्रेट में प्यासे रहे फरियादी, आरओ मशीन ने दिया जवाब
एक ओर जहां प्रशासन लोगों से गर्मी में सावधानी बरतने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कलेक्ट्रेट परिसर में ही सरकारी दावे दम तोड़ते नजर आए। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर फरियादियों की प्यास बुझाने के लिए लगाई गई आरओ मशीन मंगलवार को दगा दे गई। भीषण गर्मी में दूर-दराज से आए लोग जब पानी पीने पहुंचे, तो मशीन के नल से बमुश्किल एक कुल्ला पानी ही निकला। प्रशासन की नाक के नीचे पेयजल की इस बदहाली ने फरियादियों को बेहद निराश किया।
नौतपा आने से पहले ही खौफ में लोग
ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से भीषण गर्मी का समय 'नौतपा' अभी आना बाकी है। मई के अंतिम सप्ताह में शुरू होने वाले नौतपा से पहले ही जिस तरह धरती तप रही है, उसने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि अप्रैल में ही पारा 44 डिग्री पार कर गया है, तो आने वाले दो महीनों में स्थिति और भी विकराल हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने भी बढ़ती तपिश के कारण फसलों और पशुधन के प्रति चिंता व्यक्त की है।

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