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डिग्री खरीद-फरोख्त केस: विश्वविद्यालयों के बाबुओं की कुंडली खंगालने में जुटी एसआईटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 23 Feb 2026 03:19 PM IST
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सार
नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की डिग्री खरीद-फरोख्त के मामले में जांच तेज हो गई है। विश्वविद्यालयों के कई लोगों की मिलीभगत की शंका है। सहयोगियों के खाते जांचे जाएंगे।
सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की डिग्री खरीद-फरोख्त में बाबुओं और कर्मचारियों की मिलीभगत के सुराग मिले हैं। अब एसआईटी इन विश्वविद्यालयों के बाबुओं और कर्मचारियों की जानकारी जुटाने में लग गई है। एसआईटी के इंस्पेक्टर के नेतृत्व वाली टीम को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इन लोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच में सहयोग मांगा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी के सदस्यों की शनिवार को हुई पहली बैठक में पांच टीमें बनाई गई थी। इसमें से एक टीम को विश्वविद्यालयों में जाकर डिग्री का वहां के गजट से सत्यापन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यह बाबुओं और उनके सहायकों से पूछताछ भी करेंगे। संदिग्ध लगने पर विश्वविद्यालय को सूचना देकर उन्हें हिरासत में भी ले सकेंगे। टीम के सदस्य उनके बैंक खातों की भी जांच करेंगे। संदिग्ध लेनदेन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कॉल डिटेल्स खोल सकती है कई अहम राज
आरोपियों की कॉल डिटेल्स से कई अहम राज खुल सकते हैं। एसआईटी के सदस्य कॉल डिटेल्स की जानकारी भी जुटा रहे हैं। एसआईटी के सदस्यों को उम्मीद है कि इससे कई ऐसे लोगों के नाम सामने आएंगे जो विश्वविद्यालयों से जुड़े या उनके कर्मचारी हो सकते हैं। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि जांच शुरू हो गई है। जल्द ही इससे जुड़े कई आराेपियों की पहचान करने के बाद उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
डिग्री की दुकान चलाने वालों के बैंक खातों की हो रही जांच
बिना दाखिला और पढ़ाई के नामी विश्वविद्यालयों से मनचाही डिग्री दिलाने वाले आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू हो गई है। एसआईटी के सदस्य आरोपियों के बैंक खातों से हुए लेनदेन की जानकारी जुटा रहे हैं। इन सदस्यों के बैंक खातों की जानकारी संबंधित बैंक को ई-मेल कर उनके लेनदेन का पिछले कई वर्षों का विवरण मांगा गया है। आरोपियों के खाते एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक में हैं।
किदवईनगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार राम के अनुसार पुलिस ने जब आरोपियों को उनके जूही गोशाला स्थित कार्यालय से गिरफ्तार किया था तो वहां से बड़ी धनराशि के सात चेक मिले थे। हालांकि इन चेक पर किसी का नाम नहीं लिखा था लेकिन इनमें डेढ़ लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की धनराशि लिखी थी। इन चेक का कुल मूल्य करीब 60 लाख रुपये है। आरोपियों ने पूछताछ में इन चेक के बारे में कुछ भी नहीं बताया है। ऐसे में पुलिस के लिए इन चेक के इस्तेमाल के बारे में जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा पुलिस गिरोह के सदस्यों की संपत्ति के बारे में भी पता लगा रही हैं। सबसे ज्यादा संपत्ति गिरोह के सरगना बताए जा रहे शैलेंद्र कुमार ओझा के पास है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, शैलेंद्र का शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन का कार्यालय करीब 40 लाख रुपये में तैयार किया गया है। वहीं, पनकी में 30 लाख रुपये का फ्लैट, रमईपुर में 75 लाख का प्लाॅट, बिधनू में करीब 50-50 लाख रुपये कीमत की दो भूमि हैं। आरोपी के पास 20 लाख रुपये कीमत वाली सेल्टॉज कार भी है। आरोपियों के पास से पुलिस ने एक स्कॉर्पियो और एक आई-20 कार भी बरामद की थी।
यह है पूरा मामला
किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गोशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन में छापा मारा था। यहां उन्हें नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की एक हजार से ज्यादा डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। यहां सर्वाधिक 357 डिग्री कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की बरामद हुईं थीं। सभी की खास बात यह थी कि वह ऑनलाइन जांच में भी दिखाई दे रहीं थीं। यहां माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट व प्रमाण पत्र भी मिले थे। पुलिस ने मौके से सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था जबकि पांच आरोपियों की अभी भी तलाश है। आरोपी 50 हजार में हाईस्कूल की मार्कशीट और 1.5 लाख रुपये में बीटेक की डिग्री दे रहे थे।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी के सदस्यों की शनिवार को हुई पहली बैठक में पांच टीमें बनाई गई थी। इसमें से एक टीम को विश्वविद्यालयों में जाकर डिग्री का वहां के गजट से सत्यापन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यह बाबुओं और उनके सहायकों से पूछताछ भी करेंगे। संदिग्ध लगने पर विश्वविद्यालय को सूचना देकर उन्हें हिरासत में भी ले सकेंगे। टीम के सदस्य उनके बैंक खातों की भी जांच करेंगे। संदिग्ध लेनदेन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कॉल डिटेल्स खोल सकती है कई अहम राज
आरोपियों की कॉल डिटेल्स से कई अहम राज खुल सकते हैं। एसआईटी के सदस्य कॉल डिटेल्स की जानकारी भी जुटा रहे हैं। एसआईटी के सदस्यों को उम्मीद है कि इससे कई ऐसे लोगों के नाम सामने आएंगे जो विश्वविद्यालयों से जुड़े या उनके कर्मचारी हो सकते हैं। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि जांच शुरू हो गई है। जल्द ही इससे जुड़े कई आराेपियों की पहचान करने के बाद उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
डिग्री की दुकान चलाने वालों के बैंक खातों की हो रही जांच
बिना दाखिला और पढ़ाई के नामी विश्वविद्यालयों से मनचाही डिग्री दिलाने वाले आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू हो गई है। एसआईटी के सदस्य आरोपियों के बैंक खातों से हुए लेनदेन की जानकारी जुटा रहे हैं। इन सदस्यों के बैंक खातों की जानकारी संबंधित बैंक को ई-मेल कर उनके लेनदेन का पिछले कई वर्षों का विवरण मांगा गया है। आरोपियों के खाते एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक में हैं।
किदवईनगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार राम के अनुसार पुलिस ने जब आरोपियों को उनके जूही गोशाला स्थित कार्यालय से गिरफ्तार किया था तो वहां से बड़ी धनराशि के सात चेक मिले थे। हालांकि इन चेक पर किसी का नाम नहीं लिखा था लेकिन इनमें डेढ़ लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की धनराशि लिखी थी। इन चेक का कुल मूल्य करीब 60 लाख रुपये है। आरोपियों ने पूछताछ में इन चेक के बारे में कुछ भी नहीं बताया है। ऐसे में पुलिस के लिए इन चेक के इस्तेमाल के बारे में जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा पुलिस गिरोह के सदस्यों की संपत्ति के बारे में भी पता लगा रही हैं। सबसे ज्यादा संपत्ति गिरोह के सरगना बताए जा रहे शैलेंद्र कुमार ओझा के पास है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, शैलेंद्र का शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन का कार्यालय करीब 40 लाख रुपये में तैयार किया गया है। वहीं, पनकी में 30 लाख रुपये का फ्लैट, रमईपुर में 75 लाख का प्लाॅट, बिधनू में करीब 50-50 लाख रुपये कीमत की दो भूमि हैं। आरोपी के पास 20 लाख रुपये कीमत वाली सेल्टॉज कार भी है। आरोपियों के पास से पुलिस ने एक स्कॉर्पियो और एक आई-20 कार भी बरामद की थी।
यह है पूरा मामला
किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गोशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन में छापा मारा था। यहां उन्हें नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की एक हजार से ज्यादा डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। यहां सर्वाधिक 357 डिग्री कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की बरामद हुईं थीं। सभी की खास बात यह थी कि वह ऑनलाइन जांच में भी दिखाई दे रहीं थीं। यहां माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट व प्रमाण पत्र भी मिले थे। पुलिस ने मौके से सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था जबकि पांच आरोपियों की अभी भी तलाश है। आरोपी 50 हजार में हाईस्कूल की मार्कशीट और 1.5 लाख रुपये में बीटेक की डिग्री दे रहे थे।
