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Kanpur: आईआईटी की डिवाइस मिनटों में करेगी फेफड़ों के कैंसर की जांच, बैटरी से चलेगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 23 Feb 2026 03:07 PM IST
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Kanpur: IIT's device will detect lung cancer in minutes, will run on battery
आईआईटी की डिवाइस - फोटो : अमर उजाला
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फेफड़ों की जांच कर शुरुआत के लक्षणों के आधार पर ही कैंसर होने का पता लगाया जा सकता है। ऐसा संभव हुआ है आईआईटी कानपुर के एसआईआईसी में इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप लेनेक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से तैयार पोर्टेबल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्क्रीनिंग डिवाइस की मदद से। डिवाइस की मदद से अब फेफड़ों में प्रारंभिक स्तर पर कैंसर की मिनटों में जांच हो सकेगी।
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हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल एआई इम्पैक्ट समिट में भी डिवाइस का प्रदर्शन किया गया। वहां इसे इंडिया एआई–एनसीजी कैच ग्रांट चैलेंज 2026 के तहत उपलब्धि प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। देश में कैंसर जांच की मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसका उद्देश्य निदान क्षमता को मजबूत करना और खासकर संसाधन वंचित तथा दूरदराज इलाकों में स्क्रीनिंग की पहुंच को व्यापक बनाना है।
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लेनेक टेक्नोलॉजी ने कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल के सहयोग से इस डिवाइस के ट्रायल रन पहले ही पूरे कर लिए गए हैं। ट्रायल के दौरान मरीजों पर डिवाइस की कार्यप्रणाली, सटीकता और व्यवहारिक उपयोगिता का मूल्यांकन किया गया। नेशनल कैंसर ग्रिड के प्रमुख सदस्य के रूप में कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल देशभर में कैंसर उपचार और निदान मानकों को बेहतर बनाने में लगातार योगदान दे रहा है।

इन परीक्षणों के माध्यम से यह भी परखा गया कि डिवाइस को किस प्रकार नियमित ओपीडी और कैंप आधारित स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं में शामिल किया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक लोगों को शुरुआती स्तर पर जांच की सुविधा मिल सके। लेनेक टेक्नोलॉजीज की टीम में सिदेश धाकर, हिमानी धारीवाल, सिद्धार्थ सुहाने और चिराग अग्रवाल ने तकनीकी विकास और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई है। चिराग ने बताया कि यह एआई आधारित स्क्रीनिंग समाधान भविष्य में मोबाइल कैंसर जांच शिविरों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए यह काफी लाभप्रद होगी। अक्सर लोग क्रिटिकल स्टेज में आने के बाद ही फेफड़ों की जांच के लिए आते हैं लेकिन यह पोर्टेबल डिवाइस एआई की मदद से शुरुआती लक्षणों के आधार पर ही रिपोर्ट दे देगी।

3.5 किलो की है डिवाइस, बैटरी से चलेगी
चिराग ने बताया कि डिवाइस की सबसे बड़ी विशेषता इसका पोर्टेबल होना है जिससे इसे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सकता है। जहां बड़े अस्पताल, सीटी स्कैन या उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां यह तकनीक समुदाय के नजदीक ही प्रारंभिक जांच संभव बना सकती है। अन्य मशीनें जहां 12 से 15 किलो की होती है पर यह डिवाइस साढ़े तीन किलो की होगी। इसकी एक्यूरेसी 96 फीसदी है। बैटरी से चलने वाली यह डिवाइस एक बार चार्जिंग में 100 रिपोर्ट दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती पहचान से न केवल निदान में होने वाली देरी कम होगी बल्कि समय पर इलाज शुरू होने से मरीजों की जीवन-रक्षा की संभावना भी बढ़ेगी।
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