{"_id":"5b8e155342c792466c102113","slug":"essential-news-for-engineering-students","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अब नौकरी के लिए नहीं भटकेंगे इंजीनियरिंग छात्र, मिलेगी ये सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नौकरी के लिए नहीं भटकेंगे इंजीनियरिंग छात्र, मिलेगी ये सुविधा
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 04 Sep 2018 03:13 PM IST
सार
- एआईसीटीई ने इंटर्नशिप, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के लिए तैयार किया खाका
- प्रयोगात्मक ज्ञान के लिए छात्रों को दी जाएगी ट्रेनिंग, इंटर्नशिप करने पर मिलेंगे क्रेडिट अंक
- देशभर के डिप्लोमा और बीटेक कॉलेजों पर होगा लागू प्रारूप
विज्ञापन
डेमो पिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंजीनियरिंग और डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहे छात्रों को अब पढ़ाई खत्म होने के बाद नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। डिग्री या डिप्लोमा खत्म होने से पहले छात्रों को नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी कॉलेजों की होगी। फिर चाहे वह कॉलेज सरकारी हो या निजी क्षेत्र का। कॉलेज किस तरह से छात्रों को नौकरी योग्य बनाए, इसके लिए भी मानक तैयार किए गए हैं। इसके लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने इंटर्नशिप, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का खाका तैयार किया है। इसे देशभर के कॉलेजों पर लागू किया जाएगा।
डेमो पिक
एआईसीटीई के एक अधिकारी ने बताया कि प्लानिंग के मुताबिक चार वर्षीय बीटेक की पढ़ाई में कम से कम 14 से 20 क्रेडिट प्वाइंट छात्रों को इंटर्नशिप, एंटरप्रिन्योरल एक्टिविटी, प्रोजेक्ट वर्क, सेमिनार और इंटर या इंट्रा इंस्टीट्यूशनल ट्रेनिंग के लिए दिए जाएंगे। तीन वर्षीय डिप्लोमा प्रोग्राम में 10 से 16 क्रेडिट प्वाइंट देने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक क्रेडिट प्वाइंट के लिए छात्रों को पढ़ाई के अतिरिक्त 40 से 45 घंटे काम करना होगा।
इस तरह से बीटेक के छात्रों को अपनी चार साल की पढ़ाई में करीब 700 घंटे इंटर्नशिप या इंडस्ट्री ट्रेनिंग करनी होगी जबकि डिप्लोमा के छात्रों को 500 घंटे का ट्रेनिंग करनी होगी। एआईसीटीई से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक इतना प्रैक्टिकली नॉलेज होने के बाद छात्र अपने विषय से जुड़े क्षेत्र में मजबूत हो जाएगा और उसे नौकरी मिलने में दिक्कत भी नहीं होगी।
इस तरह से बीटेक के छात्रों को अपनी चार साल की पढ़ाई में करीब 700 घंटे इंटर्नशिप या इंडस्ट्री ट्रेनिंग करनी होगी जबकि डिप्लोमा के छात्रों को 500 घंटे का ट्रेनिंग करनी होगी। एआईसीटीई से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक इतना प्रैक्टिकली नॉलेज होने के बाद छात्र अपने विषय से जुड़े क्षेत्र में मजबूत हो जाएगा और उसे नौकरी मिलने में दिक्कत भी नहीं होगी।
डेमो पिक
पहले साल से ही ट्रेनिंग प्रोग्राम की होगी शुरुआत
एआईसीटीई तैयार तैयार किए गए फ्रेमवर्क के मुताबिक पहले साल से ही इंजीनियरिंग और डिप्लोमा के छात्रों को ट्रेनिंग और इंटर्नशिप करनी होगी। इसके लिए गर्मी की छुट्टियों को बेहतर समय माना गया है। छात्रों को बेहतर इंडस्ट्री में ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के लिए भेजना भी कॉलेज की जिम्मेदारी होगी। अगर किसी कारण पहले साल छात्रों का इंडस्ट्री ट्रेनिंग संभव नहीं हो पा रही है तो इंस्टीट्यूट में ही छात्रों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन करना होगा। जबकि अंतिम सेमेस्टर में छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क और सेमिनार में शामिल कराया जाएगा।
कैंपस में इन बिंदुओं पर भी होंगे काम
- इंस्टीट्यूशनल वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम
- वर्कशॉप फॉर कंसलटेंसी, रिसर्च प्रोजेक्ट
- टेक्निकल, बिजनेस सहित अन्य फेस्टिवल कराने होंगे
- इनोवेशन, इंक्यूबेशन और एंटरप्रिन्योरशिप सेल के लिए छात्रों को काम करना होगा
- डिपार्टमेंटल लैब, थिंकरिंग लैब और इंस्टीट्यूशनल वर्कशॉप का छात्रों को हिस्सा बनाना होगा
- छात्रों को इनोवेशन से जुड़ी प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना होगा
- नए प्रोडक्ट तैयार करने, बिजनेस प्लान तैयार करने, स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करना होगा
एआईसीटीई तैयार तैयार किए गए फ्रेमवर्क के मुताबिक पहले साल से ही इंजीनियरिंग और डिप्लोमा के छात्रों को ट्रेनिंग और इंटर्नशिप करनी होगी। इसके लिए गर्मी की छुट्टियों को बेहतर समय माना गया है। छात्रों को बेहतर इंडस्ट्री में ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के लिए भेजना भी कॉलेज की जिम्मेदारी होगी। अगर किसी कारण पहले साल छात्रों का इंडस्ट्री ट्रेनिंग संभव नहीं हो पा रही है तो इंस्टीट्यूट में ही छात्रों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन करना होगा। जबकि अंतिम सेमेस्टर में छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क और सेमिनार में शामिल कराया जाएगा।
कैंपस में इन बिंदुओं पर भी होंगे काम
- इंस्टीट्यूशनल वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम
- वर्कशॉप फॉर कंसलटेंसी, रिसर्च प्रोजेक्ट
- टेक्निकल, बिजनेस सहित अन्य फेस्टिवल कराने होंगे
- इनोवेशन, इंक्यूबेशन और एंटरप्रिन्योरशिप सेल के लिए छात्रों को काम करना होगा
- डिपार्टमेंटल लैब, थिंकरिंग लैब और इंस्टीट्यूशनल वर्कशॉप का छात्रों को हिस्सा बनाना होगा
- छात्रों को इनोवेशन से जुड़ी प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना होगा
- नए प्रोडक्ट तैयार करने, बिजनेस प्लान तैयार करने, स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करना होगा
विज्ञापन
विज्ञापन
डेमो पिक
नौकरी नहीं तो स्टार्टअप शुरू कराने का होगा जोर
अगर किसी छात्र को बीटेक या डिप्लोमा करने के बाद नौकरी नहीं मिल रही है तो कॉलेज उसे स्वरोजगार की तरफ जोड़ेगा। इसके लिए पहले से ही सभी छात्रों को स्टार्टअप और एंटरप्रिन्योरशिप से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। योजनाओं से छात्रों को जोड़ा जाएगा ताकि वह अपने विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में कुछ इनोवेटिव काम करके स्टार्टअप शुरू कर सकें।
इंटर्नशिप के लिए 13 समझौते
छात्रों को इंटर्नशिप ऑफर होने में दिक्कत न हो इसके लिए एआईसीटीई ने अपने स्तर पर देश और दुनिया के 13 बड़े संस्थानों से समझौता किया है। इसका विवरण एआईसीटीई ने अपने वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यहां से जुड़कर कोई भी छात्र या कॉलेज इंटर्नशिप हासिल कर सकता है।
अगर किसी छात्र को बीटेक या डिप्लोमा करने के बाद नौकरी नहीं मिल रही है तो कॉलेज उसे स्वरोजगार की तरफ जोड़ेगा। इसके लिए पहले से ही सभी छात्रों को स्टार्टअप और एंटरप्रिन्योरशिप से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। योजनाओं से छात्रों को जोड़ा जाएगा ताकि वह अपने विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में कुछ इनोवेटिव काम करके स्टार्टअप शुरू कर सकें।
इंटर्नशिप के लिए 13 समझौते
छात्रों को इंटर्नशिप ऑफर होने में दिक्कत न हो इसके लिए एआईसीटीई ने अपने स्तर पर देश और दुनिया के 13 बड़े संस्थानों से समझौता किया है। इसका विवरण एआईसीटीई ने अपने वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यहां से जुड़कर कोई भी छात्र या कॉलेज इंटर्नशिप हासिल कर सकता है।