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UP: क्या जिंदा है मोसीम? 93 लावारिस शवों से नहीं मिला DNA, पांचों आरोपी नार्को टेस्ट को तैयार; खुलेंगे दफन राज

Tue, 30 Jun 2026 11:10 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 30 Jun 2026 11:10 AM IST
सार

Fatehpur Missing Moseem Mystery: फतेहपुर में लापता मोसीम का डीएनए 93 लावारिस शवों से मेल नहीं खाया है। अब पुलिस हाईकोर्ट की अनुमति से पांचों आरोपियों का नार्को टेस्ट कराने की प्रक्रिया में जुटी है।

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Fatehpur Missing Moseem Mystery No DNA match found from 93 unclaimed bodies all accused agree to narco tests
Fatehpur Missing Moseem Mystery - फोटो : amar ujala

विस्तार

फतेहपुर जिले में हथगाम थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव के करीब 15 माह से लापता मो. मोसीम की तलाश में पुलिस वैज्ञानिक जांच के सहारे विवेचना आगे बढ़ा रही है। मोसीम की मां के डीएनए का सात जिलों में मिले 93 लावारिस शवों से मिलान कराया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब पुलिस मामले में नामजद पांच आरोपियों का नार्को टेस्ट कराएगी।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद जांच में तेजी आई है। मो. मोसीम मुंबई में रहता था। फरवरी 2025 में गांव रसूलपुर लौटा था। परिजन का आरोप है कि 21 फरवरी 2025 को गांव के धर्मेंद्र पासवान, बबलू यादव, अनुरुद्ध यादव, अखरी निवासी रौनक सिंह और पट्टीशाह निवासी कल्लू कुरैशी उसे अपने साथ ले गए थे। किसी बात को लेकर उसके साथ मारपीट भी हुई थी।

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आरोपियों ने हत्या कर शव गायब कर दिया
छह मार्च 2025 को धर्मेंद्र दोबारा मोसीम को साथ ले गया। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। बहन शाहीन बेगम ने 15 अप्रैल 2025 को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर 30 मई 2025 को पांचों आरोपियों के खिलाफ अपहरण की प्राथमिकी दर्ज हुई। आरोप है कि आरोपियों ने हत्या कर शव गायब कर दिया है।

आरोपियों के नार्को टेस्ट की तैयारी शुरू
जांच धीमी होने पर शाहीन बेगम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।  इसके बाद पुलिस ने मोसीम की मां अखबरी बेगम का डीएनए सैंपल लेकर जिले और पड़ोसी जिलों में मिले 93 लावारिस शवों के डीएनए से मिलान कराया लेकिन किसी शव से मेल नहीं मिला। अब पुलिस ने आरोपियों के नार्को टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी है।

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हलफनामे के जरिये कोर्ट में सहमति दी गई
इनमें धर्मेंद्र पासवान, बबलू यादव, अनुरुद्ध यादव, अखरी निवासी रौनक सिंह और पट्टीशाह निवासी कल्लू कुरैशी शामिल है।  जुलाई के पहले सप्ताह में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यहां पुलिस अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करेगी।  पुलिस ने पांचों आरोपियों से नार्को टेस्ट के लिए सहमति पत्र लिया है। आरोपियों की ओर से हलफनामे के जरिये कोर्ट में सहमति दी गई है।

सात जिलों के 93 शवों से मिलान नहीं हुआ
कोर्ट की मंजूरी के बाद स्थानीय पुलिस ने अधिकारियों को पत्राचार किया है। प्रभारी निरीक्षक अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि मोसीम की मां के डीएनए का सात जिलों के 93 शवों से मिलान नहीं हुआ है। अब कोर्ट की अनुमति के बाद नार्को टेस्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों की मंजूरी मिलने पर परीक्षण कराया जाएगा।

इन जिलों से हुई तफ्तीश
हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद पुलिस ने कौशाम्बी, बांदा, कानपुर नगर, रायबरेली, प्रतापगढ़, अमेठी और चित्रकूट में मिले लावारिस शवों के पोस्टमार्टम संबंधी जानकारी जुटाई। मामला पुराना होने के कारण अधिकांश शवों के सुरक्षित ब्लड सैंपल खराब हो चुके थे। इसी वजह से 93 शवों की जांच का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

नार्को टेस्ट का ये है तरीका
नार्को टेस्ट गुजरात में होता है। इसके लिए आरोपी की सहमति और कोर्ट की अनुमति आवश्यक होती है। इसके बाद पुलिस अधिकारियों के स्तर पर आगे की कार्रवाई पूरी कर परीक्षण कराया जाता है।

पुराने शवों का डीएनए इन अंगों से होता मिलान
पुराने और अत्यधिक सड़े-गले शवों में डीएनए मिलान के लिए हड्डियां और दांत सबसे प्रमुख स्रोत होते हैं। शरीर के अन्य अंग नष्ट होने के बाद भी इनमें डीएनए सुरक्षित रह सकता है। दांत के अंदर मौजूद डेंटाइन और पल्प लंबे समय तक डीएनए सुरक्षित रखते हैं। जांघ की हड्डी, खोपड़ी की आंतरिक हड्डियां, नाखून और बाल भी डीएनए के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।

मोसीम की बहन की ओर से याचिका में कहा गया है कि उसके भाई को जिंदा या मुर्दा लाया जाए। मामले की इसी सप्ताह सुनवाई है। पूर्व में पुलिस ने डीएनए जांच का जिक्र किया था। अब हाईकोर्ट के समक्ष पुलिस अपनी कार्रवाई का ब्योरा पेश करेगी।  -अंजीत सिंह, अधिवक्ता, इलाहाबाद हाईकोर्ट

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