UP: नाबालिग से दुष्कर्म के बाद की शादी, कोर्ट ने नहीं किया माफ, पति को सुना दी 10 साल की सजा, पढ़ें पूरा मामला
Hardoi News: हरदोई की पॉक्सो कोर्ट ने 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि शादी कर लेना या बच्चों का होना अपराध को खत्म नहीं करता, क्योंकि नाबालिग की सहमति मान्य नहीं है।
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हरदोई जिले में नाबालिग से दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद उसी के साथ घर बसाने वाले युवक को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने इस टिप्पणी के साथ दस साल कैद की सजा सुनाई कि शादी करने से युवक का अपराध कम नहीं होता। भले ही नाबालिग की सहमति से संबंध बने हों।
कानून की नजर में शारीरिक संबंध में नाबालिग की सहमति महत्वहीन है। इसे दुष्कर्म ही माना जाएगा। मामला नौ साल पुराना है और इस समय दोनों के दो बच्चे भी हैं। कोर्ट ने पांच हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
छेड़छाड़ और दुष्कर्म का प्रयास किया
माधौगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 जनवरी 2017 की रात करीब एक बजे वह अपने घर में चारपाई पर सो रही थी। इसी दौरान दीवार फांदकर घर में घुसे गांव के राजेश सक्सेना ने छेड़छाड़ और दुष्कर्म का प्रयास किया। शोर मचाने पर माता-पिता आए, तो राजेश भाग निकला।
सबूतों के आधार पर अदालत ने सजा सुनाई
पुलिस ने घर में घुसकर छेड़छाड़ और पॉक्सो की धारा में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के दौरान मजिस्ट्रेट को दिए गए बयानों में दुष्कर्म की भी बात कही गई थी। इससे दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह और नौ अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व सबूतों के आधार पर अदालत ने सजा सुनाई।
शारीरिक संबंध में नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य
विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि शारीरिक संबंध में नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य होती है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रकाश में आया कि दोनों के मध्य प्रेम प्रसंग था। पीड़िता ने बयान दिया था कि घरवालों के कहने पर अभियुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी।
पीड़िता की आयु 13 साल चार माह थी
घटना के कुछ दिनों बाद दोनों ने शादी कर ली थी और दो बच्चे भी हैं। इसी आधार पर आरोपी के पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने निर्दोष बताते हुए रिहा किए जाने का तर्क दिया। अदालत ने कहा कि साक्ष्य से यह सिद्ध है कि घटना के समय पीड़िता की आयु 13 साल चार माह थी। कानून की नजर में नाबालिग की सहमति महत्वहीन है, कहते हुए सजा सुनाई।