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यूपी: बच्चों को एक टाइम का खाना खिलाने के लिए मां ने बेच दिए जेवर, रोने पर मजबूर कर देगी कहानी

मनोज राठौर, अमर उजाला, कन्नौज Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 09 Jun 2020 11:17 PM IST
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Kannauj : Migrant sold jewelry to feed children
प्रवासी मजदूर के परिवार को नहीं नसीब हो रहा एक टाइम का खाना - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लॉकडाउन के दौरान तमिलनाडु से लौटे प्रवासी परिवार को गांव में न मुफ्त राशन मिला और न ही मनरेगा में काम दिया गया। बच्चों की भूख मिटाने के लिए मां ने आधे दाम में तोड़िया बाजार में बेच दीं। कन्नौज के फत्तेहपुर जसोदा निवासी श्रीराम अपनी शादी के कुछ समय बाद पत्नी गुड्डी देवी को लेकर तमिलनाडु के किड्डलोर चला गया था।

 
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Kannauj : Migrant sold jewelry to feed children
घर में नहीं जला चूल्हा - फोटो : amar ujala
वहां वह करीब 30 साल से कुल्फी बेचने का काम कर रहा था। इससे पति, पत्नी और नौ बच्चों का गुजारा चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने से 18 मई को श्रीराम पत्नी और बच्चों को लेकर ट्रेन से गांव लौट आया। भूमिहीन श्रीराम का यहां राशनकार्ड भी नहीं है। उसने आरोप लगाया कि कोटेदार ने राशन और प्रधान ने मनरेगा में रोजगार देने से इंकार कर दिया।

 
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Kannauj : Migrant sold jewelry to feed children
खाने की किल्लत फिर भी चेहरे पर मुस्कान - फोटो : amar ujala
काम न होने से परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया। कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो गुड्डी देवी ने दो जून को तीन हजार की तोड़िया 1500 रुपये में बेच दी। इन पैसों से राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाया। श्रीराम ने बताया कि अब खेतों में परिवार के साथ मजदूरी पर भुट्टा तोड़ने का काम कर रहा है। इसी से ही जैसे तैसे खर्च चल रहा है।

 
Kannauj : Migrant sold jewelry to feed children
बड़ी बेटी बेचना चाह रही थी लैपटाप - फोटो : amar ujala
गांव में किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ न मिलने का मलाल है। ट्रेन चालू होते ही परिवार के साथ तमिलनाडु लौट जाएंगे। ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि श्रीराम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। उसका मनरेगा जॉबकार्ड बनवाने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

 
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Kannauj : Migrant sold jewelry to feed children
परिवार के साथ बैठा प्रवासी श्रमिक - फोटो : amar ujala
बड़ी बेटी बेचना चाहती है सरकार से मिला लैपटॉप
श्रीराम की 20 वर्षीय बड़ी बेटी सुलोचना इंटर कर चुकी है। तमिलनाडु सरकार की ओर से उसे फ्री लैपटाप मिला है। लॉकडाउन में गांव आने के बाद परिवार आर्थिक रूप से परेशान है। परिवार को परेशान देख सुलोचना अपना लैपटॉप बेचना चाहती है। इसके लिए वह खरीदार ढूंढ रही है।
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