Kanpur: ईंधन के बाद तारकोल पर संकट, डेढ़ गुना बढ़े दाम और एडवांस भुगतान पर भी नहीं मिल रहा माल, ये है स्थिति
Kanpur News: ईरान-इजरायल युद्ध के कारण तारकोल का आयात रुकने से इसकी कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं। माल की किल्लत और बढ़ती लागत के चलते एक अप्रैल से शहर में 400 करोड़ के सड़क निर्माण कार्य बंद होने की आशंका है।
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अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध के कारण शहर में तारकोल का संकट हो गया है। तारकोल के दाम डेढ़ गुना होने के बावजूद अग्रिम भुगतान करने पर भी ठेकेदारों को रिफाइनरी से बहुत कम माल मिल पा रहा है। जल्द 10,000 रुपये प्रति टन भाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे सड़कों का निर्माण प्रभावित हो गया है। चालू वित्तीय वर्ष में चंद दिन शेष होने की वजह से ठेकेदार तारकोल की उपलब्धता के हिसाब से आधे-अधूरे निर्माणों को ही पूरा कर भुगतान प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। एक अप्रैल से निर्माण ठप होने की आशंका है। इससे करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले सड़क निर्माण रुक जाएंगे।
युद्ध से पहले फरवरी में तारकोल के भाव प्रति टन 42,000 रुपये (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) था। युद्ध शुरू होने के बाद मथुरा और पानीपत रिफाइनरी ने धीरे-धीरे इनके दाम बढ़ाना शुरू कर दिया। 16 मार्च को तारकोल के दाम में करीब ढाई हजार रुपये प्रति टन की दर से वृद्धि कर दी गई। इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (विपणन प्रभाग) की तरफ से 16 मार्च से प्रभारी दरों के अनुसार, तारकोलों में से ड्यूरापव बिटुमिन वीजी-30 बल्क का बेसिक प्राइज 51092 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी सहित इसका भाव 60289 रुपये प्रति टन है। ड्यूरापव बिटुमिन वीजी-40 बल्क का बेसिक प्राइज 53892 रुपये प्रति टन है, जो 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 63593 रुपये प्रति टन हो गया है।
एक अप्रैल से सड़कों का निर्माण कर सकते हैं बंद
इन्हीं दोनों श्रेणियों के तारकोल का उपयोग सड़कों के निर्माण में होता है। रिफाइनरी से इसे टैंकरों से यहां हाटमिक्स प्लांट तक लाने में करीब ढाई हजार रुपये प्रति टन भाड़ा लगता है। शहर में सड़कों, पेंट निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए रोज करीब 500 टन तारकोल की खपत होती है। इसमें से सबसे ज्यादा 250 से 300 टन तारकोल बिटुमिनस (तारकोल मिक्स गिट्टी) वाली सड़कों के निर्माण में लगता है। युद्ध शुरू होने से पहले ईरान, ओमान सहित की देशों से तारकोल आयात किया जाता था। इससे लगभग भाव स्थिर रहता था। अब वहां से तारकोल आना बंद हो गया है। ठेकेदारों ने बताया कि तारकोल के दाम करीब डेढ़ गुना बढ़ने से सड़कों के निर्माण की लागत बढ़ गई है। हालात ऐसे ही रहे, तो वे एक अप्रैल से सड़कों का निर्माण बंद कर देंगे।
युद्ध की वजह से तारकोल की किल्लत होने लगी है। फिर भी ठेकेदारों से जल्द से जल्द सड़कों का निर्माण पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 15वें वित्त के तहत 90 करोड़ से बनने वाली 200 में 156 सड़कों का काम पूरा हो गया है। शेष 34 में से 28 कार्य सीवर लाइन, वाटर लाइन की वजह से रुके हैं। नगर निगम निधि के 200 करोड़ में से 180-190 करोड़ रुपये की सड़कें बन चुकी हैं। -एसएफए जैदी, मुख्य अभियंता, नगर निगम
जो कार्य चल रहे हैं, ठेकेदारों से उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा है। जिन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है, इसे जल्द पूरा कर काम कराने की योजना है। उम्मीद है कि जल्द तारकोल की किल्लत दूर होगी। -अनिल कुमार, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी
ये काम अटक सकते
- न्यू कानपुर सिटी में 50 करोड़ रुपये से सड़कों का निर्माण।
- पीडब्ल्यूडी की कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के नर्वल मोड़ से डिफेंस कॉरिडोर रोड चौड़ीकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में करीब 300 करोड़ रुपये से सड़कों का निर्माण।
- नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण।