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Kanpur: अखिलेश दुबे को दो और शिकायतों में क्लीनचिट, एसआईटी कर रही थी 61 शिकायतों की जांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 03 Feb 2026 10:47 PM IST
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अधिवक्ता अखिलेश दुबे
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा नेता रवि सतीजा को झूठे मामले में फंसाकर 50 लाख की रंगदारी मांगने के आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को दो और मामलों में क्लीनचिट मिल गई है। एसआईटी को कुल 39 शिकायतों में कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। अन्य मामलों की जांच शेष है। एसआईटी साक्ष्य और गवाहों के बयान ले रही है। इससे पूर्व अखिलेश दुबे को नवंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में 37 शिकायतों में क्लीनचिट मिली थी।
रवि सतीजा ने छह अगस्त 2025 को बर्रा थाने में अखिलेश दुबे, शैलेंद्र यादव, विमल यादव, लवी मिश्रा, अभिषेक बाजपेई समेत अन्य पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बर्रा पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जबकि जांच नौबस्ता पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई। नौबस्ता पुलिस ने शैलेंद्र यादव को गिरफ्तार किया जबकि आरोपी दो महिलाओं को गवाह बनाया था। अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ जमीनों पर कब्जा करने, रंगदारी मांगने और षड़यंत्र रचने की शिकायतें आई थीं। शिकायतकर्ताओं ने किदवईनगर, कोतवाली, जूही थाने में भी एफआईआर कराई।
अखिलेश दुबे के साथ कानपुर में क्षेत्राधिकारी रहे ऋषिकांत शुक्ला, संतोष सिंह, विकास पांडेय पर भी सांठगांठ करने के आरोप लगे। शासन ने ऋषिकांत शुक्ला पर निलंबन की कार्रवाई कर विभागीय जांच शुरू करा दी है। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने एसआईटी का गठन कराया और सभी जांचें दे दी। इस दौरान जमीन पर कब्जा करने और संपत्ति हड़पने के कई और मामले सामने आए। पुलिस की ओर से ऑपरेशन महाकाल चलाया गया। इसमें आई शिकायतों को भी एसआईटी को दे दिया गया। नवंबर के आखिरी सप्ताह में मौजूदा पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने शिकायतों की समीक्षा की। इसमें साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अखिलेश दुबे को 37 मामलों में क्लीनचिट दे दी गई। 23 जनवरी को फिर से हुई समीक्षा में अखिलेश दुबे को दो और शिकायतों में साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है।
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रवि सतीजा ने छह अगस्त 2025 को बर्रा थाने में अखिलेश दुबे, शैलेंद्र यादव, विमल यादव, लवी मिश्रा, अभिषेक बाजपेई समेत अन्य पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बर्रा पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जबकि जांच नौबस्ता पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई। नौबस्ता पुलिस ने शैलेंद्र यादव को गिरफ्तार किया जबकि आरोपी दो महिलाओं को गवाह बनाया था। अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ जमीनों पर कब्जा करने, रंगदारी मांगने और षड़यंत्र रचने की शिकायतें आई थीं। शिकायतकर्ताओं ने किदवईनगर, कोतवाली, जूही थाने में भी एफआईआर कराई।
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अखिलेश दुबे के साथ कानपुर में क्षेत्राधिकारी रहे ऋषिकांत शुक्ला, संतोष सिंह, विकास पांडेय पर भी सांठगांठ करने के आरोप लगे। शासन ने ऋषिकांत शुक्ला पर निलंबन की कार्रवाई कर विभागीय जांच शुरू करा दी है। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने एसआईटी का गठन कराया और सभी जांचें दे दी। इस दौरान जमीन पर कब्जा करने और संपत्ति हड़पने के कई और मामले सामने आए। पुलिस की ओर से ऑपरेशन महाकाल चलाया गया। इसमें आई शिकायतों को भी एसआईटी को दे दिया गया। नवंबर के आखिरी सप्ताह में मौजूदा पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने शिकायतों की समीक्षा की। इसमें साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अखिलेश दुबे को 37 मामलों में क्लीनचिट दे दी गई। 23 जनवरी को फिर से हुई समीक्षा में अखिलेश दुबे को दो और शिकायतों में साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है।
एसआईटी को जमीन और संपत्ति संबंधी मामलों में फर्जी एफआईआर कराने की 61 शिकायतें मिलीं जिनमें से 46 अखिलेश दुबे के खिलाफ थीं। जांच में अखिलेश दुबे के 39 मामलों में लगे आरोपों में कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। अन्य 15 शिकायतों का भी निस्तारण हो गया है। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर कानपुर
