Kanpur: डिलीवरी का मैसेज आ रहा पर सिलिंडर नहीं; एजेंसियों पर 4000 की वेटिंग, KYC के नाम पर अवैध वसूली के आरोप
Kanpur News: कानपुर में गैस वितरण व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के मैसेज भेजे जा रहे हैं और एजेंसियों पर तीन-चार हजार की वेटिंग चल रही है। जिला पूर्ति अधिकारी ने गड़बड़ी करने वाली एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
विस्तार
केस- 1
कानपुर इंडेन गैस सर्विस पर लाइन में लगे प्रवीण कुमार शर्मा कहते हैं कि 12 मार्च को बुक कराया था। डीएससी नंबर आ गया, डिलीवरी का मैसेज भी आ गया लेकिन गैस कहां गई कोई बताने वाला नहीं। कार्यालय छोड़कर रोज यहां आ रहा हूं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। पूर्ति विभाग के अफसरों को फोन कर समस्या बताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
केस- 2
पांडुनगर के रहने वाले सुरेश ने बताया कि 14 मार्च को बुकिंग की थी। 19 को डिलीवरी का मैसेज आ गया लेकिन आज तक सिलिंडर नहीं आया। 10 दिनों से घर में गैस नहीं है, पड़ोसियों से सिलिंडर मांगकर खाना बना रहे हैं।
केस- 3
बर्रा पांच निवासी गगन गुप्ता बताते हैं कि फरवरी में इंडेन गैस एजेंसी से सिलिंडर लिया था। अब एक सप्ताह से गैस की बुकिंग करने के प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को बुकिंग की कोशिश की तो अप्रैल में बुक करने का मैसेज आ गया। मार्च में सिलिंडर ही नहीं मिला।
केस- 4
गूबा गार्डेन निवासी मुकेश बताते हैं कि 18 मार्च को सिलिंडर बुक किया था। तीन दिन से सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी के चक्कर काट रहा हूं लेकिन एजेंसी संचालक रोज अगले दिन आने की बात कहकर लौटा रहा है। घर में सिलिंडर नहीं है। कोई समस्या सुनने को तैयार नहीं है।
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध भले ही कुछ दिन के लिए थमा हो पर सिलिंडर के लिए शहर में युद्ध छिड़ गया है। गैस एजेंसियों ने नया खेल शुरू किया है। उपभोक्ताओं के पास डिलीवरी के मैसेज जा रहे हैं पर सिलिंडर घर नहीं पहुंच रहा। लोग एजेंसी जा रहे पर वहां भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। यह हाल तब है जब हाल ही में एक एजेंसी में ऐसा खेल मिलने पर लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई थी।
हालांकि अभी तक निलंबन नहीं हो सका है। शहर में रसोई गैस का संकट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। हालात ऐसे हैं कि डिलीवरी का मैसेज आने के बाद लोगों की एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और कमरे के अंदर से जवाब आता है कि अभी इंतजार करिए। इंडेन गैस एजेंसियों के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं।
15 दिनों से घर में खाना नहीं बना
हालात ये हैं कि एक-एक एजेंसी पर दो से तीन हजार सिलिंडर की बुकिंग चल रही है। गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे संजय सिंह का आरोप है कि एजेंसी केवाईसी के नाम पर पैसा वसूली कर रही है। 200 रुपये लिए गए, बदले में पाइप और साबुन दिया गया। 15 दिनों से घर में खाना नहीं बना है। पहले आधार जमा करो, फिर साइन करो इतनी प्रक्रिया करवाई, लेकिन सिलिंडर नहीं मिला।
300 सिलिंडर के लिए तीन हजार कतार में
शहर की 50 एजेंसियों में हर एक को सिर्फ 300 सिलिंडर की सप्लाई हो रही है और लाइन में रोजाना तीन हजार से ज्यादा उपभोक्ता खड़े हो रहे हैं। कई-कई दिनों तक लाइन में लगकर घंटों इंतजार करने के बाद भी अधिकतर लोग खाली हाथ लौट रहे हैं। ईद की छुट्टी के बाद सोमवार को खुलीं ज्यादातर एजेंसियों में सिलिंडर की गाड़ी नहीं आई। इस कारण एजेंसियों पर हंगामे जैसी स्थिति रही।
केवाईसी के नाम पर बार-बार बुलाया जा रहा
मंगलवार को भी एजेंसियों के बाहर सुबह से कतार में लगे लोगों में से कुछ हो ही सिलिंडर नसीब हो पाया। कई लोग ऐसे हैं जो 10-12 दिनों से एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। एजेंसियां न तो सही जानकारी दे रही हैं और न ही वितरण में पारदर्शिता बरत रही हैं। संकट के बीच ई-केवाईसी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि केवाईसी के नाम पर उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा है। एजेंसी में न तो समय पर काम हो रहा है और न ही व्यवस्था समझ आ रही है।
एक एजेंसी पर तीन से चार हजार की वेटिंग
शहर में गैस सिलिंडर की बुकिंग का आंकड़ा 13 दिनों में तीन लाख पार कर चुका है। मांग और सप्लाई के बीच भारी अंतर होने के कारण एक एजेंसी पर करीब तीन से चार हजार की वेटिंग चल रही है।
आंकड़ों में सप्लाई ज्यादा तो लोग खाली सिलिंडर लिए क्यों कर रहे इंतजार
आपूर्ति विभाग आंकड़ों में सप्लाई ज्यादा देने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ लोग खाली सिलिंडर लेकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। आपूर्ति विभाग ने आंकड़े जारी कर दावा किया कि 11 से 24 मार्च 2026 के बीच 3,24,300 सिलिंडर वितरित किए गए। पिछले वर्ष इसी अवधि में 3,21,536 लोगों को सिलिंडर दिया गया था। यानी इस बार 2,764 सिलिंडर अधिक वितरित किए गए तो सवाल यह खड़ा होता है कि उपभोक्ताओं को सिलिंडर क्यों नहीं मिले।
25 और 35 दिन का नियम लागू तो भीड़ क्यों
बुकिंग में सरकार ने 25 और 35 दिनों का नियम लागू किया है। ऐसे में जब उपभोक्ता इतने दिनों तक बुकिंग ही नहीं करा सकता है, तो क्यों वह सिलिंडर के लिए लाइन में खड़ा होगा। ऐसा तब ही हो सकता है जब उसके पास डिलीवरी का मैसेज पहुंच गया हो।
आखिर कैसे चल रहे होटल-ढाबे
कॉमर्शियल सिलिंडर बंद होने के बाद होटलों-ढाबों और ठेले वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है। कई ढाबे-ठेले तो बंद हो गए हैं पर अभी भी कई का संचालन चल रहा है। एजेंसियों के बाहर लगे उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी संचालक घरेलू सिलिंडर इन प्रतिष्ठानों पर दे रहे हैं, इससे संकट खड़ा हो गया है।
पैनिक बुकिंग के कारण सिलिंडर वितरण में ज्यादा मारामारी मच रही है। लगातार सिलिंडर बाटे जा रहे हैं। जो एजेसियां बिना सिलिंडर दिए डिलीवरी के मैसेज पहुंचा रही हैं, उनकी डिटेल नोट की जा रही है। इन सभी पर कार्रवाई होगी। -राकेश कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
पहले से काफी बुकिंग पेंडिंग चली आ रही है। इस कारण गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ लग रही है। एजेंसियों से लगातार सिलिंडर वितरण किया जा रहा है। -भारतीष मिश्रा, अध्यक्ष, एलपीजी वितरण संघ