कवायद: स्प्रिंग लोडेड पंखे IIT में रोकेंगे सुसाइड, CMHW की स्थापना भी की गई, 14 विशेषज्ञों की टीम रहेगी मौजूद
Kanpur News: आईआईटी कानपुर ने आत्महत्याओं को रोकने के लिए हॉस्टलों में स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने और 24 घंटे ऑनलाइन काउंसलिंग सेवा 'योर दोस्त' शुरू करने का फैसला किया है। संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए 14 विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी तैनात की है।
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आईआईटी कानपुर में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान ने अनूठी पहल की है। पंखे से फंदा लगाकर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए अब छात्रावासों में लगे सामान्य की जगह स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाए जाएंगे। अधिक भार से स्प्रिंग के कारण यह पंखे नीचे झुक जाएंगे, जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। वहीं, छात्रों को हर समय सहायता देने के लिए संस्थान ने योर दोस्त नाम की ऑनलाइन काउंसलिंग और इमोशनल वेलनेस प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है।
यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है, जिससे छात्र, शिक्षक और कर्मचारी कभी भी फोन या ऑनलाइन माध्यम से परामर्श ले सकते हैं। पिछले दो वर्षों में हुई नौ आत्महत्याओं के बाद जागे संस्थान प्रशासन ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य व सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब संस्थान केवल उपचार तक सीमित नहीं रहकर जागरूकता और रोकथाम पर भी बराबर ध्यान दे रहा है, ताकि समय रहते हर व्यक्ति को सहायता मिल सके।
सीएमएचडब्ल्यू की स्थापना भी की गई
संस्थान में हुईं अधिकांश आत्महत्या में पंखे से फंदा लगाने के मामले सामने आए हैं। इसके कारण पंखों में बदलाव का निर्णय लिया गया है। हालांकि इसे केवल एक रोकथाम उपाय के रूप में देखा जा रहा है।इसके साथ ही काउंसलिंग सेवाओं को भी सशक्त करते हुए यहां सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग (सीएमएचडब्ल्यू) की स्थापना की गई है। इसमें 10 मनोवैज्ञानिक, एक मनोचिकित्सक और तीन विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो जरूरत पर तत्काल सहायता प्रदान करते हैं।
स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने का लिया गया है निर्णय
इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाएं, संवाद सत्र और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। सीएमएचडब्ल्यू के हेड एडमिन प्रो. सुधांशु शेखर सिंह ने बताया कि संस्थान छात्रों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के मामलों की जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर ही स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।