कुशाग्र को इंसाफ: मां बोलीं- जैसे मेरे बच्चे को मारा…वैसे तीनों का गला घुटना चाहिए, सुबकते पिता ने कही ये बात
Kushagra Murder Case: कुशाग्र हत्याकांड में इंसाफ के लिए तरस रहे माता-पिता ने कोर्ट में अपना दर्द बयां किया। मां ने कहा कि हत्यारों को फांसी मिलने पर ही उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।
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जिस बेटे को गोद में खिलाया था वही मेरी गोद में हमेशा के लिए सो रहा था। आज भी उस मंजर को याद करती हूं तो रूह कांप उठती है। घर की दीवारें, कानपुर की सड़कें बेटे की याद दिलाती थीं। उसकी यादें जीने नहीं दे रही थीं इसलिए कानपुर छोडक़र सूरत चली गई। मुझे न्याय तब मिलेगा जब तीनों फांसी पर लटकेंगे। जैसे मेरे बच्चे को मारा, वैसे इनका भी गला घुटना चाहिए। ये बातें कोर्ट का फैसला सुनने सूरत से आईं कुशाग्र की मां सोनिया ने कहीं(
सोनिया ने बताया कि 13 साल का छोटा बेटा और पांच माह की बच्ची है। सूरत में पति का व्यापार है। बच्चों को लेकर अब वहीं शिफ्ट हो गई हूं। बेटे की यादें तो जीवनभर पीछा नहीं छोड़ेंगी लेकिन शहर छोड़ने से दर्द जरूर कम हुआ है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब भी कानपुर आना होता था बेटे की यादें ताजा हो जाती थीं। कोर्ट में गवाही के दौरान वकीलों के सवाल जख्मों पर नश्तर की तरह चुभते थे।
जिसका सहारा बनी, उसी ने छीन लिया मेरा सहारा
कुशाग्र की मां ने बताया कि किसी के बताने पर रचिता को कुशाग्र को पढ़ाने के लिए रखा था। रचिता की मां की मौत हो चुकी थी लेकिन पिता की मौत वर्ष 2022 में हुई थी। जानकारी मिलने पर मैं खुद रचिता के घर खाना लेकर गई थी, उसे मदद के ताैर पर 10 हजार रुपये भी दिए थे। मुझे क्या मालूम था कि मैं जिसका सहारा बनने की कोशिश कर रही हूं वही एक दिन मुझसे मेरा सहारा बनने वाला बेटा छीन लेगी।
कोचिंग आने-जाने का पूछ लिया था समय
कुशाग्र की मां सोनिया ने कोर्ट में बताया था कि 13 अक्तूबर 2021 को कुशाग्र के जन्मदिन पर पहली बार रचिता प्रभात को साथ लेकर आई थी और उसे अपना बाॅयफ्रेंड बताया था। इसके बाद बेटी के जन्म की पार्टी में भी प्रभात और रचिता साथ आए थे। घटना के 15 दिन पहले भी दोनों साथ घर आए थे और मेरे सामने ही बातों-बातों में कुशाग्र से पूछताछ कर रहे थे कि वह कब, किस समय और किस रास्ते से कोचिंग आता-जाता है। कुशाग्र ने नादानी में उन्हें सारी जानकारी भी दे दी थी।
पिता बोले- मैं रो दिया तो सोनिया को कौन संभालेगा
एक बाप की डबडबाती आंखों को देखकर महसूस किया जा सकता है कि 16 साल के बेटे को खोने का दर्द क्या होता है। कोर्ट का फैसला सुनने कुशाग्र की मां सोनिया को साथ लेकर उसके पिता मनीष कनोडिया भी सूरत से आए। दिल में दर्द छिपाए, आंसुओं को रोकने की कोशिश करते रहे ताकि सोनिया कमजोर न पड़ जाए। बोले अगर मैं रो दिया तो सोनिया को कौन संभालेगा। हालांकि लाख कोशिशों के बावजूद उनकी आखों में नमी साफ झलक रही थी। कुशाग्र की हत्या भी मंगलवार को हुई और फैसला भी मंगलवार को ही आया।
हर तारीख पर चाचा ने लखनऊ से आकर की पैरवी
कुशाग्र के हत्यारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में कुशाग्र के चाचा सुमित कनोडिया का विशेष योगदान रहा। सुमित लखनऊ में रहते हैं लेकिन मुकदमे की हर तारीख पर पैरवी के लिए सुबह कानपुर आ जाते और शाम को कार्यवाही खत्म होने के बाद वापस लौटते थे। सूरत में बैठे मां-बाप को मुकदमे की सारी जानकारी देते रहते थे। कोर्ट का फैसला सुनने के बाद सुमित ने कहा कि जिस दिन कुशाग्र का शव देखा था उसी दिन हत्यारों को चैन से न जीने देने की कसम खाई थी जो आज पूरी हुई।
ये था पूरा मामला
ढाई साल पहले हाईस्कूल के छात्र कुशाग्र की अपहरण कर हत्या के मामले में अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह ने मंगलवार को उसकी पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके कथित प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता को दोषी करार दिया है। तीनों को सजा गुरुवार को सुनाई जाएगी।
लिफाफे में फिरौती का पत्र था
रायपुरवा थानान्तर्गत आचार्यनगर स्थित भगवती विला अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर चार निवासी मनीष व सोनिया कनोडिया का बेटा कुशाग्र कैंट स्थित सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल का कक्षा दस का छात्र था। 30 अक्तूबर 2023 की शाम कुशाग्र कोचिंग पढ़ने के लिए घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजन ढूंढने निकले, तो अपार्टमेंट के चौकीदार ने बताया कि कुछ देर पहले एक लड़का कुशाग्र की पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स की स्कूटी से एक लिफाफा लेकर आया था, जिसे मनीष के घर भेजा था। जब सोनिया की मां ने दरवाजे पर जाकर देखा, तो लिफाफे में फिरौती का पत्र था।
प्रभात के घर से कुशाग्र का शव बरामद किया
कुशाग्र का अपहरण करने और 30 लाख रुपये फिरौती मांगने की बात लिखी थी। कुशाग्र की मां ने सूरत में रहने वाले अपने पति मनीष, लखनऊ में रहने वाले देवर सुमित व शहर में ही रहने वाले चचिया ससुर संजय कनोडिया को इसकी सूचना दी। संजय ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। चौकीदार के बयान के आधार पर पुलिस और परिजन स्कूटी की तलाश में रचिता के घर पहुंचे फिर रचिता के जरिये उसके कथित प्रेमी प्रभात शुक्ला और फिरौती का पत्र लेकर जाने वाले शिवा गुप्ता तक पहुंच गए। पूछताछ के बाद प्रभात के घर से कुशाग्र का शव बरामद किया।
तीनों को अपहरण व हत्या का दोषी करार दिया
रस्सी से गला घोंटकर कुशाग्र की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने रचिता, प्रभात और शिवा तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि अभियोजन की ओर से कुशाग्र के बाबा, मां, चाचा व चौकीदार समेत 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने तीनों को अपहरण व हत्या का दोषी करार दे दिया है।
