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संयोग या कुछ और: तस्करों की 'फेवरेट' या पुलिस की 'रटी-रटाई' कहानी? हर केस में सफेद बोरी का रहस्य, पढ़ें मामला

पुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 24 Jun 2026 10:47 AM IST
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सार

Kanpur Police White Sack Mystery: कानपुर में अवैध शराब बरामदगी के लगभग हर मामले में सफेद प्लास्टिक बोरी का मिलना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है। जानकारों का आरोप है कि पुलिस कोर्ट में कानूनी पचड़ों से बचने के लिए रटी-रटाई कहानी लिखती है।

Kanpur Wherever liquor was seized the sacks turned out to be white actions taken under the Excise Act so far
डॉ. विपिन ताडा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर में गंगा बैराज वाली रोड हो या दादानगर की ढाल, हैलट वाली नहरिया हो या घाटमपुर रेलवे क्रॉसिंग। हर जगह से पुलिस ने शराब की अवैध बिक्री करते लोगों को पकड़ा है। दिलचस्प संयोग यह है कि पुलिस जब भी इन अवैध सौदागरों को पकड़ती है, तो उनके पास हमेशा प्लास्टिक की सफेद बोरी ही मिलती है। यही बात पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाती है कि हर बार सफेद बोरी ही क्यों...।


हालांकि, पुलिस का कहना है कि प्लास्टिक की सफेद बोरी हल्की, सस्ती और हर जगह आसानी से मिल जाती है इसलिए आरोपी नशीले पदार्थ सप्लाई करने में इसे इस्तेमाल करते हैं। इसमें रखा सामान देखने में सामान्य लगता है और आसानी से शक के दायरे में नहीं आता। वहीं, लगातार दोहराए जा रहे पैटर्न ने सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

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हर मामले में सफेद प्लास्टिक बोरी ही क्यों दिखाई दी
सवाल यह नहीं है कि बरामदगी हुई या नहीं। सवाल यह है कि आखिर हर मामले में सफेद प्लास्टिक बोरी ही क्यों दिखाई दी। क्या यह सचमुच नशा तस्करों की पहली पसंद है या फिर पुलिस फर्द का ऐसा हिस्सा जो कोर्ट में गवाही की पेचीदगी से बचने के लिए बिना बदले हर मामले में दर्ज किया जाता है।

बरामदगी पूरी तरह वास्तविक होती है
जानकारों का मानना है कि हर मामले में सफेद प्लास्टिक बोरी का जिक्र होना कहीं न कहीं पुलिस की फर्द (रिकवरी मेमो) के तयशुदा फॉर्मेट का हिस्सा भी हो सकता है। यानी, बरामदगी दिखाने के दौरान एक जैसी भाषा और विवरण बार-बार इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामदगी पूरी तरह वास्तविक होती है। जो भी सामान मिलता है वही फर्द में दर्ज किया जाता है।

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शराब की अवैध बिक्री में शामिल लोग अक्सर साधारण बैग या प्लास्टिक बोरियों का इस्तेमाल करते हैं। यह आसानी से उपलब्ध है। बरामदगी के समय मिली चीजों का उल्लेख ही फर्द में किया जाता है।  -डॉ. विपिन ताडा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था)

शराब, चरस, असलहा आदि बरामदगी में पुलिस की फर्द की इबारत रटी-रटाई होती है। यहां तक कि बरामदगी स्थल भी ज्यादातर चिह्नित होते हैं। पुलिस इस पैटर्न का इस्तेमाल कोर्ट में गवाही की पेचीदगी से बचने के लिए करती है। गवाह रटे-रटाए बयान कोर्ट में देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर मुकदमों में बचाव पक्ष के अधिवक्ता के सवालों पर उलझ जाते हैं और बरामदगी झूठी साबित होने पर आरोपी बरी भी हो जाते हैं।  -अमित सिंह राठौर, वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी

इन गिरफ्तारी में आया प्लास्टिक की सफेद बोरी का जिक्र

  • 20 मार्च: साइन डम पार्क के पास से पवन दीक्षित को 17 पैकेट के साथ पकड़ा गया।
  • 21 मार्च: अरौल पुलिस ने बिरर्खनपुर से गोपाली को 17 पैकेट के साथ पकड़ा।
  • 22 मार्च: अर्मापुर पुलिस ने मजार वाली रोड से सोहन यादव को 16 पैकेट के साथ दबोचा।
  • 23 अप्रैल: बिठूर पुलिस ने ब्लूवर्ल्ड तिराहे के पास दीपक पाल काे 20 पैकेट लिए पकड़ा।
  • 4 जून: अरौल पुलिस ने नानामऊ तिराहे के पास से राजीव को पकड़ा 20 पैकेट के साथ दबोचा।
  • 7 जून: कलक्टरगंज पुलिस ने कोपरगंज के पास से पिलू को पकड़ा 17 पैकेट के संग पकड़ा।
  • 12 जून: जूही पुलिस ने रत्तूपुरवा बाउंड्री के पास से जाहिद को 18 पैकेट शराब संग पकड़ा।
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