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Kanpur: लोन लेने आए युवक को फर्म मालिक बना 250 करोड़ की जीएसटी चोरी, दो आरोपी गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Tue, 03 Mar 2026 08:10 PM IST
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सार

नजीराबाद पुलिस व साइबर क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मास्टरमाइंड समेत गिरोह समेत छह सदस्यों की तलाश जारी है। 

Kanpur: Young man who came to take loan was made firm owner and GST worth 250 crore was stolen, two arrested
पुलिस ने किया घटना का खुलासा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नजीराबाद पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच ने दो युवकों को गिरफ्तार कर लोन दिनाने के नाम पर फर्जी फर्म बना जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का राजफाश किया है। अब तक हुई जांच में करीब 250 करोड़ की चोरी पकड़ी गई है, जबकि 38 बोगस फर्म बनाने की जानकारी मिली है। यह गिरोह युवाओं को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर फर्जी फर्म बनाने व किरायेदारी नामा कराने का कार्य करते थे। उन्नाव के उज्जवल के नाम पर बनी फर्म के खाते में छह माह में लगभग 117 करोड़ का और आरके नगर निवासी अनुराग वर्मा के अकाउंट से 72 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस ने जीएसटी के अधिकारियों को मामले की रिपोर्ट दी है। दोनों आरोपियों के पास से 30 मोबाइल बरामद हुए हैं।
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पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि नजीराबाद के आरके नगर के रहने वाले अनुराग वर्मा को बहन की शादी के लिए लोन चाहिए था। 19 दिसंबर 2025 उसकी मुलाकात को कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमरदीप से हुई। दोनों ने लोन दिलाने का झांसा देकर पैन कार्ड, आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, डीएल, बिजली का बिल समेत उसके अन्य दस्तावेज ले लिए। अनुराग वर्मा को 30 जनवरी को गोविंदनगर की एक बैंक में फोटो खिंचाने के लिए भेजा गया। वहां उसका बैंक खाता खुला। लोन के रुपये न आने पर युवक ने बैंक में जाकर पता लगाया तो उसके नाम से रुद्रा इंटरप्राइजेज फर्म बनने और उसमें लाखों के ट्रांजेक्शन होने की जानकारी हुई।
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उसे साइबर अपराध की आशंका हुई। अनुराग वर्मा ने 22 फरवरी को नजीराबाद थाने व साइबर क्राइम ब्रांच को सूचना दी। पुलिस ने खाते की जानकारी जुटाई, जिसमें 72 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला। लोन दिलाने वाले दोनों युवकों के बारे में पूछताछ की। दोनों युवकों को हिरासत में लेने पर और गिरोह का पता चला। गिरोह ने उन्नाव के बीए पास उज्जवल के नाम पर भी पार्वती इंटरप्राइजेज (फर्म) बनाई थी। यह सीमेंट और बिल्डिंग मैटेरियल्स से संबंधित दिखाई गई थी। इस फर्म में छह माह के अंदर 117 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ था, जबकि 87 करोड़ रुपये कैश निकाले गए थे। इस फर्म में लखनऊ की शिवांश इंटरप्राइजेज समेत 12 अन्य फर्म से राशि डाली गई थीं। उज्जवल के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में आरके नगर और उन्नाव के युवकों की तरह 38 बोगस फर्म की जानकारी हुई। उनके रुपयों के लेनदेन की डिटेल खंगाली जा रही है। गिरोह में उन्नाव के ऋषभ शुक्ला, प्रथम और कानपुर के ऋषभ पांडेय, ऋषभ पटेल, रजत और साहिल के नाम सामने आए हैं। यह रुपयों के ट्रांजेक्शन, फर्म बनाने समेत अन्य खेल किया करते थे। कपिल मिश्रा और राज लोन दिलाने का झांसा देकर उनको बैंकों तक लाया करते थे।

 

Kanpur: Young man who came to take loan was made firm owner and GST worth 250 crore was stolen, two arrested
गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
दस्तावेज के सहारे हासिल करते थे ओटीपी
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गिरोह लोन लेने वाले युवकों के सारे दस्तावेज लेकर बैंक अकाउंट खुलवा देते थे। फर्म के पंजीयन के लिए किराये की जगह को देखा जाता था। यहां युवक के दस्तावेज के नाम पर रेंट डीड की जाती थी। फर्म बनाने सभी अन्य दस्तावेजों के बनाने के लिए ओटीपी में मोबाइल नंबर अपना लगाते थे। यह मोबाइल नंबर भी पीड़ितों के दस्तावेजों से हासिल किए जाते थे। लोन लेने वालों को जानकारी नहीं होती थी, जबकि रुपये मुख्य फर्म से बोगम फर्म में पहुंचने के बाद कैश निकाल लिया जाता था। यह कैश राशि बाद में कंपनी तक पहुंचती थी।

इस तरह से हो रही थी जीएसटी की चोरी
साइबर क्राइम ब्रांच के दरोगा शिवकुमार शर्मा व शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इस खेल में करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी होने की संभावना है। मुख्य फर्म कमीशन पर फर्जी फर्म खुलवाकर रुपये बचा रही थी। फर्म के जानकार माल के लेनदेन को कागजों में दिखाकर बोगस फर्म के खाते में रुपये भेज रहे थे। बाद में बोगस फर्म के खाते से कैश निकालकर कमीशन काटकर मुख्य फर्म को वापस दिया जा रहा था। इस तरह से पकड़े जाने पर भी मुख्य फर्म पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
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