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UP: छह साल, तीन एजेंसियां और रितु देवी अब भी लापता; CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, कहा- अब तलाश मुमकिन नहीं

आशीष दीक्षित, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 04 Mar 2026 05:56 AM IST
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सार

Fatehpur News: सीबीआई ने रितु देवी अपहरण मामले में विवेचना बंद करने की सिफारिश करते हुए क्लोजर रिपोर्ट लगा दी है। एजेंसी का मानना है कि रितु स्वेच्छा से गायब हुई है और अब उसके जीवित या मृत होने का कोई साक्ष्य नहीं है।

Fatehpur Six years and three agencies Ritu Devi still missing CBI files closure report says search no possible
सांकेतिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार

फतेहपुर जिले में करीब छह साल पहले अपहृत युवती की कोई जानकारी न मिल पाने पर सीबीआई ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। सीबीआई ने अदालत को पूरे घटनाक्रम की विवेचना में बताया कि अब इसके आगे न विवेचना हो सकती है और न ही तलाश की जा सकती है। इसी आधार पर आठ पेज की करीब 30 बिंदुओं पर क्लोजर रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट इलाहाबाद और जिला न्यायालय में दाखिल की गई है।

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मामला कल्यानपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक अनुसूचित जाति की 22 वर्षीय युवती रितु देवी से जुड़ा है। युवती की शादी कानपुर साढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। 23 फरवरी 2021 को युवती के मायके से गांव निवासी हैप्पी सिंह व अन्य अपहरण कर ले गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हैबियस कॉर्पस के तहत आदेश पर कल्यानपुर पुलिस ने 10 दिसंबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज की थी। युवती की अंतिम लोकेशन गुजरात प्रांत के सूरत में मिली थी। पुलिस मामले में हीलाहवाली करती रही।

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फरवरी 2024 को सीबीआई को सौंपा गया मामला
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को तलब करना शुरू किया, तो पुलिस ने आरोपी राही सिंह, हैप्पी सिंह को गिरफ्तार किया। चाचा संजय सिंह को संरक्षणदाता के रूप में पुलिस प्रकाश में लाई। तीनों को जेल भेजा गया। तत्कालीन एसपी, आईजी, एडीजी तलब हुए तो एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार प्रांत तक युवती की तलाश की। करीब 200 नंबरों का सीडीआर खंगाला। कोई ठोस सुराग नहीं लगने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को जांच के आदेश दिए। डीजीपी ने एसटीएफ गठित की। हाईकोर्ट ने एसटीएफ के केस सॉल्व न कर पाने पर मामला पांच फरवरी 2024 को सीबीआई को सौंपा।

आधार में कोई मोबाइल नंबर लिंक नहीं मिला
सीबीआई ने प्रकरण में युवती की खोज के लिए तीन लाख का इनाम रखा, जिसके पंपलेट मुंबई, गुजरात के विभिन्न शहरों में लगवाए। युवती के आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर की जांच कराई। आधार में कोई मोबाइल नंबर लिंक नहीं मिला। इसके बाद नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का डाटा चेक किया। टेलीकॉम एजेंसियों से आधार पर जारी मोबाइल नंबर की जानकारी ली। कोई नंबर नहीं मिला। सीडीआर की जांच में पता लगा कि युवती अपनी भाभी के मोबाइल नंबर से हैप्पी से बातचीत करती थी। युवती के नाम पर जारी पासपोर्ट की जांच की गई।

अपने गांव नहीं लौटेगी और न कभी परिवार और न ही पति के पास जाएगी
सीबीआई की विभिन्न टीमों ने सूरत, मोकामा, बिहार प्रांत के जमुई तक जांच की। कोविड काल के दौरान गुजरात के अस्पताल की जांच की। कई अज्ञात शवों की जानकारी जुटाई। अंतिम लोकेशन वाले पड़ोसियों से पूछताछ हुई। टीम ने युवती की भाभी का 28 नवंबर 2025 को नार्को कराया। किसी नंबर से युवती ने भाभी से बातचीत की थी। इसमें कहा था कि वह अपने गांव नहीं लौटेगी और न कभी परिवार और न ही पति के पास जाएगी। युवती की खोज से जुड़े विवेचना के सारे घटनाक्रम के साथ हाईकोर्ट में लखनऊ एसटीएफ के विवेचक डिप्टी एसपी अरुण रावत ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई है। जिला न्यायालय में विचाराधीन आरोपियों के मामले में भी यही रिपोर्ट दाखिल की गई है।

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट प्रमुख बिंदु

  • विवेचना के दौरान युवती का पता बताने वाले को तीन लाख तक का इनाम।
  • नेशनल पॉपुलेशन रिकार्ड (एनपीआर) का आठ साल का डाटा खंगाला।
  • कई प्रदेश की प्रिंट मीडिया में अपहृता का प्रचार-प्रसार किया गया।
  • सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सूक्ष्म और गहनता से तलाशा गया।
  • युवती की भाभी का नार्को टेस्ट कराया। टेस्ट में भाभी ने बताया कि उसकी युवती से बात हुई, जिसमें युवती ने कहा था कि वह न घर आएगी, न ससुराल जाएगी।
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