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मातृभूमि के लिए खुद को मिटा देने का गम नहीं, युद्ध में हाथ-आंख खोने के बाद भी देश सेवा का जज्बा कायम
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Jul 2019 02:48 AM IST
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अजीत सिंह राष्ट्रीय राइफल
- फोटो : अमर उजाला
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ऊंची-ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर छिपे बैठे दुश्मनों की गोलियां खाने के बाद उनको खत्म करने वाले सेना के जांबाजों में आज भी देश की रक्षा के लिए भावनाएं कूट-कूट कर भरी हैं। खुद के हाथ और आंख गंवाने के बाद भी बच्चों को सेना में जाने के लिए तैयार कर रहे हैं।
कारगिल युद्घ के 20 साल पूरे हो चुके हैं। इस युद्घ में शहर के एक जवान ने शहादत पाई थी। और दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब इनके बच्चे भी देश की रक्षा के लिए अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने को तैयार हैं।
2019 वर्ष नेक्सट आफ किन (एनओके) घोषित
कारगिल युद्घ के 20 वर्ष पूरे होने पर सेना ने वर्ष 2019 को नेक्सट आफ किन (एनओके) घोषित किया है। इसके तहत उन जवानों के परिवारों की मदद की जाएगी जिन्हें पेंशन आदि से जुड़ी को भी समस्या है।
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कारगिल युद्घ के 20 साल पूरे हो चुके हैं। इस युद्घ में शहर के एक जवान ने शहादत पाई थी। और दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब इनके बच्चे भी देश की रक्षा के लिए अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने को तैयार हैं।
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2019 वर्ष नेक्सट आफ किन (एनओके) घोषित
कारगिल युद्घ के 20 वर्ष पूरे होने पर सेना ने वर्ष 2019 को नेक्सट आफ किन (एनओके) घोषित किया है। इसके तहत उन जवानों के परिवारों की मदद की जाएगी जिन्हें पेंशन आदि से जुड़ी को भी समस्या है।
सिपाही अजीत सिंह का बेटा शिवराज सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पापा की तरह सेना में जाने का है बेटे में जज्बा
कल्याणपुर आवास-विकास में रहने वाले अजीत सिंह राष्ट्रीय राइफल (आर आर) में सिपाही थे। कारगिल युद्घ के दौरान इनकी तैनाती असम में थी। इसी बीच उन्हें वहां से बुलाकर कुपवाड़ा में तैनाती दी गई। ऑपरेशन विजय के दौरान जब वो दुश्मनों से लोहा ले रहे थे। तभी दुश्मनों की ओर से फेंका गया हैंडग्रेनेड उनके पास आकर गिरा।
अपने साथी जवानों को बचाने के लिए हैंडग्रेनेड दूसरी ओर उछाल कर फेंकने जा रहे थे कि हैंडग्रेनेड फट गया। इससे उनके दोनों हाथों की अगुंलियां जख्मी हो गई है। बायीं आंख में गंभीर चोट आई। कई ऑपरेशन हुए लेकिन आंख नहीं बच पाई। हाथों की अंगुलियां भी नहीं हैं। अजीत सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। दोनों केंद्रीय विद्यालय आईआईटी के छात्र हैं। छोटा बेटा शिवराज सिंह फौज में जाना चाहता है। अभी वो कक्षा नौ में पढ़ता है।
कल्याणपुर आवास-विकास में रहने वाले अजीत सिंह राष्ट्रीय राइफल (आर आर) में सिपाही थे। कारगिल युद्घ के दौरान इनकी तैनाती असम में थी। इसी बीच उन्हें वहां से बुलाकर कुपवाड़ा में तैनाती दी गई। ऑपरेशन विजय के दौरान जब वो दुश्मनों से लोहा ले रहे थे। तभी दुश्मनों की ओर से फेंका गया हैंडग्रेनेड उनके पास आकर गिरा।
अपने साथी जवानों को बचाने के लिए हैंडग्रेनेड दूसरी ओर उछाल कर फेंकने जा रहे थे कि हैंडग्रेनेड फट गया। इससे उनके दोनों हाथों की अगुंलियां जख्मी हो गई है। बायीं आंख में गंभीर चोट आई। कई ऑपरेशन हुए लेकिन आंख नहीं बच पाई। हाथों की अंगुलियां भी नहीं हैं। अजीत सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। दोनों केंद्रीय विद्यालय आईआईटी के छात्र हैं। छोटा बेटा शिवराज सिंह फौज में जाना चाहता है। अभी वो कक्षा नौ में पढ़ता है।
सिपाही अजीत सिंह का बेटा देवराज सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कानून की पढ़ाई कर सेवा करेगी शहीद की बेटी
कारगिल युद्घ के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले 10 पैरा कमांडो स्पेशल फोर्स में नायक पद पर तैनात रहे विजय पाल सिंह की बेटी भी बड़ी हो गई है। केडीएमए वर्ल्ड बर्रा से 12वीं पास करने वाली विजेता कानून की पढ़ाई कर आगे बढ़ना चाहती है।
उसने क्लैट की परीक्षा में भी बेहतर अंक पाए थे। मूलरूप से फतेहपुर के झाऊपुर अमौली में रहने वाले विजय की पत्नी सुषुमा देवी ने संघर्ष के साथ बेटी को पढ़ाया है। सुषमा बेटी के साथ बर्रा-आठ में रहती है। सुषमा के भाई विनय कुमार ने बताया कि विजेता ने अपने पिता को सिर्फ फोटो में ही देखा है। वह कानून की पढ़ाई कर जरूरतमंदों की सेवा करना चाहती है।
कारगिल युद्घ के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले 10 पैरा कमांडो स्पेशल फोर्स में नायक पद पर तैनात रहे विजय पाल सिंह की बेटी भी बड़ी हो गई है। केडीएमए वर्ल्ड बर्रा से 12वीं पास करने वाली विजेता कानून की पढ़ाई कर आगे बढ़ना चाहती है।
उसने क्लैट की परीक्षा में भी बेहतर अंक पाए थे। मूलरूप से फतेहपुर के झाऊपुर अमौली में रहने वाले विजय की पत्नी सुषुमा देवी ने संघर्ष के साथ बेटी को पढ़ाया है। सुषमा बेटी के साथ बर्रा-आठ में रहती है। सुषमा के भाई विनय कुमार ने बताया कि विजेता ने अपने पिता को सिर्फ फोटो में ही देखा है। वह कानून की पढ़ाई कर जरूरतमंदों की सेवा करना चाहती है।
मौका मिलेगा तो जरूर भेजेंगे सेना में
देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नही। इस सिद्घांत को मानने वाले सिपाही शिव गोविंद ने कारगिल युद्घ के दौरान अपनी बायीं आंख और बायां हाथ खोया था। इनके बेटे भी बड़े हो गए हैं। बड़ा बेटा आयुष कुमार 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। छोटा बेटा आनंद कुमार 10वीं का छात्र है। दोनों केआर एजूकेशन सेंटर में पढ़ाई करते हैं।
सेना की 22वीं ग्रेने डीयर्स में तैनात रहे शिव गोविंद ने कारगिल युद्घ के दौरान बटालिक सेक्टर में दुश्मनों से लोहा लिया था। कानपुर नगर के भीतरगांव सिलहटा में रहने वाले शिव गोविंद का कहना है कि सेना में नौकरी पाना अब काफी कठिन हो गया है। दोनों बेटों के मन में देश सेवा का जज्बा भी है। दोनों बेटों को इस दिशा में तैयार करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सारी परीक्षाएं पास करने के बाद दोनों सफल होंगे तो उन्हें जरूर भेजेंगे।
देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नही। इस सिद्घांत को मानने वाले सिपाही शिव गोविंद ने कारगिल युद्घ के दौरान अपनी बायीं आंख और बायां हाथ खोया था। इनके बेटे भी बड़े हो गए हैं। बड़ा बेटा आयुष कुमार 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। छोटा बेटा आनंद कुमार 10वीं का छात्र है। दोनों केआर एजूकेशन सेंटर में पढ़ाई करते हैं।
सेना की 22वीं ग्रेने डीयर्स में तैनात रहे शिव गोविंद ने कारगिल युद्घ के दौरान बटालिक सेक्टर में दुश्मनों से लोहा लिया था। कानपुर नगर के भीतरगांव सिलहटा में रहने वाले शिव गोविंद का कहना है कि सेना में नौकरी पाना अब काफी कठिन हो गया है। दोनों बेटों के मन में देश सेवा का जज्बा भी है। दोनों बेटों को इस दिशा में तैयार करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सारी परीक्षाएं पास करने के बाद दोनों सफल होंगे तो उन्हें जरूर भेजेंगे।