पितृपक्ष शुरू हो गए हैं। घाटों पर तर्पण और पिंडदान का दौर सूर्योदय से ही शुरू हो जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध के दौरान हमारे पितर धरती पर आते हैं। इसलिए इस दौरान नियम संयम का खास ध्यान रखना जरूरी है।
पितृपक्ष 2018: कर्मकांड, दान-पुण्य बाकी चीजों के बारे में भी जानें सबकुछ
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ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित के अनुसार तर्पण और पिंडदान के समय वस्त्र बदलने के बाद तन पर एक धोती होनी जरूरी है। गंगा में स्नान के बाद पिंडदान और तर्पण करना होता है। कर्मकांड पूरा हो जाने के बाद दान-पुण्य भी करना चाहिए।
श्राद्ध भर पितृपक्ष में कौआ, कुत्ता, गाय, चींटी और ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जब आप इन्हें भोजन कराते हैं तब पितर प्रसन्न होते हैं।
पूजन विधि
- सुबह स्नान-पूजन के बाद जजमान को पितरों को तर्पण के साथ पिंडदान करना चाहिए।
- हथेली भर अनाज का पिंड (जौं के आटे या खीर या गौ दुग्ध के खोये) बनाकर उसे पितरों को अर्पण करना चाहिए।
- गंगाजल, कुश, काले तिल, फूल-फल और दुग्ध व उनसे बने खाद्यान्न अर्पण करने चाहिए।
- मध्यान्ह से पूर्व ब्राह्मण को भोज कराने के साथ उन्हें वस्त्रादि दान देना चाहिए।
एक नजर श्राद्ध तिथियों पर
25 सितंबर (मंगलवार): प्रतिपदा
26 सितंबर (बुधवार): द्वितीया
27 सितंबर (गुरुवार): तृतीया
28 सितंबर (शुक्रवार): चतुर्थी
29 सितंबर (शनिवार): पंचमी
30 सितंबर (रविवार): षष्ठी
1 अक्तूबर (सोमवार): सप्तमी
2 अक्तूबर (मंगलवार): अष्टमी
3 अक्तूबर (बुधवार): मातृ नवमी
4 अक्तूबर (गुरुवार): दशमी
5 अक्तूबर (शुक्रवार): एकादशी
6 अक्तूबर (शनिवार): द्वादशी
7 अक्तूबर (रविवार): त्रयोदशी, चतुर्दशी श्राद्ध
8 अक्तूबर (सोमवार): चतुर्दशी श्राद्ध, सर्वपितृ अमावस्या, महालया अमावस्या
9 अक्तूबर (मंगलवार): भौमवती अमावस्या