Panchayati Raj Day: चौखट लांघकर गांव की 'सरकार' चला रहीं महिलाएं; सिर्फ प्रतिनिधि नहीं अब विकास की असली मुखिया
Kanpur News: कानपुर की महिला ग्राम प्रधानों ने स्वास्थ्य विभाग की नौकरी छोड़ने से लेकर करोड़ों के पुल प्रोजेक्ट पास कराने तक मिसाल पेश की है। शिक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी और पिंक शौचालयों जैसे नवाचारों के जरिए ये महिलाएं सामाजिक बदलाव का चेहरा बन गई हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कभी घर की चौखट और चूल्हा-चौका तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं अब गांव की तस्वीर और तकदीर बदलने में भूमिका निभा रही हैं। महिलाएं सिर्फ प्रतिनिधि नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाली मजबूत मुखिया बनकर उभरी हैं। पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर वे न सिर्फ योजनाएं बना रही हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर मिसाल भी कायम कर रही हैं। इसलिए इनको मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने सम्मानित किया है। पंचायती राज दिवस विशेष पर ये महिला प्रधान सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि उस सामाजिक बदलाव की उदाहरण हैं, जहां महिलाएं सीमाएं तोड़कर नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।
नौकरी छोड़ी, गांव को बनाया मॉडल
पतारा विकासखंड की तिलसड़ा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान सुलेखा कुशवाहा इस बदलाव की सशक्त मिसाल हैं। स्वास्थ्य विभाग में प्रतिरक्षण अधिकारी की नौकरी छोड़कर उन्होंने ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। आज उनके नेतृत्व में तिलसड़ा गांव विकास और पारदर्शिता का उदाहरण बन चुका है। स्वच्छता व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनके काम को प्रदेश स्तर पर सराहना मिली। यही वजह है कि उनका चयन नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सम्मानित भी किया। ये अपने गांव तक सीमित न रहकर सुलेखा कुशवाहा दूसरे राज्यों तक अपनी पहचान बना चुकी हैं। त्रिपुरा और ललितपुर में जाकर उन्होंने अन्य ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण दिया।
विकास की राह पर गांव, स्कूल बनाया मॉडल
पतारा ब्लॉक की दुरौली ग्राम पंचायत भी विकास के नए मानक गढ़ रही है। यहां की महिला प्रधान दीक्षा पटेल ने पेयजल, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया। एक आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया गया। इसके साथ प्राथमिक स्कूल में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत काम कराकर मॉडल बनाया। जो सड़के पहले बजबजातीं थीं वो आज पक्की हो गईं। गांव की सड़कें इंटरलॉकिंग हैं। इसके साथ घर-घर कूड़ा उठाने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था की। जल जीवन मिशन के तहत गांव में लगभग सभी घरों तक पानी पहुंचाया। इन प्रयासों ने न सिर्फ गांव की सूरत बदली, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार किया।
गांव को दी सामाजिक पहचान और सुविधाएं
बिल्हौर विकासखंड के बकोठी गांव की ग्राम प्रधान माला कटियार ने गांव में सामाजिक और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बेहतर काम किए। उन्होंने करीब 18 लाख रुपये की लागत से मिलन केंद्र (सामुदायिक भवन) का निर्माण कराया, जो आज गांव के हर वर्ग के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। अब गरीब और जरूरतमंद परिवारों को शादी, मुंडन, कर्णछेदन जैसे कार्यक्रमों के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता। गांव में आवागमन को सुगम बनाने के लिए दो सीसी रोड का निर्माण कराया गया। वहीं महिलाओं और युवतियों की मांग पर प्रमुख धार्मिक स्थल माता चतुर्भुजी मंदिर का सुंदरीकरण और इंटरलॉकिंग कार्य भी कराया, जिससे गांव की आस्था और सुंदरता दोनों को नई पहचान मिली। बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य व फिटनेस को ध्यान में रखते हुए गांव में ओपन जिम की स्थापना की गई। इसके साथ पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए पंचायत भवन में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा कराई गई है।
गांव में बनवाए पिंक शौचालय, ग्रामीणों के लिए बनवा रहीं पुल
ककवन विकासखंड के कसिगवां गांव की ग्राम प्रधान अमिता यादव ने महिलाओं की सुविधा और गांव की सड़कों को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने करीब 2 लाख रुपये की लागत से ग्राम सचिवालय का जीर्णोद्धार कराया और महिलाओं व युवतियों के लिए पिंक शौचालय का निर्माण करवाया, जिससे स्वच्छता और सुरक्षा दोनों बेहतर हुई। स्कूली बच्चों की परेशानी को समझते हुए लोक निर्माण विभाग के सहयोग से करीब 30 लाख रुपये की लागत से स्कूल जाने वाले मार्ग का निर्माण कराया, जिससे बच्चों का आवागमन आसान हुआ। इसके साथ उन्होंने पांडू नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह पुल अंटवा, नया नेवादा और भवन नेवादा गांवों के लोगों को राहत देगा। इसके बनने से ग्रामीणों और बच्चों को 14 किलोमीटर का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
जिले में करीब 265 महिला प्रधान हैं। जिसमें जो पढ़ी लिखी हैं वो बेहतर काम कर रही हैं। गांव में सड़क से लेकर शिक्षा, स्वच्छता और सुरक्षा काम पर पूरा फोकस कर रही हैं। इसका नतीजा है कि जिले की महिला प्रधानों को सीएम और पीएम के हाथों सम्मानित भी किया गया। -मनोज कुमार, डीपीआरओ

कमेंट
कमेंट X