सकारात्मक पहल: रीना सिंह संवार रहीं हैं नेत्रहीन बच्चियों का भविष्य, स्पेशल स्कूल में बालिकाओं को मिल रही नई दिशा
दिव्यांगता के शिकार हुए बच्चे न केवल पढ़ने-लिखने के अधिकारों से वंचित रह जाते हैं, बल्कि उनका बचपन भी छीन जाता है। ऐसे ही बच्चों में आत्मविश्वास पैदा कर उनके रंगहीन जीवन को संवारने में जुटी हैं, श्री सांई बाबा स्पेशल एजुकेशन सेंटर की संचालिका रीना सिंह।
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कानपुर में नेत्रहीन बेटियों की जिंदगी में रीना सिंह शिक्षा की अलख जगा रही हैं। नौबस्ता में रीना श्री सांई बाबा स्पेशल एजुकेशन सेंटर का संचालन कर रही हैं। वर्तमान में यहां 20 बच्चियां पढ़ रही हैं। इन बच्चियों की पढ़ाई का सारा खर्च वह खुद उठा रही हैं। रीना कहती हैं कि वह 2005 से ही ऐसे बच्चों के लिए काम करना चाहती थीं। 2010 में जब वह चेतना फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में गईं तो उन्होंने इन बच्चों को शिक्षित करने की ठानी।
इसके बाद बीएसए कार्यालय में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर ऐसे ही बच्चों को तलाश कर पढ़ाने के लिए प्रयास किया। उन्होंने बताया कि शहर में बेटियों के लिए कोई अंध विद्यालय नहीं था। इस वजह से उन्होंने पति डॉ. अरविंद सिंह और ससुर योगेंद्र सिंह की मदद से यह स्कूल खोला।
पढ़ाई के साथ-साथ वह इन बेटियों को फ्री में संगीत भी सिखा रही हैं। वह कहती हैं कि जिन बच्चों के परिवार के लोग कुछ भी आर्थिक सहयोग कर सकते हैं, वह उनसे सहयोग ले लेती हैं। हालांकि प्रवेश के समय फीस प्राथमिकता में नहीं रहती।
बच्चों में खूबी देखें, कमजोरी नहीं
रीना कहती हैं कि किसी भी बच्चे को उसकी शारीरिक बनावट के हिसाब से नहीं आंकना चाहिए। हर बच्चे में कुछ न कुछ खूबी होती है, भले ही वह दिव्यांग हो। हमें उसकी खूबी देखनी चाहिए, कमजोरी नहीं। अगर उसकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जाए, तो वही अक्षम बच्चा सक्षम बन जाता है।
मलिन बस्तियों में ढूंढती हैं बच्चियां
रीना खुद मलिन बस्तियों में जाकर ऐसे दृष्टिहीन बच्चियों को तलाशती हैं। इसके बाद उनकी आगे की पढ़ाई के लिए परिवार को मनाती हैं और फीस का भी प्रबंध करती हैं।