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परदेस से कमाई कर लाैट रहे पति 'एेसे बना रहे हैं पत्नियाें काे एचअाईवी का शिकार'
Sat, 10 Feb 2018 08:50 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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Updated Sat, 10 Feb 2018 08:50 AM IST
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झाेलाछाप डाॅक्टर के इंजेक्शन लगाने से कई लाेग एचअाईवी के शिकार हाे गए हैं जबकि नाकाे टीम अाैर उन्नाव के डीएम का बयान सुर्खियों में छाया हुअा है। टीम अाैर उन्नाव डीएम की माने ताे एक इंजेक्शन इतने लाेगाें काे एचअाईवी का शिकार नहीं बना सकता है।
परदेस से कमाई के साथ ला रहे एचआईवी
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दिल्ली, मुबई सहित अन्य महानगरों से लौटने वाले ग्रामीण कमाई के साथ एचआईवी का वायरस भी लेकर लौट रहे हैं। बांगरमऊ कस्बे और आसपास के गांवों में एचआईवी के 76 मरीज मिलने पर वजह जानने आई राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसायटी (नाको) टीम ने भी इस बात को स्वीकार किया है।
जागरूकता के अभाव में लोग हो रहे शिकार
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बांगरमऊ कस्बा और आसपास के गांवों में एचआईवी पीड़ितों की बढ़ी तादात के पीछे झोलाछाप के अलावा अन्य कारण भी हैं। लोगों में एड्स की जानकारी न होना एवं परदेस से बीमारी लाने की वजह भी सामने आ रही है। जिन इलाकों में सबसे ज्यादा एचआईवी संक्रमित मिले, वहां पच्चीस से तीस फीसदी लोग दूसरे महानगरों में काम धंधे के सिलसिले में जाते हैं। वहां साल दो साल तक अकेले रहते हैं।
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नाको टीम बांगरमऊ में केवल सिरिंज को नहीं मान रही वजह
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ऐसे में वहां भी उनके किसी पीड़ित महिला के संपर्क में आने की आशंका है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे परदेस से लौटते वक्त कमाई के साथ एचआईवी भी ले आए। यहां आने पर वे परिवार के संपर्क में रहे, जिसकी वजह से उनकी पत्नी व बच्चों तक एचआईवी पहुंचा।
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मजदूरों का पलायन एचआईवी वाहक हो सकता है
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इसके बाद परदेस से आने वालों के जरिए संक्रमित इंजेक्शन, संक्रमित रक्त या असुरक्षित यौन संबंधाें से दूसरे लोग एचआईवी की चपेट में आ जाते हैं। नाको टीम में शामिल डा. आशा हेगड़े भी कुछ ऐसा ही इत्तेफाक रखती हैं। उनका कहना है कि मजदूरों का पलायन एचआईवी वाहक हो सकता है। जांच में इस बिंदू पर खासतौर से ध्यान रखा जा रहा है।
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