UP: इतना तनाव कि बूढ़ा हो रहा दिल! कानपुर में 35-45 साल के युवाओं को पड़ रहे बुजुर्गों जैसे गंभीर दिल के दौरे
Kanpur Health News: कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों ने चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। कार्डियोलॉजी विभाग में 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 150 मरीजों पर किए गए अध्ययन में सामने आया है कि अब 35 वर्ष के युवाओं की धमनियों में 60 से 70 वर्ष के बुजुर्गों जैसे लंबे और गंभीर ब्लॉकेज मिल रहे हैं। जानिए कैसे रखें दिल की सेहत का ख्याल.....
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युवावस्था में ही युवाओं का दिल तेजी से बूढ़ा हो रहा है। अत्यधिक मानसिक तनाव, बिगड़ी जीवनशैली और देर रात तक स्क्रीन टाइम के चलते अब 35 से 45 साल के युवाओं को बुजुर्गों जैसा गंभीर हार्ट अटैक आ रहा है।
कानपुर के लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान में 150 युवा मरीजों पर किए गए दो साल के गहन अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि 35 साल के युवाओं की धमनियों में 70 साल के बुजुर्गों की तरह लंबे-लंबे और गंभीर ब्लॉकेज मिल रहे हैं।
3 साल में बदल गया हार्ट अटैक का पैटर्न
वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा और उनकी टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन के मुताबिक बीते तीन साल में युवाओं में हार्ट अटैक का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां एंजियोग्राफी के दौरान 35 से 45 वर्ष के युवाओं की केवल एक ही नस में छोटा-मोटा ब्लॉकेज मिलता था, वहीं अब कई युवाओं की नसों में 50, 80 और 90 प्रतिशत तक लंबे ब्लॉकेज व कैल्शियम जमा होने के मामले सामने आ रहे हैं। कई मरीजों में तो 'ट्रिपल वेसल' (हृदय की तीनों मुख्य नसों में रुकावट) की स्थिति पाई गई, जो आमतौर पर 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में देखी जाती थी।
तनाव, वर्क-लाइफ बैलेंस न होना और स्क्रीन टाइम सबसे बड़ी वजह
अध्ययन में शामिल ज्यादातर मरीज वर्किंग क्लास या बिजनेसमैन थे। डॉ. शर्मा के अनुसार, पति-पत्नी दोनों का बहुत ज्यादा व्यस्त शेड्यूल, वर्क-लाइफ बैलेंस न होना और काम का अत्यधिक मानसिक तनाव दिल की नसों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। इसके अलावा देर रात तक मोबाइल चलाना, बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम, नींद पूरी न होना और अनियंत्रित दिनचर्या युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रही है।
जिम जाने वाले और डाइट का ध्यान रखने वाले भी नहीं सुरक्षित
अध्ययन में शामिल 50 से 60 मरीज ऐसे थे जो नियमित रूप से जिम जाते थे, सुबह टहलते थे या शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्रिय थे। वहीं, 50 मरीज संतुलित खान-पान का पालन कर रहे थे। इनमें लगभग 30 प्रतिशत मरीज ऐसे भी थे जो बहुत कम या कभी-कभार स्मोकिंग करते थे। इसके बावजूद वे गंभीर ब्लॉकेज का शिकार बने, जिसका मुख्य कारण अत्यधिक मानसिक तनाव ही पाया गया।
आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार, जरूर कराएं ये टेस्ट
डॉ. शर्मा ने बताया कि अध्ययन में जेनेटिक यानी आनुवंशिक कारण भी बहुत महत्वपूर्ण पाए गए हैं। यदि माता या पिता की ओर से तीन पीढ़ियों में किसी को 40 वर्ष की उम्र से पहले हार्ट अटैक आया है, तो जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को लाइपोप्रोटीन-लिटिल-ए (LPA) बायोकेमिकल टेस्ट कराना बेहद जरूरी है, जिससे आनुवंशिक खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
दिल को सेहतमंद रखने के लिए विशेषज्ञ सलाह:
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लिपिड और LPA टेस्ट: यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है या परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक की हिस्ट्री रही है, तो अपना एलपीए और एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) का टेस्ट जरूर कराएं।
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तनाव मुक्त दिनचर्या: मानसिक तनाव को कम करें, काम के बीच ब्रेक लें और वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने की कोशिश करें।
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डिजिटल डिटॉक्स व नींद: देर रात तक मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें तथा रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त और समय पर नींद लें।