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Kanpur News: टैरिफ... अब सौ प्रतिशत पर असमंजस, बड़े आर्डर नहीं दे रहे अमेरिकी खरीदार
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कानपुर। अमेरिका ने ट्रेड डील की बातचीत के बीच एक बार फिर रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। इससे बने अनिश्चितता के माहौल में अमेरिका के खरीदारों ने बड़े आर्डरों पर रोक लगा दी है। जानकारों का कहना है कि इसका असर निर्यात पर पड़ेगा। इसके अलावा अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के आगे दिवाली उत्पादों का संकट भी आ सकता है।
कुछ दिन पहले भी लगाया था 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क
अमेरिका ने कुछ दिन पहले ही भारत समेत 60 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह शुल्क जबरन श्रम के मुद्दे को लेकर लगाया गया था। इससे भी शहर के निर्यातकों में अनिश्चितता की स्थिति बनी थी। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 24 जुलाई को व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत यह घोषणा की थी। इसमें अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया था। अब चमड़ा उत्पादों पर 22.5 प्रतिशत कर हो गया है।
अगस्त-सितंबर में ही आते हैं सबसे ज्यादा निर्यात आर्डर
अब अमेरिका 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कह रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया है लेकिन टैरिफ लगने की आशंका का असर पड़ गया है। ऑर्डरों पर दबाव आ गया है। अमेरिकी खरीदारों ने बड़े-बड़े नए निर्यात आर्डर देने पर रोक लगा दी है। अगले दो महीने निर्यातकों के लिए बेहद अहम हैं। अगस्त-सितंबर में ही सबसे ज्यादा निर्यात आर्डर आते हैं।
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निर्यात पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव
अमेरिका के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जो दिवाली पर अलग-अलग उत्पादों की खरीद करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल से शुरू हुए टैरिफ संकट के बाद भी अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यदि 100 प्रतिशत टैरिफ लगा तो मूल्य प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ जाएगी। इससे निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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शहर से 16 दिन में यूके-यूरोप को 150 करोड़ के उत्पादों का निर्यात
क्रासर-
रंग लाया मुक्त व्यापार समझौता, यूके और यूरोपियन देशों को भा रहे शहर के उत्पाद, बंपर आर्डर
15 जुलाई को लागू हुआ था भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता
प्रतिदिन शहर से 25 से ज्यादा निर्यात प्रमाणपत्र यूके या यूरोप के देशों के लिए हो रहे हैं जारी, पहले तीन-चार ही होते थे
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। भारत और यूके के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता तेजी से रंग ला रहा है। 16 दिन में शहर से 150 करोड़ के उत्पादों का निर्यात यूके और यूरोप के देशों को हुआ है।
समझौता 15 जुलाई को लागू हुआ था। अब शहर से प्रतिदिन 25 से ज्यादा निर्यात प्रमाणपत्र यूके या यूरोप के देशों के लिए जारी हो रहे हैं। पहले ये संख्या प्रतिदिन तीन-चार ही होती थी। जिस दिन समझौता लागू हुआ था, उसी दिन शहर से दो करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट रवाना किए गए थे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि भारत-यूके सीईटीए लागू हो चुका है। इसका खासा लाभ शहर के चमड़ा और चमड़े के बने उत्पादों के अलावा इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, मशीनरी पार्ट्स के निर्यात में देखने को मिल रहा है। यूके के अलावा यूरोपीय यूनियन के देशों से बहुत अच्छे आर्डर शहर के निर्यातकों को मिल रहे हैं।
अमेरिका के बाद यूके सबसे बड़ा निर्यात बाजार
उन्होंने बताया कि शहर के निर्यातकों के लिए अमेरिका के बाद यूके दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यूके के साथ निर्यात लगातार बढ़ रहा है। 2025 में शहर से 1650 करोड़ और 2024 में 1500 करोड़ का निर्यात किया गया था। दरअसल समझौते के बाद से अधिकांश उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क हो गया है। पहले चमड़ा और जूता पर 16 प्रतिशत और कपड़ा पर 12 प्रतिशत तक शुल्क था। इसी तरह रत्न एवं आभूषण पर चार प्रतिशत, रसायन पर चार से आठ प्रतिशत, मैकेनिकल मशीनरी पर आठ प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल मशीनरी पर 14 प्रतिशत तक शुल्क था। उन्होंने बताया कि कानपुर चमड़ा और सेफ्टी शूज का प्रमुख निर्यात केंद्र है। यूके में आयात शुल्क कम होने से उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं यानी कि उत्पाद सस्ते हो गए हैं।
दो से तीन साल में दोगुना होगा निर्यात
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि समझौते का अच्छा असर देखने को मिल रहा है। यूके और यूरोप के खरीदार तेजी से आर्डर दे रहे हैं। जुलाई से सितंबर में ही सबसे ज्यादा क्रिसमस के लिए भी आर्डर मिलते हैं। समझौते से अगले दो से तीन साल में निर्यात दोगुना होगा। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के बाजारों में भी पैठ बनेगी। यूरोपीय यूनियन में 2500-3000 करोड़ का निर्यात शहर से सालाना होता है। यूरोप में शहर के चमड़ा और चमड़े के बने उत्पादों की बहुत अच्छी मांग है। सैडलरी और हारनेस, पर्स, बेल्ट, बैग, शेफ्टी शूज, फुटवियर का सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है।
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कुछ दिन पहले भी लगाया था 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क
अमेरिका ने कुछ दिन पहले ही भारत समेत 60 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह शुल्क जबरन श्रम के मुद्दे को लेकर लगाया गया था। इससे भी शहर के निर्यातकों में अनिश्चितता की स्थिति बनी थी। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 24 जुलाई को व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत यह घोषणा की थी। इसमें अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया था। अब चमड़ा उत्पादों पर 22.5 प्रतिशत कर हो गया है।
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अगस्त-सितंबर में ही आते हैं सबसे ज्यादा निर्यात आर्डर
अब अमेरिका 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कह रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया है लेकिन टैरिफ लगने की आशंका का असर पड़ गया है। ऑर्डरों पर दबाव आ गया है। अमेरिकी खरीदारों ने बड़े-बड़े नए निर्यात आर्डर देने पर रोक लगा दी है। अगले दो महीने निर्यातकों के लिए बेहद अहम हैं। अगस्त-सितंबर में ही सबसे ज्यादा निर्यात आर्डर आते हैं।
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निर्यात पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव
अमेरिका के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जो दिवाली पर अलग-अलग उत्पादों की खरीद करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल से शुरू हुए टैरिफ संकट के बाद भी अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यदि 100 प्रतिशत टैरिफ लगा तो मूल्य प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ जाएगी। इससे निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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शहर से 16 दिन में यूके-यूरोप को 150 करोड़ के उत्पादों का निर्यात
क्रासर-
रंग लाया मुक्त व्यापार समझौता, यूके और यूरोपियन देशों को भा रहे शहर के उत्पाद, बंपर आर्डर
15 जुलाई को लागू हुआ था भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता
प्रतिदिन शहर से 25 से ज्यादा निर्यात प्रमाणपत्र यूके या यूरोप के देशों के लिए हो रहे हैं जारी, पहले तीन-चार ही होते थे
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। भारत और यूके के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता तेजी से रंग ला रहा है। 16 दिन में शहर से 150 करोड़ के उत्पादों का निर्यात यूके और यूरोप के देशों को हुआ है।
समझौता 15 जुलाई को लागू हुआ था। अब शहर से प्रतिदिन 25 से ज्यादा निर्यात प्रमाणपत्र यूके या यूरोप के देशों के लिए जारी हो रहे हैं। पहले ये संख्या प्रतिदिन तीन-चार ही होती थी। जिस दिन समझौता लागू हुआ था, उसी दिन शहर से दो करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट रवाना किए गए थे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि भारत-यूके सीईटीए लागू हो चुका है। इसका खासा लाभ शहर के चमड़ा और चमड़े के बने उत्पादों के अलावा इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, मशीनरी पार्ट्स के निर्यात में देखने को मिल रहा है। यूके के अलावा यूरोपीय यूनियन के देशों से बहुत अच्छे आर्डर शहर के निर्यातकों को मिल रहे हैं।
अमेरिका के बाद यूके सबसे बड़ा निर्यात बाजार
उन्होंने बताया कि शहर के निर्यातकों के लिए अमेरिका के बाद यूके दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यूके के साथ निर्यात लगातार बढ़ रहा है। 2025 में शहर से 1650 करोड़ और 2024 में 1500 करोड़ का निर्यात किया गया था। दरअसल समझौते के बाद से अधिकांश उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क हो गया है। पहले चमड़ा और जूता पर 16 प्रतिशत और कपड़ा पर 12 प्रतिशत तक शुल्क था। इसी तरह रत्न एवं आभूषण पर चार प्रतिशत, रसायन पर चार से आठ प्रतिशत, मैकेनिकल मशीनरी पर आठ प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल मशीनरी पर 14 प्रतिशत तक शुल्क था। उन्होंने बताया कि कानपुर चमड़ा और सेफ्टी शूज का प्रमुख निर्यात केंद्र है। यूके में आयात शुल्क कम होने से उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं यानी कि उत्पाद सस्ते हो गए हैं।
दो से तीन साल में दोगुना होगा निर्यात
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि समझौते का अच्छा असर देखने को मिल रहा है। यूके और यूरोप के खरीदार तेजी से आर्डर दे रहे हैं। जुलाई से सितंबर में ही सबसे ज्यादा क्रिसमस के लिए भी आर्डर मिलते हैं। समझौते से अगले दो से तीन साल में निर्यात दोगुना होगा। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के बाजारों में भी पैठ बनेगी। यूरोपीय यूनियन में 2500-3000 करोड़ का निर्यात शहर से सालाना होता है। यूरोप में शहर के चमड़ा और चमड़े के बने उत्पादों की बहुत अच्छी मांग है। सैडलरी और हारनेस, पर्स, बेल्ट, बैग, शेफ्टी शूज, फुटवियर का सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है।