सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Three Convicted to Life Imprisonment for Burning Father and Son Alive in Fatehpur

UP: ‘बाहर से कुंडी, अंदर जलती चिता’, मासूम और पिता को जिंदा भस्म किया, 15 साल बाद गुनहगारों को सजा, पढ़ें मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला,फतेहपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Thu, 28 May 2026 11:16 AM IST
विज्ञापन
सार

Fatehpur News: गाजीपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2011 में पिता-पुत्र को घर में बंद कर जिंदा जलाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।

Three Convicted to Life Imprisonment for Burning Father and Son Alive in Fatehpur
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार

कोठरी की कुंडी बाहर से बंद कर पिता-पुत्र को जिंदा जलाने के मामले में अदालत ने बहनोई-साले समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट संख्या-द्वितीय के अपर सत्र न्यायाधीश पूजा विश्वकर्मा ने तीनों दोषियों को उम्रकैद और 45-45 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें इंसाफ मिला लेकिन कई आरोपी अब भी छूट गए।

Trending Videos

गाजीपुर थाना क्षेत्र के चक काजीपुर गांव निवासी सूर्यकली ने बताया कि मार्च 2011 में गांव के सुरेश विश्वकर्मा के परिवार की एक लड़की लापता हो गई थी। इस मामले में उनके परिवार के पिंटू पर शक जताया जा रहा था और लगातार पुलिस पर खोजबीन का दबाव बनाया जा रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

10 मार्च 2011 की शाम करीब पांच बजे कृष्णपाल उर्फ नेता, रज्जू विश्वकर्मा, सुरेश विश्वकर्मा, हरछट्टी विश्वकर्मा, देशराज, नांद, रामराज विश्वकर्मा, होरीलाल, कालू और सुरेश विश्वकर्मा का साला राजेंद्र विश्वकर्मा निवासी तौफापुर थाना हुसैनगंज शाम करीब पांच बजे घर आए। लड़की न मिलने पर परिवार की हत्या की धमकी दी।

विज्ञापन

महिला ने बताया कि रात करीब आठ बजे तत्कालीन चौकी प्रभारी और तीन पुलिसकर्मियों के साथ जांच के लिए पुलिस भी मौके पर पहुंची और घर की तलाशी ली। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने गाली-गलौज भी की और लड़की नहीं मिलने पर परिवार को जेल भेजने की धमकी दी।

पुलिस के लौटने के बाद सुरेश विश्वकर्मा ने साथी रज्जू विश्वकर्मा, हरछट्टी विश्वकर्मा, देशराज, नांद, रामराज विश्वकर्मा, होरीलाल, कालू, राजेंद्र विश्वकर्मा संग पति लालता प्रसाद व बेटा अनिल को घेर लिया। बताया गया कि पति लालता प्रसाद दीक्षित और पुत्र अनिल जान बचाकर घर के अंदर छिप गए लेकिन आरोपियों ने बाहर से कुंडी बंद कर आग लगा दी।

आग में पूरा घर जल गया। पति की मौके पर ही मौत हो गई। पुत्र अनिल गंभीर रूप से झुलस गया और बाद में इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में भगदड़ मच गई और पीड़िता मदद के लिए चिल्लाती रही लेकिन कोई सामने नहीं आया। कोर्ट ने कृष्णपाल, सुरेश व उसके साले राजेंद्र को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।

पुलिस कर्मियों समेत 12 का आरोप पत्र में नाम नहीं

इस मामले में कुल 15 आरोपी बनाए गए थे। इनमें तत्कालीन चौकी प्रभारी और तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे। हालांकि विवेचना के बाद पुलिस ने केवल कृष्णपाल उर्फ नेता, सुरेश और उसके साले राजेंद्र के खिलाफ ही आरोप पत्र दाखिल किया। शेष नाम हटा दिए गए। बाद में वादी पक्ष ने अन्य आरोपियों को भी तलब करने की मांग की जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। वर्तमान में तीनों दोषी जमानत पर थे। मामले में कुल 13 गवाहों ने गवाही दी।

राजनीतिक तूल भी पकड़ा था

घटना के समय 2011 में मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया था। तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष समरजीत सिंह समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद चौकी पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और धरना-प्रदर्शन भी हुए। गांव में कई दिनों तक तनाव की स्थिति रही और पीएसी तैनात रही।

घटना के बाद परिवार गांव लौटने से डरता है

पति और बेटे को खोने के बाद सूर्यकली ने गांव छोड़ दिया और मायके तैफापुर में रहने लगीं। परिवार से भी गांव के लोगों की दूरी हो गई। इससे परिवार गांव आने के नाम से डरता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed