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Kasganj News: बैराजों से पानी छोड़े जाने से गांव की आबादी तक पहुंचा बाढ़ का पानी
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फोटो 32- कादरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी। स्रोत संवाद
- फोटो : सांकेतिक
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कासगंज। बैराजों से पिछले कई दिनों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण जिले में मीडियम फ्लड (मध्यम बाढ़) के हालात विकट हो गए हैं। रविवार को भी बाढ़ का यह दौर जारी रहा, जिसके चलते पटियाली तहसील के कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के पानी ने भारी दस्तक दे दी है।
रविवार को शनिवार के मुकाबले 1.72 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना हुआ था। इस आपदा ने खादर क्षेत्र के खेतों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालात इतने गंभीर हैं कि नगला दुर्जन में एक शवयात्रा को बाढ़ के पानी के बीच से होकर निकालना पड़ा। नगला खना निवासी बुधपाल का निधन होने पर ग्रामीणों ने बाढ़ के पानी के बीच से शवयात्रा को सुरक्षित निकाला।
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गंगा में हरिद्वार और बिजनौर के बाद नरौरा बैराज से भी पानी का प्रवाह लगातार बढ़ा हुआ था। हालांकि अब बैराजों से पानी डिस्चार्ज होने की रफ्तार में कुछ कमी आई है, लेकिन नरौरा से पटियाली तक पानी पहुंचने में 24 घंटे का समय लगता है, जिससे शनिवार रात से ही पटियाली के ग्रामीण इलाकों में पानी घुसने लगा। नगला खना, नगला दुर्जन, नगला दिपी, मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन और नगला नरपत जैसे गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
नदराैली निवासी लवकुमार, नगला दुर्जन के डॉ. उर्वेश कुमार और नगला नरपत के किशनपाल ने बताया कि बाढ़ का पानी गांवों के बीचों-बीच और खेतों तक आ गया है। इससे पशुओं के चारे और फसलों के भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है।
वहीं, कादरगंज निवासी असलम ने बताया कि कादरगंज के पास पश्चिम की ओर गंगा की तेज धारा से तटबंध में कटान होने की आशंका भी बनी हुई है। नगला नरपत और नगला जयकिशन के पास पक्का बांध न होने के कारण पानी सीधे गांवों में घुस रहा है, जिससे ग्रामीण लंबे समय से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।
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बांध न होने से ग्रामीण चिंतित
गंजडुंडवारा। गंगा में बाढ़ की स्थिति बन जाने के बाद से नगला नरपत, नगला जयकिशन सहित आस पास के गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीण काफी समय से बांध बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस वर्ष भी बांध नहीं बन पाया है। बांध न होने के कारण गंगा का पानी सीधे गांव में पहुंचता है। नगला हंसी से आगे तक कोई बांध नहीं है। जलस्तर बढ़ते ही गांव की ओर पानी का फैलाव हाेने लगता है। संवाद
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अधिकारियों ने किया दौरा
पटियाली। हालात की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम आतिश कुमार सिंह, तहसीलदार रामनयन सिंह और नायब तहसीलदार मुकेश कुमार ने हिम्मतनगर बझेरा, पनसोती, रिकहरा, गठौरा, कादरगंज और मूंझखेड़ा का दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पानी के फैलाव का जायजा लिया और ग्रामीणों से संवाद किया। एसडीएम ने लोगों से अपील की है कि वे बढ़ते जलस्तर के बीच गंगा के किनारे न जाएं और कटान या खतरे की सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि आवश्यक प्रबंध किए जा सकें। संवाद
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बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 95586 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 125061 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 172721 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.50 मीटर के निशान पर
वर्जन-
- बैराजों से पानी का प्रवाह कम होने लगा है। अब जल्द ही जलस्तर में गिरावट होने लगेगी। जिले में सभी बांध सुरक्षित हैं। किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। सिंचाई विभाग लगातार निगरानी कर रहा है- संदीप जैन, एसडीओ, सिंचाई।
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रविवार को शनिवार के मुकाबले 1.72 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना हुआ था। इस आपदा ने खादर क्षेत्र के खेतों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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हालात इतने गंभीर हैं कि नगला दुर्जन में एक शवयात्रा को बाढ़ के पानी के बीच से होकर निकालना पड़ा। नगला खना निवासी बुधपाल का निधन होने पर ग्रामीणों ने बाढ़ के पानी के बीच से शवयात्रा को सुरक्षित निकाला।
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गंगा में हरिद्वार और बिजनौर के बाद नरौरा बैराज से भी पानी का प्रवाह लगातार बढ़ा हुआ था। हालांकि अब बैराजों से पानी डिस्चार्ज होने की रफ्तार में कुछ कमी आई है, लेकिन नरौरा से पटियाली तक पानी पहुंचने में 24 घंटे का समय लगता है, जिससे शनिवार रात से ही पटियाली के ग्रामीण इलाकों में पानी घुसने लगा। नगला खना, नगला दुर्जन, नगला दिपी, मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन और नगला नरपत जैसे गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
नदराैली निवासी लवकुमार, नगला दुर्जन के डॉ. उर्वेश कुमार और नगला नरपत के किशनपाल ने बताया कि बाढ़ का पानी गांवों के बीचों-बीच और खेतों तक आ गया है। इससे पशुओं के चारे और फसलों के भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है।
वहीं, कादरगंज निवासी असलम ने बताया कि कादरगंज के पास पश्चिम की ओर गंगा की तेज धारा से तटबंध में कटान होने की आशंका भी बनी हुई है। नगला नरपत और नगला जयकिशन के पास पक्का बांध न होने के कारण पानी सीधे गांवों में घुस रहा है, जिससे ग्रामीण लंबे समय से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।
बांध न होने से ग्रामीण चिंतित
गंजडुंडवारा। गंगा में बाढ़ की स्थिति बन जाने के बाद से नगला नरपत, नगला जयकिशन सहित आस पास के गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीण काफी समय से बांध बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस वर्ष भी बांध नहीं बन पाया है। बांध न होने के कारण गंगा का पानी सीधे गांव में पहुंचता है। नगला हंसी से आगे तक कोई बांध नहीं है। जलस्तर बढ़ते ही गांव की ओर पानी का फैलाव हाेने लगता है। संवाद
अधिकारियों ने किया दौरा
पटियाली। हालात की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम आतिश कुमार सिंह, तहसीलदार रामनयन सिंह और नायब तहसीलदार मुकेश कुमार ने हिम्मतनगर बझेरा, पनसोती, रिकहरा, गठौरा, कादरगंज और मूंझखेड़ा का दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पानी के फैलाव का जायजा लिया और ग्रामीणों से संवाद किया। एसडीएम ने लोगों से अपील की है कि वे बढ़ते जलस्तर के बीच गंगा के किनारे न जाएं और कटान या खतरे की सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि आवश्यक प्रबंध किए जा सकें। संवाद
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 95586 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 125061 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 172721 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.50 मीटर के निशान पर
वर्जन-
- बैराजों से पानी का प्रवाह कम होने लगा है। अब जल्द ही जलस्तर में गिरावट होने लगेगी। जिले में सभी बांध सुरक्षित हैं। किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। सिंचाई विभाग लगातार निगरानी कर रहा है- संदीप जैन, एसडीओ, सिंचाई।

फोटो 32- कादरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी। स्रोत संवाद- फोटो : सांकेतिक

फोटो 32- कादरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी। स्रोत संवाद- फोटो : सांकेतिक

फोटो 32- कादरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी। स्रोत संवाद- फोटो : सांकेतिक

फोटो 32- कादरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी। स्रोत संवाद- फोटो : सांकेतिक