{"_id":"6a6f86a14ba052de44015e42","slug":"vankhandeshwar-mahadev-temple-where-bholenath-was-brought-back-after-bail-was-posted-kasganj-news-c-175-1-kas1003-151615-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kasganj News: वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, जहां जमानत देकर वापस लाए गए थे भोलेनाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kasganj News: वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, जहां जमानत देकर वापस लाए गए थे भोलेनाथ
विज्ञापन
फोटो42सोरोंजी के पंचकोसी परिक्रमा मार्ग में स्थित भागीरथ गुफा के सामने स्थित वनखण्डेश्वर महाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोरोंजी। तीर्थनगरी के कण-कण में अगाध आस्था और श्रद्धा का वास है, जहां पग-पग पर प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। इसी पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर भागीरथी गुफा में एक ऐसा अनूठा और प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जिसके इतिहास से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है जो शायद ही कहीं और सुनने को मिले। इस मंदिर के आराध्य भगवान शिव खुद भक्तों की जमानत पर थाने और कोर्ट से रिहा होकर लौटे थे।
मंदिर के पुजारी श्यामपुरी के अनुसार, यह सदियों पुराना वनखंडेश्वर महादेव मंदिर राजा भगीरथ के काल का माना जाता है। करीब पांच फीट ऊंचे इस भव्य शिवलिंग पर एक अद्भुत चेहरे की आकृति अंकित है। करीब 53 साल पहले, 26 फरवरी 1973 को चोर इस दुर्लभ शिवलिंग को चुराकर अलीगढ़ ले गए थे। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने सोरोंजी कोतवाली में चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई।
किवदंतियों के अनुसार, चोर इस शिवलिंग की अलौकिक महिमा से अनजान थे। लेकिन कुछ ही समय बाद भोलेनाथ का प्रकोप चोरों पर बरसने लगा। एक-एक करके सभी चोर संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ गए। कई चोरों की अकाल मृत्यु हो गई, जिससे बाकी बचे चोरों में खौफ पैदा हो गया। डर के मारे उन्होंने शिवलिंग को अलीगढ़ के पाली थाने की पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
पुलिस ने थाने में ही स्थापित किया शिवलिंग
अलीगढ़ पुलिस ने 22 मई 1993 को पाली मुकीमपुर थाने में चोरों के खिलाफ अपराध संख्या 59/1993 दर्ज की और शिवलिंग को थाने में ही स्थापित कर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी। वर्षों बाद, सोरोंजी के फरीदपुर गांव तक यह खबर पहुंची कि चोरी हुआ उनका वही पावन शिवलिंग पाली थाने में सुरक्षित है। जब ग्रामीण उसे लेने पहुंचे, तो पुलिस ने कानूनी कागजात के अभाव में शिवलिंग सौंपने से इनकार कर दिया।
ग्राम प्रधान विजय कुमार वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों ने अपने अधिकार के लिए अलीगढ़ की दीवानी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लगभग 6 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और भगवान भोलेनाथ की कृपा से आखिरकार कोर्ट ने ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आठ लाख की जमानत पर हुई वापसी
कोर्ट ने शिवलिंग को सुपुर्द करने के एवज में आठ लाख रुपये की जमानत राशि तय की। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए होडलपुर गांव के सुभाष चंद्र शर्मा, फरीदपुर के पुजारी श्यामपुरी, उमराव बघेल और वासुदेव ने आपसी चंदा इकट्ठा कर कोर्ट में जमानत राशि जमा की। इसके बाद विधि-विधान से वनखंडेश्वर महादेव की उनके धाम में पुन: प्रतिष्ठा की गई। वर्तमान में सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक वापसी में अहम भूमिका निभाने वाले उमराव बघेल और वासुदेव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यह निष्ठा आज भी अमर है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
वर्जन
कोर्ट में काफी भागदौड़ करने के बाद हमें वन खंडेश्वर महादेव शिवलिंग वापस मिली। गांव वालों के सहयोग और महादेव की कृपा से यह सब संभव हो पाया। -सुभाष चंद्र शर्मा, होडलपुर, जमानतदार
शिवलिंग चोरी का मामला सोरोंजी कोतवाली और पाली थाने में दर्ज हुआ था। गांव वालों ने शिवलिंग पर अपना अधिकार जताया और अलीगढ़ दीवानी कोर्ट में दावा कर दिया। 6 साल तक मामला चलने के बाद जमानत पर शिवलिंग वापस मिल सकी। -विजय कुमार वर्मा, ग्राम प्रधान
विज्ञापन
मंदिर के पुजारी श्यामपुरी के अनुसार, यह सदियों पुराना वनखंडेश्वर महादेव मंदिर राजा भगीरथ के काल का माना जाता है। करीब पांच फीट ऊंचे इस भव्य शिवलिंग पर एक अद्भुत चेहरे की आकृति अंकित है। करीब 53 साल पहले, 26 फरवरी 1973 को चोर इस दुर्लभ शिवलिंग को चुराकर अलीगढ़ ले गए थे। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने सोरोंजी कोतवाली में चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई।
विज्ञापन
किवदंतियों के अनुसार, चोर इस शिवलिंग की अलौकिक महिमा से अनजान थे। लेकिन कुछ ही समय बाद भोलेनाथ का प्रकोप चोरों पर बरसने लगा। एक-एक करके सभी चोर संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ गए। कई चोरों की अकाल मृत्यु हो गई, जिससे बाकी बचे चोरों में खौफ पैदा हो गया। डर के मारे उन्होंने शिवलिंग को अलीगढ़ के पाली थाने की पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
विज्ञापन
पुलिस ने थाने में ही स्थापित किया शिवलिंग
अलीगढ़ पुलिस ने 22 मई 1993 को पाली मुकीमपुर थाने में चोरों के खिलाफ अपराध संख्या 59/1993 दर्ज की और शिवलिंग को थाने में ही स्थापित कर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी। वर्षों बाद, सोरोंजी के फरीदपुर गांव तक यह खबर पहुंची कि चोरी हुआ उनका वही पावन शिवलिंग पाली थाने में सुरक्षित है। जब ग्रामीण उसे लेने पहुंचे, तो पुलिस ने कानूनी कागजात के अभाव में शिवलिंग सौंपने से इनकार कर दिया।
ग्राम प्रधान विजय कुमार वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों ने अपने अधिकार के लिए अलीगढ़ की दीवानी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लगभग 6 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और भगवान भोलेनाथ की कृपा से आखिरकार कोर्ट ने ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया।
आठ लाख की जमानत पर हुई वापसी
कोर्ट ने शिवलिंग को सुपुर्द करने के एवज में आठ लाख रुपये की जमानत राशि तय की। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए होडलपुर गांव के सुभाष चंद्र शर्मा, फरीदपुर के पुजारी श्यामपुरी, उमराव बघेल और वासुदेव ने आपसी चंदा इकट्ठा कर कोर्ट में जमानत राशि जमा की। इसके बाद विधि-विधान से वनखंडेश्वर महादेव की उनके धाम में पुन: प्रतिष्ठा की गई। वर्तमान में सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक वापसी में अहम भूमिका निभाने वाले उमराव बघेल और वासुदेव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यह निष्ठा आज भी अमर है।
वर्जन
कोर्ट में काफी भागदौड़ करने के बाद हमें वन खंडेश्वर महादेव शिवलिंग वापस मिली। गांव वालों के सहयोग और महादेव की कृपा से यह सब संभव हो पाया। -सुभाष चंद्र शर्मा, होडलपुर, जमानतदार
शिवलिंग चोरी का मामला सोरोंजी कोतवाली और पाली थाने में दर्ज हुआ था। गांव वालों ने शिवलिंग पर अपना अधिकार जताया और अलीगढ़ दीवानी कोर्ट में दावा कर दिया। 6 साल तक मामला चलने के बाद जमानत पर शिवलिंग वापस मिल सकी। -विजय कुमार वर्मा, ग्राम प्रधान