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Kasganj News: वृद्धाश्रम में रह रहे पिता का शव लेने से बेटे ने किया इंकार
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फोटो15एटा में कासगंज के वृद्ध का दाह संस्कार करते संस्कार मानव सेवा समिति सदस्य। स्रोत:संस्था
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कासगंज। क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर अपनों ने साथ छोड़ दिया, वहीं समाजसेवियों ने आगे बढ़कर इंसानियत की मिसाल पेश की। वृद्धाश्रम में रह रहे एक बुजुर्ग के निधन के बाद उनके बेटों ने शव लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद एक सेवा समिति ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली।
मोहल्ला भूतेश्वर कॉलोनी बिलराम गेट निवासी चंद्रप्रकाश सक्सेना (70) 30 मार्च 2026 को अपनी पत्नी धनदेवी के साथ वृद्धाश्रम में रहने आए थे। मंगलवार रात उनका निधन हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वृद्धाश्रम प्रशासन ने उनके बेटे विजय कुमार, निवासी कांशीराम कॉलोनी व उसके भाई को सूचना दी। हालांकि, दोनों बेटों ने पिता का शव लेने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद वृद्धाश्रम की वार्डन योग्यता ने संस्कार मानव सेवा समिति एटा को सूचना दी। सूचना मिलते ही समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे। बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को अपने सुपुर्द लेकर पूरे सम्मान के साथ मोक्षधाम, माल गोदाम रोड, एटा में हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
यह घटना एक ओर जहां पारिवारिक रिश्तों के बदलते स्वरूप को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर समाज में जिंदा इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मजबूत मिसाल भी पेश करती है।
वार्डन ने बताया कि सूचना दोनों भाइयों को दी गई, लेकिन दोनों भाइयों ने आने से मना कर दिया। इसके बाद पत्नी की सहमति पर समिति के माध्यम से उनका अंतिम संस्कार करा दिया।
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मोहल्ला भूतेश्वर कॉलोनी बिलराम गेट निवासी चंद्रप्रकाश सक्सेना (70) 30 मार्च 2026 को अपनी पत्नी धनदेवी के साथ वृद्धाश्रम में रहने आए थे। मंगलवार रात उनका निधन हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वृद्धाश्रम प्रशासन ने उनके बेटे विजय कुमार, निवासी कांशीराम कॉलोनी व उसके भाई को सूचना दी। हालांकि, दोनों बेटों ने पिता का शव लेने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद वृद्धाश्रम की वार्डन योग्यता ने संस्कार मानव सेवा समिति एटा को सूचना दी। सूचना मिलते ही समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे। बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को अपने सुपुर्द लेकर पूरे सम्मान के साथ मोक्षधाम, माल गोदाम रोड, एटा में हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
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यह घटना एक ओर जहां पारिवारिक रिश्तों के बदलते स्वरूप को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर समाज में जिंदा इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मजबूत मिसाल भी पेश करती है।
वार्डन ने बताया कि सूचना दोनों भाइयों को दी गई, लेकिन दोनों भाइयों ने आने से मना कर दिया। इसके बाद पत्नी की सहमति पर समिति के माध्यम से उनका अंतिम संस्कार करा दिया।
