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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kasganj News ›   Sewage treatment plants to be built soon in the district; 7 million liters of wastewater to be treated daily.

Kasganj News: जिले में जल्द बनेंगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, रोजाना साफ होगा 70 लाख लीटर गंदा पानी

Thu, 06 Aug 2026 11:53 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:53 PM IST
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कासगंज। जिले के शहरी इलाकों में पर्यावरण सुधार और जल प्रदूषण पर लगाम लगाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। गंजडुंडवारा और सोरोंजी नगर निकायों में जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जिनके जरिए प्रतिदिन कुल 70 लाख लीटर गंदे पानी का वैज्ञानिक पद्धति से शोधन किया जाएगा। इन दोनों ही इलाकों में प्लांट के निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, और अब विभाग ने इसके निर्माण के लिए औपचारिक प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार करना शुरू कर दिया है।
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गंदे पानी से मिलेगी निजात, घटेगा बीमारियों का खतरा
वर्तमान स्थिति यह है कि इन दोनों निकायों से निकलने वाला घरेलू और व्यावसायिक अपशिष्ट जल बिना किसी उपचार के सीधे नालों में बह जाता है, जिससे आसपास के पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, गंजडुंडवारा की आबादी 45 हजार से अधिक है, जबकि सोरोंजी नगर पालिका क्षेत्र की आबादी 27 हजार से ज्यादा है। इन दोनों बड़े क्षेत्रों की आबादी को ध्यान में रखते हुए गंजडुंडवारा में प्रतिदिन 45 लाख लीटर और सोरोंजी में 25 लाख लीटर गंदे पानी को साफ करने की क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे हैं। इस परियोजना से गंदे पानी के कारण फैलने वाली दुर्गंध, गंदगी और जलजनित बीमारियों के खतरे से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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आधुनिक तकनीक से होगी पानी की सफाई
प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में आधुनिक और जैविक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत गंदे पानी से सबसे पहले ठोस अपशिष्ट, रेत और अन्य हानिकारक तत्वों को अलग किया जाएगा। इस पूरी शोधन प्रक्रिया से पानी में मौजूद प्रदूषण के प्रमुख मानक जैसे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) का स्तर काफी हद तक कम हो जाएगा। सबसे खास बात यह होगी कि इस प्रकार शोधित किए गए पानी का उपयोग बेकार जाने के बजाय उद्यानों की सिंचाई, बागवानी और कृषि कार्यों में किया जा सकेगा, जिससे भूजल और स्वच्छ पानी की भारी बचत होगी।

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पर्यावरण संरक्षण और जलीय जीवों को जीवनदान
एसटीपी के सफल संचालन से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिना उपचारित सीवेज को सीधे नदियों, तालाबों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में जाने से पूरी तरह रोका जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और जलीय जीवों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।
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वर्जन
अपर जिलाधिकारी दिग्विजय सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि दोनों निकायों में एसटीपी के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है। अब इसके निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। शासन से हरी झंडी मिलते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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