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Kasganj News: डिजिटल दाैड़ में पीछे छूटी नींद, बढ़ा स्लीप डिसऑर्डर का खतरा

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:55 PM IST
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कासगंज। बदलती जीवनशैली और डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण स्लीप डिसऑर्डर यानी नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लू लाइट, मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या ने लोगों की नींद को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव सक्सेना के अनुसार, अच्छी नींद न केवल शारीरिक ऊर्जा को वापस प्राप्त करती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाती है। नींद के दौरान शरीर की कोशिकाएं खुद को दुरुस्त करती हैं और दिमाग दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है।
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आठ घंटे की नींद जरूरी
सीएमएस ने यह भी बताया कि एक स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना लगभग आठ घंटे की नींद जरूरी है। इससे न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि व्यक्ति दिनभर ताजगी महसूस करता है। जिला अस्पताल में हर महीने करीब 15 से 20 मरीज इस समस्या के इलाज के लिए आते हैं, जिनमें अधिकतर 25 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के लोग होते हैं।
स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को बिस्तर पर जाने के आधे घंटे बाद भी नींद नहीं आती, या रात में बार-बार नींद टूटती है, तो यह स्लीप डिसऑर्डर के संकेत हो सकते हैं। सुबह उठने के बाद थकान का महसूस होना, दिनभर चिड़चिड़ापन, काम में एकाग्रता की कमी, और सोते समय तेज खर्राटे लेना भी इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं।
आजकल नींद में खलल डालने के सबसे बड़े कारणों में से एक मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मस्तिष्क को दिन होने का संकेत देती है, जिससे नींद लाने वाला मेलाटोनिन हार्मोन कम हो जाता है। इसके अलावा, देर रात तक काम करना, अधिक कैफीन का सेवन और मानसिक तनाव भी नींद पर बुरा असर डाल रहे हैं।
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अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें

-अच्छी नींद के लिए नियमित समय पर सोने और जागने की आदत डालें
-सोने से पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें

-रात के समय हल्का भोजन लें
-नियमित व्यायाम को अपनी आदत बनाएं

-सोते समय शांत वातावरण रखें
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हो सकता है इन बीमारियों का खतरा
हृदय रोग- ब्लड प्रेशर बढ़ने और दिल के दौरे का खतरा
मानसिक समस्याएं- अवसाद और बैचेनी
मोटापा- मेटाबॉलिज्म धीमा होने से तेजी से वजन बढ़ना
मधुमेह- शरीर में शुगर लेवल का असंतुलन
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