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Kasganj News: इलाज बना मुश्किल, जांच के बाद दर-दर भटक रहे मरीज
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कासगंज। हीमोफीलिया मरीजों के इलाज की व्यवस्था जिले में बड़ी चुनाैती बनी हुई है। खून जमने की इस गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को जांच तो मिल रही है, लेकिन उचित इलाज के अभाव में उन्हें आगरा, अलीगढ़ और लखनऊ तक भटकना पड़ रहा है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो रही है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी कमी हीमोफीलिया मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। रक्तस्राव से जुड़ी इस गंभीर बीमारी में तत्काल इलाज बेहद जरूरी होता है, लेकिन जिला अस्पताल में इसके लिए जरूरी फैक्टर उपलब्ध नहीं है। नतीजतन मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रोग है, जिसमें शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। ऐसे में मामूली चोट या अंदरूनी रक्तस्राव भी गंभीर रूप ले सकता है। कई बार शरीर के अंदर ही ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर घातक होती है।
जिला अस्पताल में जांच की सुविधा होने के बावजूद इलाज की व्यवस्था न होना मरीजों और उनके परिजन के लिए परेशानी का कारण है। डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने एक-दो नए मरीज सामने आ रहे हैं। जोकि समस्या के धीरे-धीरे बढ़ने का संकेत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हीमोफीलिया मरीजों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। छोटी-सी चोट, इंजेक्शन या सर्जरी के बाद भी खून का बहाव रुकना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में समय पर सही इलाज ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
बीमारी के कारण:
हीमोफीलिया जीन में म्यूटेशन के कारण होता है। लगभग एक-तिहाई मामलों में यह बीमारी माता-पिता से विरासत में मिलती है, जबकि शेष मामलों में यह परिवर्तन स्वतः हो जाता है। इसलिए जिन परिवारों में पहले इसका इतिहास नहीं रहा, वहां भी यह बीमारी देखने को मिल सकती है।
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हीमोफीलिया के प्रमुख लक्षण
-मुंह या मसूड़ों से खून आना
-इंजेक्शन या वैक्सीनेशन के बाद खून बहना
-जोड़ों में सूजन और दर्द (ब्लीडिंग के कारण)
-बार-बार नाक से खून आना
-नवजात में सिर से खून दिखाई देना
-उल्टी, मल या पेशाब में खून दिखना
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वर्जन
अस्पताल में हीमोफीलिया की जांच की व्यवस्था है। पुष्टि होने पर मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर किया जाता है, जहां आवश्यक फैक्टर चढ़ाया जा सके।- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी कमी हीमोफीलिया मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। रक्तस्राव से जुड़ी इस गंभीर बीमारी में तत्काल इलाज बेहद जरूरी होता है, लेकिन जिला अस्पताल में इसके लिए जरूरी फैक्टर उपलब्ध नहीं है। नतीजतन मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
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हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रोग है, जिसमें शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। ऐसे में मामूली चोट या अंदरूनी रक्तस्राव भी गंभीर रूप ले सकता है। कई बार शरीर के अंदर ही ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर घातक होती है।
जिला अस्पताल में जांच की सुविधा होने के बावजूद इलाज की व्यवस्था न होना मरीजों और उनके परिजन के लिए परेशानी का कारण है। डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने एक-दो नए मरीज सामने आ रहे हैं। जोकि समस्या के धीरे-धीरे बढ़ने का संकेत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हीमोफीलिया मरीजों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। छोटी-सी चोट, इंजेक्शन या सर्जरी के बाद भी खून का बहाव रुकना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में समय पर सही इलाज ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
बीमारी के कारण:
हीमोफीलिया जीन में म्यूटेशन के कारण होता है। लगभग एक-तिहाई मामलों में यह बीमारी माता-पिता से विरासत में मिलती है, जबकि शेष मामलों में यह परिवर्तन स्वतः हो जाता है। इसलिए जिन परिवारों में पहले इसका इतिहास नहीं रहा, वहां भी यह बीमारी देखने को मिल सकती है।
हीमोफीलिया के प्रमुख लक्षण
-मुंह या मसूड़ों से खून आना
-इंजेक्शन या वैक्सीनेशन के बाद खून बहना
-जोड़ों में सूजन और दर्द (ब्लीडिंग के कारण)
-बार-बार नाक से खून आना
-नवजात में सिर से खून दिखाई देना
-उल्टी, मल या पेशाब में खून दिखना
वर्जन
अस्पताल में हीमोफीलिया की जांच की व्यवस्था है। पुष्टि होने पर मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर किया जाता है, जहां आवश्यक फैक्टर चढ़ाया जा सके।- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
