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नवरात्र : कड़ा धाम की शक्तिपीठ पर वर्जित है बलि
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 19 Mar 2026 01:27 AM IST
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माता शीतला की मूर्ति। संवाद
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आस्था, परंपरा और विशिष्ट मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध कड़ा धाम स्थित शीतला माता मंदिर में आज से नवरात्र में खास धार्मिक विधि-विधान और अनुशासन के साथ पूजा-अर्चना शुरू होगी। यहां न तो किसी प्रकार की बलि दी जाती है और न ही नारियल फोड़ने की अनुमति है।
मंदिर के मुख्य पुजारी टिंकू पंडा ने बताया कि धाम में शीतला माता वैष्णवी स्वरूप में विराजमान हैं। यहां भेड़-बकरे की बलि नहीं दी जाती बल्कि उसे वहीं जीवित छोड़ दिया जाता है। नारियल फोड़ना और नींबू काटना भी एक प्रकार की बलि मानी जाती है। इसलिए यह वर्जित है। खड़ा नारियल और पूरा नींबू ही चढ़ाया जाता है। यही परंपराएं इस धाम को आस्था का एक अलग और पवित्र स्वरूप प्रदान करती हैं।
उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन भोर चार बजे गंगा स्नान के साथ आरती शुरू होगी। इसके बाद मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ होगा। सुबह 6:15 बजे से 7:15 बजे के बीच कलश स्थापना की जाएगी, जिसमें गंगाजल से भरे घड़े में गंगा की बालू और खेतों की मिट्टी मिलाकर जौ डाले जाते हैं।
पूजन के दौरान माता को लाल चुनरी और फूल अर्पित किए जाएंगे और हलवा-पूरी का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 11 बजे से 12:30 बजे तक भोग आरती होगी, इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। रात 9 बजे फिर से आरती के साथ दिनभर के अनुष्ठान पूरे होंगे।
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मंदिर के मुख्य पुजारी टिंकू पंडा ने बताया कि धाम में शीतला माता वैष्णवी स्वरूप में विराजमान हैं। यहां भेड़-बकरे की बलि नहीं दी जाती बल्कि उसे वहीं जीवित छोड़ दिया जाता है। नारियल फोड़ना और नींबू काटना भी एक प्रकार की बलि मानी जाती है। इसलिए यह वर्जित है। खड़ा नारियल और पूरा नींबू ही चढ़ाया जाता है। यही परंपराएं इस धाम को आस्था का एक अलग और पवित्र स्वरूप प्रदान करती हैं।
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उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन भोर चार बजे गंगा स्नान के साथ आरती शुरू होगी। इसके बाद मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ होगा। सुबह 6:15 बजे से 7:15 बजे के बीच कलश स्थापना की जाएगी, जिसमें गंगाजल से भरे घड़े में गंगा की बालू और खेतों की मिट्टी मिलाकर जौ डाले जाते हैं।
पूजन के दौरान माता को लाल चुनरी और फूल अर्पित किए जाएंगे और हलवा-पूरी का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 11 बजे से 12:30 बजे तक भोग आरती होगी, इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। रात 9 बजे फिर से आरती के साथ दिनभर के अनुष्ठान पूरे होंगे।

माता शीतला की मूर्ति। संवाद