{"_id":"69c03c9457633ff6eb09be00","slug":"the-king-of-vegetables-is-priceless-in-the-market-kaushambi-news-c-261-1-kmb1011-138500-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: सब्जी का राजा मंडी में बेभाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: सब्जी का राजा मंडी में बेभाव
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
विजय सिंह, किसान
विज्ञापन
सब्जियों का राजा कहे जाने वाले आलू को इन दिनों सब्जी मंडियों में भाव नहीं मिल रहा है। इससे किसान परेशान हैं। खेतों में अच्छी पैदावार के बावजूद मंडियों में आलू के भाव गिर गए हैं। हालात यह है कि किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे मुनाफा तो दूर लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीण इलाकों में खेतों में पड़ा आलू खरीदारों के इंतजार में है जबकि किसान अपनी मेहनत का उचित दाम पाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। जिले भर में लगभग सात हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। सबसे ज्यादा खेती सिराथू और चायल क्षेत्र में होती है।
प्रति बीघा हो रहा 10 हजार रुपये का घाटा
नेवादा ब्लॉक के हसनपुर गांव के किसान सतीश सिंह, बुद्धसेन सिंह, गोंदन सिंह आदि ने बताया कि एक बीघा आलू की खेती में औसतन 25 हजार रुपये लागत आती है। उत्पादन 70 से 80 बोरी प्रति बीघा हुई है। मंडी में 200 रुपये प्रति बोरी भी आलू नहीं बिक पा रही है। ऐसे में एक बीघा में करीब नौ से 10 हजार रुपये घाटा हो रहा है। सुरसेनी गांव के किसान राजकुमार शुक्ल ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में भी आलू भंडारण करने का करीब 300 रुपये प्रति बोरी खर्च आ रहा है।
पांच बीघे के रकबे में आलू की खेती करवाया था, तकरीबन डेढ़ लाख की लागत आई। कुल पैदावार 400 बोरी के करीब हुई है। वर्तमान में जो आलू का जो भाव है उसमें मुनाफा तो दूर लागत में भी करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। - विजय सिंह, किसान, हसनपुर
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का जो दावा करती है वह सिर्फ हवा हवाई है। वर्तमान में आलू का जिस तरह से बाजार में भाव है उससे खेती करने वालों की हालत खराब है। सरकार को आलू की एमएसपी भी तय करनी चाहिए है। -जसवंत सिंह, किसान, हसनपुर
Trending Videos
ग्रामीण इलाकों में खेतों में पड़ा आलू खरीदारों के इंतजार में है जबकि किसान अपनी मेहनत का उचित दाम पाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। जिले भर में लगभग सात हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। सबसे ज्यादा खेती सिराथू और चायल क्षेत्र में होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रति बीघा हो रहा 10 हजार रुपये का घाटा
नेवादा ब्लॉक के हसनपुर गांव के किसान सतीश सिंह, बुद्धसेन सिंह, गोंदन सिंह आदि ने बताया कि एक बीघा आलू की खेती में औसतन 25 हजार रुपये लागत आती है। उत्पादन 70 से 80 बोरी प्रति बीघा हुई है। मंडी में 200 रुपये प्रति बोरी भी आलू नहीं बिक पा रही है। ऐसे में एक बीघा में करीब नौ से 10 हजार रुपये घाटा हो रहा है। सुरसेनी गांव के किसान राजकुमार शुक्ल ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में भी आलू भंडारण करने का करीब 300 रुपये प्रति बोरी खर्च आ रहा है।
पांच बीघे के रकबे में आलू की खेती करवाया था, तकरीबन डेढ़ लाख की लागत आई। कुल पैदावार 400 बोरी के करीब हुई है। वर्तमान में जो आलू का जो भाव है उसमें मुनाफा तो दूर लागत में भी करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। - विजय सिंह, किसान, हसनपुर
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का जो दावा करती है वह सिर्फ हवा हवाई है। वर्तमान में आलू का जिस तरह से बाजार में भाव है उससे खेती करने वालों की हालत खराब है। सरकार को आलू की एमएसपी भी तय करनी चाहिए है। -जसवंत सिंह, किसान, हसनपुर

विजय सिंह, किसान

विजय सिंह, किसान