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Kaushambi News: जब शरीर ने दिया जवाब, तब वृद्धाश्रम बना सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:33 AM IST
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जीवन के करीब 70 वर्ष एक-दूसरे का साथ निभाने वाले एक वृद्ध दंपति के लिए बुढ़ापा अभिशाप बन गया। जीवन भर मेहनत-मजदूरी कर दोनों ने जैसे-तैसे अपना घर-संसार बसाए रखा। लेकिन, भरोसे और बहकावे ने उनसे सब कुछ छीन लिया।
सरसवां ब्लॉक के अमरूपुर गांव निवासी 70 वर्षीय रामदीन और उनकी पत्नी पितनी के पास कभी गुजर-बसर के लिए करीब तीन बीघा खेती थी। घर-द्वार भी था। संतान नहीं होने के कारण गांव के लोगों पर उनका पूरा भरोसा था। शुरुआती दौर में ग्रामीण उनकी मदद भी करते रहे। दंपति भी गांवदारी निभाते रहे।
करीब दस वर्ष पहले गांव के कुछ लोगों ने बुजुर्ग दंपति को बुढ़ापे में सहारा देने का भरोसा दिलाकर उनसे खेत आदि खरीद लिए। समय बीतने के साथ हालात बदलते चले गए। कुछ माह पूर्व दोनों मंझनपुर तहसील क्षेत्र के जजौली गांव के पास आकर रहने लगे। इसकी जानकारी जब ग्राम प्रधान कृपाशंकर त्रिपाठी को हुई तो उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधक आलोक राय को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद आलोक राय गांव पहुंचे। दोनों बुजुर्गों को अपने साथ वृद्धाश्रम ले आए। अब वृद्धाश्रम ही उनका स्थायी ठिकाना बन गया है।
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करीब दस वर्ष पहले गांव के कुछ लोगों ने बुजुर्ग दंपति को बुढ़ापे में सहारा देने का भरोसा दिलाकर उनसे खेत आदि खरीद लिए। समय बीतने के साथ हालात बदलते चले गए। कुछ माह पूर्व दोनों मंझनपुर तहसील क्षेत्र के जजौली गांव के पास आकर रहने लगे। इसकी जानकारी जब ग्राम प्रधान कृपाशंकर त्रिपाठी को हुई तो उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधक आलोक राय को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद आलोक राय गांव पहुंचे। दोनों बुजुर्गों को अपने साथ वृद्धाश्रम ले आए। अब वृद्धाश्रम ही उनका स्थायी ठिकाना बन गया है।
