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Kaushambi News: छोटी उम्र, बड़ी लड़ाई, आरबीएसके से बच्चों को मिली नई जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:27 AM IST
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जिले में जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) नई उम्मीद बनकर सामने आया है। छोटी उम्र में गंभीर बीमारियों से लड़ रहे बच्चों को इस योजना के जरिए उपचार मिल रहा है, जिससे उन्हें नई जिंदगी मिल रही है।
जिले में अब तक 85 से अधिक बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, क्लब फुट और क्लेफ्ट लिप/क्लेफ्ट पैलेट जैसी बीमारियों की पहचान की गई है। इनमें से 54 बच्चों का सफल इलाज किया जा चुका है, जबकि 31 बच्चों का उपचार प्रक्रिया में चल रही है। इसके तहत आरबीएसके टीम स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों की नियमित जांच करती है और बच्चों को चिह्नित करती है।
जन्मजात रोगों से ग्रसित बच्चे की संख्या :
बीमारी चिह्नित उपचारित प्रक्रिया में
ह्रदय रोग 25 7 18
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट 3 2 1
क्लब-फुट 40 40 0
क्लेफ्ट लिप/पैलेट 17 5 12
कुल 85 54 31
केस- एक
:: मंझनपुर ब्लॉक के पवैया गांव निवासी स्व. मातादीन की 11 वर्षीय पुत्री रितु के दिल में छेद था। विद्यालय में लगे स्वास्थ्य शिविर के दौरान डॉ. अरुण और डॉ. अलीमा खातून की टीम ने उसकी पहचान की और उसे मेडिकल कॉलेज भेजा। जांच के बाद सीएमओ के निर्देश पर उसे अलीगढ़ रेफर किया गया। सितंबर 2025 में सफल ऑपरेशन के बाद अब रितु पूरी तरह स्वस्थ है।
केस- दो
:: सरसवां ब्लॉक के अजरौली निवासी राम नारायण सोनी के तीन वर्षीय पुत्र कुलदीप का जन्म से पैर टेढ़ा था। जून 2025 में आंगनबाड़ी केंद्र पर डॉ. सारिक शुभान व डॉ. मनोज ने उसकी पहचान कर मेडिकल कॉलेज भेजा। जांच के बाद दिसंबर में उसका ऑपरेशन किया गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से चलने लगा है।
केस- तीन
:: चायल ब्लॉक के फरीदपुर गांव निवासी दीपचंद्र के आठ वर्षीय पुत्र शुभम के दिल में छेद था। अप्रैल 2025 में गांव के प्राथमिक विद्यालय में डॉ. अमित सिंह की टीम ने उसकी पहचान कर मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां, उसे अलीगढ़ रेफर किया गया। जहां कुछ महीने पहले उसका सफल ऑपरेशन हुआ। अब शुभम की हालत में सुधार है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान कर उनका निशुल्क उपचार कराया जा रहा है। टीम नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच कर संदिग्ध बच्चों को चिह्नित करती है। गंभीर मामलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर इलाज कराया जाता है। - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
डॉक्टरों की सलाह:
- स्कूल या आंगनबाड़ी में आरबीएसके की ओर से लगने वाले शिविरों में बच्चों की जांच कराएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी तरह की दवा न दें और उपचार में लापरवाही न बरतें।
- संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण बच्चों को बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
- नवजात और छोटे बच्चों की समय से जांच कराएं, ताकि बीमारी की समय से पहचान हो सके।
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जन्मजात रोगों से ग्रसित बच्चे की संख्या :
बीमारी चिह्नित उपचारित प्रक्रिया में
ह्रदय रोग 25 7 18
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट 3 2 1
क्लब-फुट 40 40 0
क्लेफ्ट लिप/पैलेट 17 5 12
कुल 85 54 31
केस- एक
:: मंझनपुर ब्लॉक के पवैया गांव निवासी स्व. मातादीन की 11 वर्षीय पुत्री रितु के दिल में छेद था। विद्यालय में लगे स्वास्थ्य शिविर के दौरान डॉ. अरुण और डॉ. अलीमा खातून की टीम ने उसकी पहचान की और उसे मेडिकल कॉलेज भेजा। जांच के बाद सीएमओ के निर्देश पर उसे अलीगढ़ रेफर किया गया। सितंबर 2025 में सफल ऑपरेशन के बाद अब रितु पूरी तरह स्वस्थ है।
केस- दो
:: सरसवां ब्लॉक के अजरौली निवासी राम नारायण सोनी के तीन वर्षीय पुत्र कुलदीप का जन्म से पैर टेढ़ा था। जून 2025 में आंगनबाड़ी केंद्र पर डॉ. सारिक शुभान व डॉ. मनोज ने उसकी पहचान कर मेडिकल कॉलेज भेजा। जांच के बाद दिसंबर में उसका ऑपरेशन किया गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से चलने लगा है।
केस- तीन
:: चायल ब्लॉक के फरीदपुर गांव निवासी दीपचंद्र के आठ वर्षीय पुत्र शुभम के दिल में छेद था। अप्रैल 2025 में गांव के प्राथमिक विद्यालय में डॉ. अमित सिंह की टीम ने उसकी पहचान कर मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां, उसे अलीगढ़ रेफर किया गया। जहां कुछ महीने पहले उसका सफल ऑपरेशन हुआ। अब शुभम की हालत में सुधार है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान कर उनका निशुल्क उपचार कराया जा रहा है। टीम नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच कर संदिग्ध बच्चों को चिह्नित करती है। गंभीर मामलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर इलाज कराया जाता है। - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
डॉक्टरों की सलाह:
- स्कूल या आंगनबाड़ी में आरबीएसके की ओर से लगने वाले शिविरों में बच्चों की जांच कराएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी तरह की दवा न दें और उपचार में लापरवाही न बरतें।
- संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण बच्चों को बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
- नवजात और छोटे बच्चों की समय से जांच कराएं, ताकि बीमारी की समय से पहचान हो सके।