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UP: डीएम ने करवाई थी कार्रवाई, सरकारी आवास बना था क्लिनिक?...DM ने अब की कार्रवाई की संस्तुति

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Published by: Rohit Singh Updated Sun, 14 Jun 2026 01:11 PM IST
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सार

डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि इस तरह का प्रकरण अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह सरकारी सेवक आचरण नियमावली और चिकित्सा सेवा की मर्यादाओं के प्रतिकूल होगा। इसी को देखते हुए महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को विस्तृत विभागीय जांच कराकर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

Allegations were raised regarding the operation of a clinic from a government residence in Kushinagar.
डीएम महेंद्र सिंह तंवर, कार्रवाई के दौरान मौके पर प्रशासन-पुलिस की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्साधिकारी के सरकारी आवास से भारी मात्रा में दवाएं बरामद होने के मामले में कार्रवाई की संस्तुति की गई है। डीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। ड्रग इंस्पेक्टर ने अलग से विधिक कार्रवाई शुरू की है।



जनता दर्शन में डीएम को मिली शिकायत के बाद संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. दीन मोहम्मद पर गाज गिर गई है। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि शिकायत के परीक्षण के लिए एसडीएम पडरौना, सीओ पडरौना, औषधि निरीक्षक और प्रभारी सीएमएस संयुक्त जिला चिकित्सालय की संयुक्त टीम बनाई गई थी।

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टीम ने डॉ. दीन मोहम्मद के सरकारी आवास की जांच की। चिकित्साधिकारी के सरकारी आवास पर विभिन्न प्रकार की औषधियां मिलीं। टीम ने दवाओं के वैध अभिलेख या प्राधिकार पत्र मांगे तो डॉक्टर कोई कागज प्रस्तुत नहीं कर सके। औषधि निरीक्षक ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सभी दवाओं को अभिरक्षा में ले लिया है। इस मामले में पृथक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

डीएम ने बताया कि संयुक्त जांच आख्या में सामने आया कि एक मरीज के अभिभावक ने लिखित रूप से बताया कि संबंधित चिकित्सक सरकारी आवास पर ही उपचार करते थे। वहीं से दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती थीं। जांच टीम ने माना कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सरकारी आवास से निजी चिकित्सकीय गतिविधियां संचालित किए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

डीएम ने कहा कि इस तरह का प्रकरण अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह सरकारी सेवक आचरण नियमावली और चिकित्सा सेवा की मर्यादाओं के प्रतिकूल होगा। इसी को देखते हुए महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को विस्तृत विभागीय जांच कराकर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
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