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Kushinagar News: महात्मा बुद्ध की लेटी प्रतिमा की नींव तक पहुंच रही सीलन, क्षरण ने बढ़ाई चिंता
Fri, 24 Jul 2026 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 24 Jul 2026 02:09 AM IST
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कुशीनगर मुख्य मंदिर में लेटी बुद्ध प्रतिमा के दक्षिण तरफ फाउंडेशन में क्षरण।संवाद
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कुशीनगर। विश्व प्रसिद्ध महापरिनिर्वाण स्थली में महात्मा बुद्ध की लेटी प्रतिमा के फाउंडेशन में क्षरण हो रहा है। इसका कारण मुख्य मंदिर के तीन तरफ जलभराव से सीलन बताया जा रहा है। मुख्य मंदिर परिसर में उत्खनित पुरावशेषों में कई साल से बरसात में जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है। पानी भरने से नींव की दीवारों व ईंटों के माध्यम से सीलन पहुंच रही है।
जानकारों का कहना है कि अगर जलभराव की समस्या को दूर नहीं किया गया तो सीलन जल्द ही बुद्ध प्रतिमा को भी प्रभावित कर सकती है। वर्ष 2024 में सीलन व क्षरण की समस्या उजागर हुई थी, तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की विशेष टीम ने मंदिर का दौरा किया था। प्रतिमा के संरक्षण के लिए उस पर केमिकल का विशेष लेप लगाया गया था। टीम ने बताया था कि मुख्य प्रतिमा को बचाने के लिए जलनिकासी का इंतजाम जरूरी है।
उसके बाद जलभराव से निजात के लिए कागजों पर योजनाएं बनीं और जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम करने के दावे किए गए लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए ठोस इंतजाम नहीं किया जा सका। उत्खनित पुरावशेष पानी में डूबे हैं। ऐतिहासिक धरोहर की स्थिति को लेकर बौद्ध भिक्षुओं में भी चिंता है। बौद्ध भिक्षुओं ने भी धरोहरों के संरक्षण के लिए जलनिकासी के इंतजाम पर जोर दिया है।
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बौद्ध भिक्षु बोले
यह प्रतिमा केवल पत्थर व धातु की संरचना नहीं बल्कि लाखों बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। विशेषज्ञों ने केमिकल लेप लगाकर राहत तो दी थी लेकिन मुख्य समस्या जलभराव जस की तस है। अगर नींव ही कमजोर हो जाएगी व उसमें सीलन रहेगी, तो ऊपरी लेप काम नहीं आएगा। पुरातत्व विभाग और प्रशासन को ड्रेनेज की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। -भंते महेंद्र, कुशीनगर
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जलभराव की समस्या को लंबे समय से उठा रहे हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन और कागजी पहल होती है। सीलन जिस तेजी से ऊपर बढ़ रही है, उससे बुद्ध प्रतिमा के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचने का खतरा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे, तो आने वाले समय में क्षरण बढ़ता जाएगा। इसको लेकर बौद्ध भिक्षु भी चिंतित हैं। -भंते नंदरतन, कुशीनगर
कोट:-
उत्खनित पुरावशेषों को जलभराव से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की बात चल रही है, ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके। मौजूदा समय में उत्खनित पुरावशेषों से मोटर से पानी निकालने का काम किया जा रहा है ताकि डूबने से बचाया जा सके। -डाॅ. बीरी सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, सारनाथ मंडल
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वर्ष 2024 को हुआ था निरीक्षण
10 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् डाॅ. अविनाश मोहंती व उप अधीक्षण पुरातत्वविद् प्रकाश कुमार ने बुद्ध की लेटी प्रतिमा व उत्खनित पुरावशेषों का निरीक्षण किया था। इसके पहले एक अक्टूबर 2024 को पुरातत्व विभाग की ही केमिकल टीम ने भी दौरा कर जायजा लिया था। भौतिक व रासायनिक तरीकों से बचाव का भी परीक्षण किया था। बाद में प्रतिमा सहित फाउंडेशन आदि के संरक्षण के लिए कई दिनों तक लेप आदि चढ़ाया गया।
फाउंडेशन में जगह-जगह हो रहा क्षरण
पांचवीं शताब्दी की बुद्ध की लेटी प्रतिमा के फाउंडेशन में जगह-जगह क्षरण हो रहा है। इसके चलते प्रतिमा के दक्षिण फाउंडेशन की ईंटों के बीच खाली जगह व गड्ढे बन गए हैं। प्रतिमा के पूरब, पश्चिम व उत्तर तरफ भी क्षरण व एक व दो जगहों पर फाउंडेशन का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त है। अगर मरम्मत कर ठीक नहीं किया गया तो वह हिस्सा फाउंडेशन से खत्म हो जाएगा।
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जानकारों का कहना है कि अगर जलभराव की समस्या को दूर नहीं किया गया तो सीलन जल्द ही बुद्ध प्रतिमा को भी प्रभावित कर सकती है। वर्ष 2024 में सीलन व क्षरण की समस्या उजागर हुई थी, तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की विशेष टीम ने मंदिर का दौरा किया था। प्रतिमा के संरक्षण के लिए उस पर केमिकल का विशेष लेप लगाया गया था। टीम ने बताया था कि मुख्य प्रतिमा को बचाने के लिए जलनिकासी का इंतजाम जरूरी है।
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उसके बाद जलभराव से निजात के लिए कागजों पर योजनाएं बनीं और जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम करने के दावे किए गए लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए ठोस इंतजाम नहीं किया जा सका। उत्खनित पुरावशेष पानी में डूबे हैं। ऐतिहासिक धरोहर की स्थिति को लेकर बौद्ध भिक्षुओं में भी चिंता है। बौद्ध भिक्षुओं ने भी धरोहरों के संरक्षण के लिए जलनिकासी के इंतजाम पर जोर दिया है।
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बौद्ध भिक्षु बोले
यह प्रतिमा केवल पत्थर व धातु की संरचना नहीं बल्कि लाखों बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। विशेषज्ञों ने केमिकल लेप लगाकर राहत तो दी थी लेकिन मुख्य समस्या जलभराव जस की तस है। अगर नींव ही कमजोर हो जाएगी व उसमें सीलन रहेगी, तो ऊपरी लेप काम नहीं आएगा। पुरातत्व विभाग और प्रशासन को ड्रेनेज की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। -भंते महेंद्र, कुशीनगर
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जलभराव की समस्या को लंबे समय से उठा रहे हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन और कागजी पहल होती है। सीलन जिस तेजी से ऊपर बढ़ रही है, उससे बुद्ध प्रतिमा के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचने का खतरा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे, तो आने वाले समय में क्षरण बढ़ता जाएगा। इसको लेकर बौद्ध भिक्षु भी चिंतित हैं। -भंते नंदरतन, कुशीनगर
कोट:-
उत्खनित पुरावशेषों को जलभराव से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की बात चल रही है, ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके। मौजूदा समय में उत्खनित पुरावशेषों से मोटर से पानी निकालने का काम किया जा रहा है ताकि डूबने से बचाया जा सके। -डाॅ. बीरी सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, सारनाथ मंडल
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वर्ष 2024 को हुआ था निरीक्षण
10 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् डाॅ. अविनाश मोहंती व उप अधीक्षण पुरातत्वविद् प्रकाश कुमार ने बुद्ध की लेटी प्रतिमा व उत्खनित पुरावशेषों का निरीक्षण किया था। इसके पहले एक अक्टूबर 2024 को पुरातत्व विभाग की ही केमिकल टीम ने भी दौरा कर जायजा लिया था। भौतिक व रासायनिक तरीकों से बचाव का भी परीक्षण किया था। बाद में प्रतिमा सहित फाउंडेशन आदि के संरक्षण के लिए कई दिनों तक लेप आदि चढ़ाया गया।
फाउंडेशन में जगह-जगह हो रहा क्षरण
पांचवीं शताब्दी की बुद्ध की लेटी प्रतिमा के फाउंडेशन में जगह-जगह क्षरण हो रहा है। इसके चलते प्रतिमा के दक्षिण फाउंडेशन की ईंटों के बीच खाली जगह व गड्ढे बन गए हैं। प्रतिमा के पूरब, पश्चिम व उत्तर तरफ भी क्षरण व एक व दो जगहों पर फाउंडेशन का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त है। अगर मरम्मत कर ठीक नहीं किया गया तो वह हिस्सा फाउंडेशन से खत्म हो जाएगा।

कुशीनगर मुख्य मंदिर में लेटी बुद्ध प्रतिमा के दक्षिण तरफ फाउंडेशन में क्षरण।संवाद