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Kushinagar News: सील और नोटिस के पेच में फंसी स्वास्थ्य व्यवस्था, धंधेबाजों के हौंसले बुलंद

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 23 Mar 2026 01:49 AM IST
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Healthcare System Entangled in a Web of Sealing and Notices; Profiteers Run Amok
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पडरौना। जिले में अवैध निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की सील और नोटिस की कार्रवाई बेअसर साबित हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से धंधेबाजों के हौंसले बुलंद हैं। विभाग की कार्रवाई का असर केवल कुछ दिनों तक ही रहता है। उसके बाद फिर धंधेबाज विभाग में अपनी गहरी पैठ का लाभ लेकर बच निकलते हैं और नए नाम से अस्पताल का संचालन शुरू कर देते हैं। ताजा मामला खड्डा क्षेत्र के निजी अस्पताल का है, जिसमेंं मरीज की शनिवार को मौत हो गई थी।
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बिना पंजीकरण व मानकों की अनदेखी कर संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ विभाग की तरफ से कुछ दिन पहले बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया गया था। बिना पंजीकरण संचालित मिले 24 अस्पतालों को सील कर दिया गया था। मानक की अनदेखी में 74 अस्पताल संचालकों को नोटिस देकर सुधार करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी गई थी। इसके बावजूद खड्डा क्षेत्र में एक निजी अस्पताल संचालक की मनमानी सामने आई, जहां सील तोड़कर मरीज को भर्ती कर लिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। जिसे फिर से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया है। पूर्व में ऐसे कई मामले आ चुके हैं। सील तोड़कर धंधेबाज लोगों की जान से साथ खिलवाड़ करते रहे हैं।
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16 मार्च को पडरौना, कसया, तमकुहीराज, हाटा, खड्डा, रामकोला, कप्तानगंज, सुकरौली, फाजिलनगर में बिना पंजीकरण व मानक विहीन निजी अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा था। अधिकतर अस्पतालों के पास न तो प्रशिक्षित डॉक्टर मिले और न ही मानक के अनुरूप ओटी (ऑपरेशन थिएटर)। संचालकों काे सुधार करने व बिना पंजीकरण संचालित अस्पताल को सील किया गया था। विभाग की तरफ से कार्रवाई होते ही संचालक नोटिस आदि का जवाब देने की जगह दोबारा धंधा शुरू करने की जुगत में लग जाते हैं।
वर्जन::::
अवैध रूप से संचालित अस्पतालों को बख्शा नहीं जाएगा। अभियान चलाकर सील व नोटिस की कार्रवाई की गई है। यदि कोई संचालक नाम बदलकर या बिना सुधार किए अस्पताल का संचालन करते हुए मिला तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। -डाॅ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ, कुशीनगर
केस 1

8 साल में 7 बार सील हुआ खुशी हॉस्पिटल
खुशी हॉस्पिटल में 10 मार्च को बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के प्रसव कराया जा रहा था। ऑपरेशन के दौरान प्रसूता नीतू यादव की हालत बिगड़ी और सही समय पर विशेषज्ञ न होने के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। यह अस्पताल 2018 से अब तक 7 बार सील हो चुका है। छह बार सील होने के कुछ ही दिन बाद कागजी खानापूरी और सेटिंग के दम पर नया पंजीकरण कराकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया। 10 मार्च को इसे सातवीं बार सील किया गया है।
केस 2
रामकोला क्षेत्र के न्यू सारा सिटी हॉस्पिटल को ऐसे डॉक्टर की डिग्री के आधार पर चलाया जा रहा था, जो इस अस्पताल में आते ही नहीं। 16 मार्च को जांच में पता चला कि डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण तो था, लेकिन डॉक्टर कई महीनों से अस्पताल आए ही नहीं थे। अस्पताल का संचालन ओटी टेक्नीशियन और अकुशल कर्मचारी करते मिले थे। पंजीकरण केवल एक कागजी ढाल के रूप में इस्तेमाल हो रहा था।

केस 3:
बिना पंजीकरण हाटा में संचालित जेपी हॉस्पिटल में बिना डॉक्टर के ऑपरेशन करने का मामला 2 जनवरी 2026 को आया था। जांच में इस अस्पताल के पास न तो स्वास्थ्य विभाग का वैध पंजीकरण था और न ही कोई योग्य सर्जन। प्रसूता इंदु देवी का सिजेरियन ऑपरेशन अकुशल चिकित्सक ने किया था। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर अस्पताल का स्टाफ मरीज को बेड पर ही छोड़कर भाग गए थे।

केस 4:

तमकुहीराज क्षेत्र के लाइफ लाइन हॉस्पिटल में 15 मार्च 2026 की जांच में गंदगी मिली थी। यहां जांच में ओटी में संक्रमण रोकने का कोई इंतजाम नहीं था। साथ ही मरीजों को अस्पताल में तय मानक के तहत स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए कोई प्रबंध नहीं पाया गया। नोटिस देकर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। सुधार नहीं होने पर उसका पंंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा।
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