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Kushinagar News: नारायणी नदी कर रही कटान, काश्तकारों में बेचैनी
Wed, 12 Aug 2026 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 12 Aug 2026 02:44 AM IST
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बरवापट्टी। अमवाखास तटबंध और नारायणी नदी के बीच स्थित किसानों की जमीन का नदी लगातार कटान कर रही है। खेतों की जमीन नदी में समाने से काश्तकारों में बेचैनी बढ़ गई है। किसानों को चिंता है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो उनकी बची हुई जमीन और फसल भी नदी की धारा में समा जाएगी।
लक्ष्मीपुर निवासी काश्तकार मल्लू यादव ने बताया कि नारायणी नदी पहले ही उनकी काफी जमीन काटकर अपने आगोश में ले चुकी है। बची हुई जमीन में भी काफी पैसा खर्च कर धान की रोपाई की थी, लेकिन उसका आधा हिस्सा भी नदी के कटान की चपेट में आ गया है। उन्होंने कहा कि जमीन ही नहीं बचेगी तो परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, यही चिंता सताए जा रही है।
वहीं, परोरही निवासी रघुनाथ पटेल ने बताया कि उनके पास कुल दो एकड़ जमीन थी। इस जमीन पर लोगों से काफी मात्रा में कर्ज लेकर गन्ने और धान की फसल लगाई थी। पिछले दो दिनों से नारायणी नदी उनकी जमीन का लगातार कटान कर रही है। ऐसे में उन्हें डर है कि न जमीन बचेगी और न ही फसल।
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अभियंता एमके सिंह ने बताया कि ा जलस्तर कम होने पर बैक रोलिंग उत्पन्न होती है। इससे नदी की धारा ठोकरों से टकराने के बाद खाली जमीन की ओर दबाव बनाती है। कटान होती रहती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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लक्ष्मीपुर निवासी काश्तकार मल्लू यादव ने बताया कि नारायणी नदी पहले ही उनकी काफी जमीन काटकर अपने आगोश में ले चुकी है। बची हुई जमीन में भी काफी पैसा खर्च कर धान की रोपाई की थी, लेकिन उसका आधा हिस्सा भी नदी के कटान की चपेट में आ गया है। उन्होंने कहा कि जमीन ही नहीं बचेगी तो परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, यही चिंता सताए जा रही है।
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वहीं, परोरही निवासी रघुनाथ पटेल ने बताया कि उनके पास कुल दो एकड़ जमीन थी। इस जमीन पर लोगों से काफी मात्रा में कर्ज लेकर गन्ने और धान की फसल लगाई थी। पिछले दो दिनों से नारायणी नदी उनकी जमीन का लगातार कटान कर रही है। ऐसे में उन्हें डर है कि न जमीन बचेगी और न ही फसल।
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अभियंता एमके सिंह ने बताया कि ा जलस्तर कम होने पर बैक रोलिंग उत्पन्न होती है। इससे नदी की धारा ठोकरों से टकराने के बाद खाली जमीन की ओर दबाव बनाती है। कटान होती रहती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है।