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Lakhimpur Kheri News: बच्चों को पढ़ाने के साथ सामाजिक दायित्व भी निभा रहे शिक्षक
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गांव के बच्चों को निशुल्क कोचिंग पढ़ाती शिक्षिका गौरी कुमारी। स्रोत : स्वयं
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लखीमपुर खीरी। सरकारी स्कूलों में कार्यरत कई समर्पित शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रहकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सीमित संसाधनों में भी शिक्षा का स्तर सुधार रहे हैं। ये शिक्षक स्वयं की पहल पर कक्षाओं में फर्नीचर, पाठ्य सामग्री और सुरक्षित वातावरण जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का माहौल मिले। यह निस्वार्थ प्रयास, ज्ञान के प्रदाता के रूप में काम करते हुए सामुदायिक कल्याण में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। गणतंत्र दिवस से पहले कुछ ऐसे ही शिक्षकों से बातचीत के कुछ अंश...।
-- पेन-पेंसिल व कॉपी की करती हैं व्यवस्था--
कोरिया चमरू के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक गौरी कुमारी अपने कार्यों से विभाग में अच्छी छवि बना चुकी हैं। वे गांव में ही रहकर बच्चों को पढ़ाती हैं। उनका कहना है कि कई ऐसे परिजन हैं, जो गरीबी के कारण पढ़ाई-लिखाई का खर्च नहीं उठा पाते। उनके बच्चों के लिए कॉपी, पेन-पेंसिल की व्यवस्था वे खुद करती हैं। गांव में बेहतर शैक्षिक माहौल रहे, इसके लिए नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को इससे दूर करने के लिए भी वे जागरूक कर रही हैं। उन्होंने बाल विवाह रुकवाकर कई बच्चियों को बचाया।
-- -निष्प्रयोज्य फर्नीचर को खुद सुधरवाया-- -
प्राथमिक विद्यालय राजापुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात ऋतु अवस्थी भी इन कामों में कहीं से पीछे नहीं हैं। स्कूल की सूरत बदलने से लेकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर वे लगातार प्रयास कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने निष्प्रयोज्य पड़े फर्नीचर को खुद के खर्चे से सुधरवाया। अकेले इनकी मेहनत से स्कूल के बच्चे ओलंपियाड में शामिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि बच्चों के बौद्धिक स्तर को समझने के बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें अलग से कक्षाओं में पढ़ाया जा रहा है।
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-- -योग से कर रहीं निरोग-- --
कंपोजिट विद्यालय महराजनगर की इंचार्ज प्रधानाध्यापक आरती चोपड़ा बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही योगाभ्यास करा रही हैं। हर दिन एक घंटे तक लगातार बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवालों के अलावा किसी भी एक ज्ञानवर्धक विषय पर बात करते हुए उनके बौद्धिक स्तर को परखती हैं। वे स्कूली बच्चों में समूह में पढ़ाई करने की आदत को विकसित कर रही हैं।
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-- -बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल-- -
नकहा के जगसड़ स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय इंचार्ज प्रधानाध्यापिका संगम वर्मा के प्रयासों के चलते स्कूल में 10 गांव के 281 बच्चे विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। कई छात्राओं को उच्च शिक्षा में आर्थिक सहयोग करते हुए उन्हें सबल बनाया जा रहा है। इसके अलावा गांव की अन्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के शिविरों जैसे सिलाई-कढ़ाई व ब्यूटीशियन का आयोजन करवाया जाता है।
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प्राथमिक विद्यालय राजापुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात ऋतु अवस्थी भी इन कामों में कहीं से पीछे नहीं हैं। स्कूल की सूरत बदलने से लेकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर वे लगातार प्रयास कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने निष्प्रयोज्य पड़े फर्नीचर को खुद के खर्चे से सुधरवाया। अकेले इनकी मेहनत से स्कूल के बच्चे ओलंपियाड में शामिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि बच्चों के बौद्धिक स्तर को समझने के बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें अलग से कक्षाओं में पढ़ाया जा रहा है।
कंपोजिट विद्यालय महराजनगर की इंचार्ज प्रधानाध्यापक आरती चोपड़ा बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही योगाभ्यास करा रही हैं। हर दिन एक घंटे तक लगातार बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवालों के अलावा किसी भी एक ज्ञानवर्धक विषय पर बात करते हुए उनके बौद्धिक स्तर को परखती हैं। वे स्कूली बच्चों में समूह में पढ़ाई करने की आदत को विकसित कर रही हैं।
नकहा के जगसड़ स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय इंचार्ज प्रधानाध्यापिका संगम वर्मा के प्रयासों के चलते स्कूल में 10 गांव के 281 बच्चे विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। कई छात्राओं को उच्च शिक्षा में आर्थिक सहयोग करते हुए उन्हें सबल बनाया जा रहा है। इसके अलावा गांव की अन्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के शिविरों जैसे सिलाई-कढ़ाई व ब्यूटीशियन का आयोजन करवाया जाता है।

गांव के बच्चों को निशुल्क कोचिंग पढ़ाती शिक्षिका गौरी कुमारी। स्रोत : स्वयं

गांव के बच्चों को निशुल्क कोचिंग पढ़ाती शिक्षिका गौरी कुमारी। स्रोत : स्वयं

गांव के बच्चों को निशुल्क कोचिंग पढ़ाती शिक्षिका गौरी कुमारी। स्रोत : स्वयं
