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Lakhimpur Kheri News: जिले की खूबसूरती में चार चांद लगाती है आर्द्र भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:27 PM IST
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दुधवा के जलाशय में कलरव करते प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग
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बांकेगंज। भारत-नेपाल सीमा पर बसा खीरी जिला अपनी जलीय जैव विविधता की समृद्धता के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है। तराई की आर्द्र भूमि (वेटलैंड) की खासियत के कारण ही यहां दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर ) की स्थापना की गई है। यहां के जलाशयों में दुनियाभर के ठंडे देशों से रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों के अलावा स्थानीय पक्षी यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं। इसलिए इस दिन पक्षी महोत्सव मनाया जाता है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जहां वन्यजीवों की प्यास बुझाते हैं। स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल प्राकृतवास उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि यहां 450 से अधिक प्रजातियों के पक्षी इन जलाशयों और आसपास इलाके में पाए जाते हैं। शारदा, सुहेली, गेरूआ, घाघरा नदियों के अलावा मैनहन, नगरिया, सेमरई जैसी बड़ी झीलें झादी, भादी, बांकेताल समेत सैकड़ों की संख्या में तालाब हैं। यदि दुधवा टाइगर रिजर्व की बात करें तो इसके कुल क्षेत्रफल का 13 फीसदी हिस्सा वेटलैंड है, जो वन्यजीवों की प्यास बुझाने के साथ यहां के भू गर्भ जलस्तर को बनाए रखता है।
यहां के जलाशय जिले और जंगल के लिए प्राणतत्व के समान हैं जो जंगल, वन्यजीव और पक्षियों को जीवन प्रदान करते हैं। इन जलाशयों में मगरमच्छ, घड़ियाल, सैकड़ों प्रजातियों की मछलियों समेत विभिन्न प्रजातियों के जलीय पक्षी मौजूद हैं।
इन जलाशयों में विभिन्न प्रजातियों की जलीय वनस्पतियां भी हैं। प्रत्येक मौसम में अच्छे जलाशयों के कारण ही दुधवा में वन्यजीवों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। इसी महत्व को देखते हुए दो फरवरी को दुनिया भर विश्व आर्द्र दिवस मनाया जाता है ताकि इनके संरक्षण और संवर्धन का प्रयास किया जा सके।
वर्जन
डीटीआर ही नहीं पूरा जिला वेटलैंड के लिहाज से काफी समृद्ध है जो वन्य एवं पालतू जीवों की प्यास बुझाने के साथ स्थानीय और प्रवासी परिंदों को भी जीवन प्रदान करते हैं। सरकार इनके संरक्षण और संवंर्धन का पूरा प्रयास कर रही है।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा टाइगर रिजर्व के आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जहां वन्यजीवों की प्यास बुझाते हैं। स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल प्राकृतवास उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि यहां 450 से अधिक प्रजातियों के पक्षी इन जलाशयों और आसपास इलाके में पाए जाते हैं। शारदा, सुहेली, गेरूआ, घाघरा नदियों के अलावा मैनहन, नगरिया, सेमरई जैसी बड़ी झीलें झादी, भादी, बांकेताल समेत सैकड़ों की संख्या में तालाब हैं। यदि दुधवा टाइगर रिजर्व की बात करें तो इसके कुल क्षेत्रफल का 13 फीसदी हिस्सा वेटलैंड है, जो वन्यजीवों की प्यास बुझाने के साथ यहां के भू गर्भ जलस्तर को बनाए रखता है।
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यहां के जलाशय जिले और जंगल के लिए प्राणतत्व के समान हैं जो जंगल, वन्यजीव और पक्षियों को जीवन प्रदान करते हैं। इन जलाशयों में मगरमच्छ, घड़ियाल, सैकड़ों प्रजातियों की मछलियों समेत विभिन्न प्रजातियों के जलीय पक्षी मौजूद हैं।
इन जलाशयों में विभिन्न प्रजातियों की जलीय वनस्पतियां भी हैं। प्रत्येक मौसम में अच्छे जलाशयों के कारण ही दुधवा में वन्यजीवों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। इसी महत्व को देखते हुए दो फरवरी को दुनिया भर विश्व आर्द्र दिवस मनाया जाता है ताकि इनके संरक्षण और संवर्धन का प्रयास किया जा सके।
वर्जन
डीटीआर ही नहीं पूरा जिला वेटलैंड के लिहाज से काफी समृद्ध है जो वन्य एवं पालतू जीवों की प्यास बुझाने के साथ स्थानीय और प्रवासी परिंदों को भी जीवन प्रदान करते हैं। सरकार इनके संरक्षण और संवंर्धन का पूरा प्रयास कर रही है।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
