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ठगे से रह गए किसान : बांध निर्माण में जमीन के साथ मकान, पेड़, बंधी-कुआं गए, लेकिन नहीं मिला मुआवजा
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- ग्राम रानीपुरा व चौंरसिल के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिया प्रार्थनापत्र, पुर्नवास न देने का भी लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। राजघाट बांध निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण में किसानों की जमीन चली गई, मकान, पेड़, बंधी और कुआं चले गए, लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। मुआवजे के तौर पर किसानों को जमीन का दाम तो दिया, लेकिन मकान, बंधी, पेड़ और कुआं का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। इसके साथ पुनर्वास योजना का लाभ भी नहीं दिया। राजघाट बांध परियोजना में जमीन गंवाने वाले ग्राम रानीपुरा और ग्राम चौंरसिल के ग्रामीणों ने मंगलवार को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर की है।
मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी पर राजघाट बांध की कार्ययोजना 1972 में बनाई गई थी। इसका निर्माण कार्य 1975 में शुरू किया गया। बांध की ऊंचाई 73 मीटर और 1100 मीटर लंबाई है। जिसमें छह सौ मीटर लंबी सीमेंट की दीवार है। बांध का कैचमेंट एरिया 17 हजार वर्गमीटर है। बांध बनने से यूपी-एमपी के करीब 75 गांव प्रभावित हुए थे। इन गांवों की जमीन सहित परिसंपत्तियों का अधिग्रहण बांध के लिए गया था। इसके एवज में किसानों को मुआवजा भी दिया गया था। लेकिन कुछ गांव में ऐसे है जोकि आज भी मुआवजा की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को ग्राम रानीपुरा व चौंरसिल के एक दर्जन से अधिक प्रभावित किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। जिसमें बताया कि 1981 में किसानों को घटी दर में मुआवजा दिया गया था। लेकिन कई गांवों में मुआवजा अभी तक वितरित नहीं किया गया है। ग्राम रानीपुरा में 13 एकड़ व चौंरसिल में 14 एकड़ जमीन पर बने मकानों, पेड़ों, बंधी, कुआं का मुआवजा नहीं दिया। इसके साथ पुर्नवास भी नहीं दिया गया। नदी परिषद के अधिकारियों ने वन विभाग को गलत नीति के अनुसार जमीन के बदले जमीन दी, जोकि नियम विरुद्ध है। ज्ञापन में बताया गया कि उनके गांव मजदूर श्रमिक वर्ग का है और पलायन पर आश्रित है। उन लोगाें के द्वारा पिछले वर्ष शिकायत की गई थी। लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। पत्र में पीड़ित किसानों ने कार्रवाई की मांग की। साथ ही यह भी बताया कि 18 फरवरी तक उनकी समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता तो वह 20 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठेंगे। पत्र पर राघवेंद्र सिंह, रावराजा सिंह, महेंद्र सिंह, जगभान सिंह, अनीता, रतीराम, सुखलाल, भैयालाल, वृंदावन, मुन्नी, गुड्डी सहित अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अंगूठा निशानी हैं।
गठित की गई टीम भी आकलन करने नहीं गई गांव
ग्रामीणों ने ज्ञापन में यह भी बताया कि 28 अगस्त 2025 को एसडीएम सदर द्वारा टीम गठित की गई थी। जोकि आज तक गांव का आकलन करने नहीं पहुंचे। मात्र वन विभग के कर्मचारी मौके पर गए थे। लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। राजघाट बांध निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण में किसानों की जमीन चली गई, मकान, पेड़, बंधी और कुआं चले गए, लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। मुआवजे के तौर पर किसानों को जमीन का दाम तो दिया, लेकिन मकान, बंधी, पेड़ और कुआं का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। इसके साथ पुनर्वास योजना का लाभ भी नहीं दिया। राजघाट बांध परियोजना में जमीन गंवाने वाले ग्राम रानीपुरा और ग्राम चौंरसिल के ग्रामीणों ने मंगलवार को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर की है।
मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी पर राजघाट बांध की कार्ययोजना 1972 में बनाई गई थी। इसका निर्माण कार्य 1975 में शुरू किया गया। बांध की ऊंचाई 73 मीटर और 1100 मीटर लंबाई है। जिसमें छह सौ मीटर लंबी सीमेंट की दीवार है। बांध का कैचमेंट एरिया 17 हजार वर्गमीटर है। बांध बनने से यूपी-एमपी के करीब 75 गांव प्रभावित हुए थे। इन गांवों की जमीन सहित परिसंपत्तियों का अधिग्रहण बांध के लिए गया था। इसके एवज में किसानों को मुआवजा भी दिया गया था। लेकिन कुछ गांव में ऐसे है जोकि आज भी मुआवजा की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को ग्राम रानीपुरा व चौंरसिल के एक दर्जन से अधिक प्रभावित किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। जिसमें बताया कि 1981 में किसानों को घटी दर में मुआवजा दिया गया था। लेकिन कई गांवों में मुआवजा अभी तक वितरित नहीं किया गया है। ग्राम रानीपुरा में 13 एकड़ व चौंरसिल में 14 एकड़ जमीन पर बने मकानों, पेड़ों, बंधी, कुआं का मुआवजा नहीं दिया। इसके साथ पुर्नवास भी नहीं दिया गया। नदी परिषद के अधिकारियों ने वन विभाग को गलत नीति के अनुसार जमीन के बदले जमीन दी, जोकि नियम विरुद्ध है। ज्ञापन में बताया गया कि उनके गांव मजदूर श्रमिक वर्ग का है और पलायन पर आश्रित है। उन लोगाें के द्वारा पिछले वर्ष शिकायत की गई थी। लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। पत्र में पीड़ित किसानों ने कार्रवाई की मांग की। साथ ही यह भी बताया कि 18 फरवरी तक उनकी समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता तो वह 20 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठेंगे। पत्र पर राघवेंद्र सिंह, रावराजा सिंह, महेंद्र सिंह, जगभान सिंह, अनीता, रतीराम, सुखलाल, भैयालाल, वृंदावन, मुन्नी, गुड्डी सहित अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अंगूठा निशानी हैं।
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गठित की गई टीम भी आकलन करने नहीं गई गांव
ग्रामीणों ने ज्ञापन में यह भी बताया कि 28 अगस्त 2025 को एसडीएम सदर द्वारा टीम गठित की गई थी। जोकि आज तक गांव का आकलन करने नहीं पहुंचे। मात्र वन विभग के कर्मचारी मौके पर गए थे। लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
