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ललितपुर: ब्लैकमेलिंग व वसूली का आरोपी बर्खास्त मुख्य आरक्षी गिरफ्तार, पूछताछ में बोला- गलत संगत में पड़ गया था
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 02:08 AM IST
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सार
पूछताछ में उसने बताया कि वह पुलिस विभाग में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात था, लेकिन बर्खास्त होने के बाद गलत संगत में पड़ गया और खर्च बढ़ने के कारण उसने अपने साथी गोलू यादव के साथ मिलकर लोगों को झांसे में लेना शुरू कर दिया।
पुलिस गिरफ्त में आरोपी बर्खास्त मुख्य आरक्षी जितेंद्र सिंह।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
मुकदमों की विवेचना से आरोपियों के नाम निकलवाने के नाम पर वसूली करने और आपराधिक षड्यंत्र रचकर ब्लैकमेल करने मामले में वांछित चल रहे बर्खास्त मुख्य आरक्षी जितेंद्र सिंह यादव को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ कोतवाली सदर में गैंगस्टर एक्ट सहित चार मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार, बर्खास्त मुख्य आरक्षी जितेंद्र सिंह यादव निवासी मोहल्ला प्रेमगंज, थाना सीपरी बाजार, जनपद झांसी (मूल निवासी डकोर, जनपद जालौन) के खिलाफ कोतवाली सदर में मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसपी मोहम्मद मुश्ताक के निर्देश पर टीम गठित की गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह पुलिस विभाग में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात था, लेकिन बर्खास्त होने के बाद गलत संगत में पड़ गया और खर्च बढ़ने के कारण उसने अपने साथी गोलू यादव के साथ मिलकर लोगों को झांसे में लेना शुरू कर दिया।
बातचीत रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल के आरोप
आरोपी बड़े लोगों से संबंध होने का प्रभाव दिखाकर मुकदमों में नाम कटवाने और जेल से बचाने के नाम पर रुपये ऐंठता था। उसने बताया कि बजाज फाइनेंस से जुड़े एक मामले में एक आरोपी का नाम हटवाने के नाम पर उसने अपने साथी के साथ मिलकर 60 हजार रुपये लिए थे। इसके अलावा, वह दुर्घटना संबंधी मामलों में वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर बदलवाने के लिए विवेचकों पर दबाव बनाता था। पुलिस से बचने के लिए उसने अपने साथी को व्हाट्सएप पर आत्महत्या संबंधी स्टेटस लगाने की सलाह दी थी, ताकि दबाव बनाया जा सके। आरोप है कि वह अपने विभागीय साथियों और आमलोगों की सामान्य बातचीत को रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल करता था और अवैध वसूली करता था। आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी की गुहार लगाई है।
मार्च महीने में हुआ था बर्खास्त
2025 में प्रधान लिपिक शाखा में तैनाती के दौरान आरोपी पर अवकाश संबंधी पत्रावलियों के निस्तारण के लिए पुलिसकर्मियों से अवैध धन मांगने का आरोप लगा था। साथ ही एक महिला सहायक उपनिरीक्षक को अलग-अलग नंबरों से फोन कर मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने का भी आरोप था। प्रारंभिक जांच अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने की थी, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी डॉ. अरविंद कुमार से विस्तृत जांच कराई गई। जांच में दोषी पाए जाने पर 24 मार्च को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
स्वाट टीम प्रभारी की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा
स्वाट टीम प्रभारी अतुल तिवारी की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में आरोप है कि आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर संगठित गिरोह बनाकर धोखाधड़ी की। बजाज फाइनेंस से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी दिनेश कार्तिक का नाम हटवाने और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर 60 हजार रुपये वसूले गए थे। मामले की जानकारी होने पर जब गोलू यादव को पूछताछ के लिए बुलाया गया, तो उसने आरोपी के कहने पर आत्महत्या का स्टेटस लगा लिया था।
इनका यह है कहना
इस मामले में एएसपी कालू सिंह का कहना है कि बर्खास्त मुख्य आरक्षी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसको न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उसका साथी गोलू यादव पहले से ही जेल में निरुद्ध है।
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पुलिस के अनुसार, बर्खास्त मुख्य आरक्षी जितेंद्र सिंह यादव निवासी मोहल्ला प्रेमगंज, थाना सीपरी बाजार, जनपद झांसी (मूल निवासी डकोर, जनपद जालौन) के खिलाफ कोतवाली सदर में मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसपी मोहम्मद मुश्ताक के निर्देश पर टीम गठित की गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह पुलिस विभाग में मुख्य आरक्षी के पद पर तैनात था, लेकिन बर्खास्त होने के बाद गलत संगत में पड़ गया और खर्च बढ़ने के कारण उसने अपने साथी गोलू यादव के साथ मिलकर लोगों को झांसे में लेना शुरू कर दिया।
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बातचीत रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल के आरोप
आरोपी बड़े लोगों से संबंध होने का प्रभाव दिखाकर मुकदमों में नाम कटवाने और जेल से बचाने के नाम पर रुपये ऐंठता था। उसने बताया कि बजाज फाइनेंस से जुड़े एक मामले में एक आरोपी का नाम हटवाने के नाम पर उसने अपने साथी के साथ मिलकर 60 हजार रुपये लिए थे। इसके अलावा, वह दुर्घटना संबंधी मामलों में वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर बदलवाने के लिए विवेचकों पर दबाव बनाता था। पुलिस से बचने के लिए उसने अपने साथी को व्हाट्सएप पर आत्महत्या संबंधी स्टेटस लगाने की सलाह दी थी, ताकि दबाव बनाया जा सके। आरोप है कि वह अपने विभागीय साथियों और आमलोगों की सामान्य बातचीत को रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल करता था और अवैध वसूली करता था। आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी की गुहार लगाई है।
मार्च महीने में हुआ था बर्खास्त
2025 में प्रधान लिपिक शाखा में तैनाती के दौरान आरोपी पर अवकाश संबंधी पत्रावलियों के निस्तारण के लिए पुलिसकर्मियों से अवैध धन मांगने का आरोप लगा था। साथ ही एक महिला सहायक उपनिरीक्षक को अलग-अलग नंबरों से फोन कर मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने का भी आरोप था। प्रारंभिक जांच अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने की थी, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी डॉ. अरविंद कुमार से विस्तृत जांच कराई गई। जांच में दोषी पाए जाने पर 24 मार्च को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
स्वाट टीम प्रभारी की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा
स्वाट टीम प्रभारी अतुल तिवारी की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में आरोप है कि आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर संगठित गिरोह बनाकर धोखाधड़ी की। बजाज फाइनेंस से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी दिनेश कार्तिक का नाम हटवाने और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर 60 हजार रुपये वसूले गए थे। मामले की जानकारी होने पर जब गोलू यादव को पूछताछ के लिए बुलाया गया, तो उसने आरोपी के कहने पर आत्महत्या का स्टेटस लगा लिया था।
इनका यह है कहना
इस मामले में एएसपी कालू सिंह का कहना है कि बर्खास्त मुख्य आरक्षी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसको न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उसका साथी गोलू यादव पहले से ही जेल में निरुद्ध है।