{"_id":"6963fc3288c45fdbd405ed09","slug":"picture-of-the-village-papara-surrounded-by-forest-where-development-has-not-reached-even-today-lalitpur-news-c-131-ltp1001-149589-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव की तस्वीर : जंगल में घिरा पापरा, जहां आज भी विकास नहीं पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव की तस्वीर : जंगल में घिरा पापरा, जहां आज भी विकास नहीं पहुंचा
विज्ञापन
विज्ञापन
मड़ावरा ब्लॉक के अंतिम छोर पर बसे गांव में न सड़क, न बिजली, न रोजगार; मजदूरी के लिए गैर प्रांतों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के आकांक्षात्मक ब्लॉक मड़ावरा के अंतिम छोर पर जंगलों के बीच बसा ग्राम पापरा आज भी विकास की बाट जोह रहा है। ग्राम पंचायत ठनगना का यह मजरा आजादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। कच्चे और जर्जर घर, जंगल के बीच से गुजरती पगडंडी और रोजगार के साधनों का अभाव इस गांव की पहचान बन चुका है।
पापरा गांव में करीब 40 घर हैं, जिनमें लगभग 200 लोग रहते हैं। गांव के चारों ओर 8 से 10 किलोमीटर तक घना जंगल फैला है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीणों को ठनगना से पापरा आने-जाने के लिए 8 से 9 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है, जो बरसात और रात के समय और भी जोखिम भरा हो जाता है। गांव में पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगा हैंडपंप एक साल से खराब पड़ा है। केवल एक सोलर पंप के सहारे पानी की आपूर्ति होती है। सर्दी के मौसम में कोहरा या बादल छाए रहने पर सोलर पंप बंद हो जाता है, ऐसे में ग्रामीण गड्ढों और पोखरों के पानी का उपयोग करने को मजबूर होते हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बदहाल है। गांव में न तो स्कूल की समुचित व्यवस्था है और न ही नियमित शिक्षक। इसका नतीजा यह है कि अधिकांश बच्चे आज भी अनपढ़ हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बीमारी में वे जड़ी-बूटियों से इलाज करते हैं, जबकि गंभीर हालत में मरीजों को सोरई या मड़ावरा ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, वह केवल ठनगना तक ही आ पाती है।
रोजगार के साधन पूरी तरह से नदारद हैं। खेती और स्थानीय मजदूरी ही आजीविका का सहारा है, जो पर्याप्त नहीं है। इसी कारण गांव के लोग घर-गृहस्थी चलाने के लिए गैर प्रांतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। यही विवशता पापरा गांव के उन ग्रामीणों की भी रही, जो सोलदा गांव के लोगों के साथ कर्नाटक मजदूरी करने गए थे, जहां ठेकेदार द्वारा उन्हें बंधक बना लिया गया था। इस घटना के बाद पापरा गांव सुर्खियों में आया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हालात आज भी जस के तस हैं।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के आकांक्षात्मक ब्लॉक मड़ावरा के अंतिम छोर पर जंगलों के बीच बसा ग्राम पापरा आज भी विकास की बाट जोह रहा है। ग्राम पंचायत ठनगना का यह मजरा आजादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। कच्चे और जर्जर घर, जंगल के बीच से गुजरती पगडंडी और रोजगार के साधनों का अभाव इस गांव की पहचान बन चुका है।
पापरा गांव में करीब 40 घर हैं, जिनमें लगभग 200 लोग रहते हैं। गांव के चारों ओर 8 से 10 किलोमीटर तक घना जंगल फैला है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीणों को ठनगना से पापरा आने-जाने के लिए 8 से 9 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है, जो बरसात और रात के समय और भी जोखिम भरा हो जाता है। गांव में पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगा हैंडपंप एक साल से खराब पड़ा है। केवल एक सोलर पंप के सहारे पानी की आपूर्ति होती है। सर्दी के मौसम में कोहरा या बादल छाए रहने पर सोलर पंप बंद हो जाता है, ऐसे में ग्रामीण गड्ढों और पोखरों के पानी का उपयोग करने को मजबूर होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बदहाल है। गांव में न तो स्कूल की समुचित व्यवस्था है और न ही नियमित शिक्षक। इसका नतीजा यह है कि अधिकांश बच्चे आज भी अनपढ़ हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बीमारी में वे जड़ी-बूटियों से इलाज करते हैं, जबकि गंभीर हालत में मरीजों को सोरई या मड़ावरा ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, वह केवल ठनगना तक ही आ पाती है।
रोजगार के साधन पूरी तरह से नदारद हैं। खेती और स्थानीय मजदूरी ही आजीविका का सहारा है, जो पर्याप्त नहीं है। इसी कारण गांव के लोग घर-गृहस्थी चलाने के लिए गैर प्रांतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। यही विवशता पापरा गांव के उन ग्रामीणों की भी रही, जो सोलदा गांव के लोगों के साथ कर्नाटक मजदूरी करने गए थे, जहां ठेकेदार द्वारा उन्हें बंधक बना लिया गया था। इस घटना के बाद पापरा गांव सुर्खियों में आया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हालात आज भी जस के तस हैं।