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Lalitpur News: गोविंद सागर बांध में अतिरिक्त स्पिल-वे बनाने की तैयारी
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मानसून में बढ़ती जल आवक और भंडारण क्षमता को देखते सिंचाई विभाग तैयार कर रहा कार्ययोजना, सीडब्ल्यूसी से ली जाएगी मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद के सबसे पुराने और नगर की जीवनरेखा माने जाने वाले गोविंद सागर बांध में अतिरिक्त स्पिल-वे बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। बांध की भौगोलिक स्थिति, वर्षा ऋतु में जल आवक और सीमित निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग ने इसके लिए कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। योजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को भेजा जाएगा।
विंध्याचल पर्वत शृंखला की तलहटी में स्थित गोविंद सागर बांध का निर्माण शहजाद नदी पर वर्ष 1952 में बनाया गया था। नगर और आसपास के गांवों की भूमि अधिग्रहण कर बने इस बांध से बीते 73 वर्षों से सिंचाई के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति की जा रही है। साइफन प्रणाली से सुसज्जित यह बांध हवा के दबाव के साथ अतिरिक्त पानी की निकासी करता है।
बांध की कुल लंबाई करीब साढ़े तीन किलोमीटर है। इसका पूर्ण जलस्तर 363.93 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 357.84 मीटर निर्धारित है। वर्ष 1962-63 में नहर प्रणाली विकसित होने के बाद किसानों को सिंचाई का लाभ मिलना शुरू हुआ। बाद में नगर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी इसी बांध का पानी जल संस्थान को दिया जाने लगा। समय के साथ बांध में सिल्ट जमा होने से इसकी जल भंडारण क्षमता में कमी आई है। वहीं मानसून के दौरान अधिक जल आवक के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन मैनुअल और डीएसआरपी टीम ने बैथमैट्रिक सर्वे की सिफारिश की थी।
इसके बाद सिंचाई विभाग ने बैथमैट्रिक, टोपोग्राफिक और ड्रोन सर्वे की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी। अगस्त 2025 में दिल्ली से आई तकनीकी टीम ने स्थल पर पहुंचकर बांध की गहराई, जल भंडारण क्षमता, मानसून में जल आवक और भराव क्षेत्र की सीमा का गहन अध्ययन किया। टीम ने बांध पर सुधार और अतिरिक्त स्पिल-वे की संभावनाओं को भी परखा।
सिंचाई विभाग अब इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर गोविंद सागर बांध में अतिरिक्त स्पिल-वे निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना को सीडब्ल्यूसी से स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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गोविंद सागर बांध: एक नजर में
कुल जल भंडारण क्षमता: 96.84 एमसीएम
नहर प्रणाली की लंबाई: 190 किलोमीटर
कैचमेंट एरिया : 367.78 वर्ग किलोमीटर
सिंचित भूमि क्षमता : 10,820 हेक्टेयर
बांध के पानी का उपयोग
31 एमएलडी नगर की पेयजल आपूर्त
12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना
0.2 एमएलडी रेलवे विभाग
वर्जन
बांध की भौगोलिक स्थिति, जल भंडारण क्षमता और मानसून में जल निकासी की आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त स्पिल-वे की कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद के सबसे पुराने और नगर की जीवनरेखा माने जाने वाले गोविंद सागर बांध में अतिरिक्त स्पिल-वे बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। बांध की भौगोलिक स्थिति, वर्षा ऋतु में जल आवक और सीमित निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग ने इसके लिए कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। योजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को भेजा जाएगा।
विंध्याचल पर्वत शृंखला की तलहटी में स्थित गोविंद सागर बांध का निर्माण शहजाद नदी पर वर्ष 1952 में बनाया गया था। नगर और आसपास के गांवों की भूमि अधिग्रहण कर बने इस बांध से बीते 73 वर्षों से सिंचाई के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति की जा रही है। साइफन प्रणाली से सुसज्जित यह बांध हवा के दबाव के साथ अतिरिक्त पानी की निकासी करता है।
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बांध की कुल लंबाई करीब साढ़े तीन किलोमीटर है। इसका पूर्ण जलस्तर 363.93 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 357.84 मीटर निर्धारित है। वर्ष 1962-63 में नहर प्रणाली विकसित होने के बाद किसानों को सिंचाई का लाभ मिलना शुरू हुआ। बाद में नगर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी इसी बांध का पानी जल संस्थान को दिया जाने लगा। समय के साथ बांध में सिल्ट जमा होने से इसकी जल भंडारण क्षमता में कमी आई है। वहीं मानसून के दौरान अधिक जल आवक के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन मैनुअल और डीएसआरपी टीम ने बैथमैट्रिक सर्वे की सिफारिश की थी।
इसके बाद सिंचाई विभाग ने बैथमैट्रिक, टोपोग्राफिक और ड्रोन सर्वे की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी। अगस्त 2025 में दिल्ली से आई तकनीकी टीम ने स्थल पर पहुंचकर बांध की गहराई, जल भंडारण क्षमता, मानसून में जल आवक और भराव क्षेत्र की सीमा का गहन अध्ययन किया। टीम ने बांध पर सुधार और अतिरिक्त स्पिल-वे की संभावनाओं को भी परखा।
सिंचाई विभाग अब इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर गोविंद सागर बांध में अतिरिक्त स्पिल-वे निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना को सीडब्ल्यूसी से स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गोविंद सागर बांध: एक नजर में
कुल जल भंडारण क्षमता: 96.84 एमसीएम
नहर प्रणाली की लंबाई: 190 किलोमीटर
कैचमेंट एरिया : 367.78 वर्ग किलोमीटर
सिंचित भूमि क्षमता : 10,820 हेक्टेयर
बांध के पानी का उपयोग
31 एमएलडी नगर की पेयजल आपूर्त
12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना
0.2 एमएलडी रेलवे विभाग
वर्जन
बांध की भौगोलिक स्थिति, जल भंडारण क्षमता और मानसून में जल निकासी की आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त स्पिल-वे की कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड